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नक्सल प्रभावित बीजापुर में शिक्षा की नई कहानी, 53 बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रहे शिक्षक

कभी नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 2 स्थानीय शिक्षक जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त कोचिंग देकर उनके सपनों को नई दिशा दे रहे हैं। करीब 53 बच्चे 6 स्कूलों से आकर नवोदय प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते हैं।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर...- India TV Hindi
Image Source : ANI छत्तीसगढ़ के बीजापुर में बच्चों के लिए एक अनोखी पहल शुरू हुई है।

Highlights

  • बीजापुर में स्कूल से पहले 53 बच्चे मुफ्त कोचिंग में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
  • 2 स्थानीय शिक्षक पिछले दो साल से बच्चों को मुफ्त में पढ़ाकर सपनों की राह दिखा रहे।
  • नवोदय की तैयारी कर रही छात्रा ने भविष्य में शिक्षक बनने की इच्छा जताई।

बीजापुर: छत्तीसगढ़ का बीजापुर कभी नक्सली हिंसा के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां की सुबह बच्चों के सपनों से शुरू हो रही है। स्कूल की घंटी बजने से पहले 6 अलग-अलग स्कूलों के करीब 53 बच्चे एक छोटे से कोचिंग सेंटर में पहुंचते हैं। यहां 2 स्थानीय शिक्षक पिछले 2 साल से गरीब और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रहे हैं। इनका मकसद बच्चों को नवोदय विद्यालय जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना और शिक्षा के जरिए उनकी जिंदगी बदलना है। शिक्षकों की यह पहल फिल्म 'सुपर 30' से प्रेरित है।

स्कूल से पहले शुरू होती है पढ़ाई

बीजापुर के गांवों में जब ज्यादातर लोग दिन की शुरुआत कर रहे होते हैं, तब ये बच्चे पढ़ाई के लिए कोचिंग सेंटर पहुंच जाते हैं। करीब 50 से ज्यादा बच्चे सुबह-सुबह यहां पढ़ाई करते हैं। इनमें 6 अलग-अलग स्कूलों के विद्यार्थी शामिल हैं। बच्चों का सबसे बड़ा लक्ष्य नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास करना है। दूरदराज और सुविधाओं से वंचित गांवों के इन बच्चों के लिए यह कोचिंग किसी बड़े मौके से कम नहीं है।

Image Source : ANI2 स्थानीय शिक्षक जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त कोचिंग देते हैं।

'मैं नवोदय की तैयारी कर रही हूं'

एक छात्र ने कहा, 'मैं पांचवीं कक्षा में पढ़ता हूं। मैं यहां नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं। मैं आगे भी तैयारी करना चाहता हूं, अच्छी तरह पढ़ना चाहता हूं और जीवन में कुछ बनना चाहता हूं।' एक छात्रा ने भी अपने सपने के बारे में बताया। उसने कहा,

'मैं यहां अच्छी तरह पढ़ना चाहती हूं और जो बनना चाहती हूं, उसे हासिल करना चाहती हूं। मैं नवोदय की तैयारी कर रही हूं और आगे चलकर शिक्षक बनना चाहती हूं।'

इन बच्चों के लिए पढ़ाई सिर्फ परीक्षा पास करने का जरिया नहीं, बल्कि अपने भविष्य को बदलने का रास्ता बन रही है।

शिक्षकों को 'सुपर 30' से मिली प्रेरणा

यह पहल किसी बड़े सरकारी कार्यक्रम के तौर पर शुरू नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत 2 शिक्षकों की अपनी पहल और बच्चों की पढ़ाई के प्रति रुचि देखकर हुई। फिल्म 'सुपर 30', जिसमें ऋतिक रोशन ने आनंद कुमार की भूमिका निभाई थी, से प्रेरित होकर स्थानीय शिक्षक प्रीतम कुमार बैगा और गजेंद्र प्रधान ने जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त कोचिंग देने का फैसला किया। पिछले करीब 2 साल से दोनों शिक्षक स्कूल की नियमित पढ़ाई शुरू होने से पहले बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे हैं।

बच्चों की रुचि देखकर बढ़ाया हौसला

धनौरा के क्लस्टर कोऑर्डिनेटर सत्यजीत राणा ने बताया कि जब वह यहां आए तो उन्होंने देखा कि बच्चों में पढ़ाई को लेकर काफी रुचि है। उन्होंने कहा,

'जब मैं पहली बार यहां आया तो मैंने देखा कि बच्चों में पढ़ाई को लेकर सच्ची रुचि थी। गजेंद्र यादव, जो हेड टीचर हैं, और प्रीतम कुमार बैगा पहले से बच्चों को संभाल रहे थे और अपने समय से उन्हें नवोदय प्रवेश परीक्षा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे थे।'

सत्यजीत राणा ने कहा कि बच्चों और शिक्षकों दोनों की रुचि देखकर उन्होंने इस प्रयास को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके मुताबिक, पिछले दो साल से बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने का काम चल रहा है।

Image Source : ANIयहां पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास करना चाहते हैं।

'बच्चों में नवोदय का जबरदस्त क्रेज'

इलाके में मार्च 2024 में सहायक शिक्षक के तौर पर नियुक्त हुए गजेंद्र प्रधान ने बताया कि कोचिंग शुरू करने के पीछे बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने की सोच थी। उन्होंने कहा,

'यह कोचिंग पिछले साल शुरू हुई थी। यहां बच्चों में पढ़ाई को लेकर काफी रुचि है। बच्चे बहुत सक्रिय हैं और नवोदय प्रवेश परीक्षा को लेकर उनमें जबरदस्त उत्साह है।'

गजेंद्र प्रधान ने बताया कि शिक्षकों ने सोचा कि अगर वे बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकते हैं और परीक्षा की तैयारी में मदद कर सकते हैं, तो उन्हें यह पहल जरूर शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस साल करीब 53 बच्चे कोचिंग में आ रहे हैं और कुल मिलाकर 6 अलग-अलग स्कूलों के बच्चे यहां पढ़ने पहुंचते हैं।

2 साल में कई बच्चों का हुआ चयन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुफ्त कोचिंग का असर अब दिखाई देने लगा है। पिछले 2 वर्षों में इस पहल से जुड़े कई बच्चों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की और अलग-अलग जगहों पर प्रवेश पाया है। दूरदराज और संसाधनों की कमी वाले गांवों से आने वाले बच्चों के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। जहां कभी संघर्ष और सीमित अवसर बीजापुर की पहचान हुआ करते थे, वहीं अब सुबह की ये कक्षाएं बच्चों के सपनों को नई दिशा दे रही हैं। (ANI से इनपुट्स के साथ)

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