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कभी नक्सलियों का ट्रेनिंग ग्राउंड था मैदान, अब गूंज रहे 'भारत माता की जय' के नारे

कभी नक्सलियों के ट्रेनिंग ग्राउंड रहे कांकेर के आमाबेड़ा में अब ‘भारत माता की जय’ के नारे गूंज रहे हैं। ‘मिशन रक्षक’ के तहत पुलिस स्थानीय युवाओं को सुरक्षा बलों की भर्ती के लिए मुफ्त फिजिकल और लिखित परीक्षा की तैयारी करा रही है।

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Image Source : ANI REPRESENTATIONAL कांकेर में ‘मिशन रक्षक’ के तहत पुलिस युवाओं को सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए ट्रेनिंग दे रही है।

Highlights

  • कभी नक्सलियों का ट्रेनिंग ग्राउंड था आमाबेड़ा, अब ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज रहा।
  • मिशन रक्षक के तहत 5 जगहों पर मुफ्त ट्रेनिंग, 350 युवाओं ने कराया रजिस्ट्रेशन।
  • नक्सल दौर में घरों तक सीमित बेटियां अब वर्दी का सपना लेकर मैदान में बहा रहीं पसीना।

कांकेर: छत्तीसगढ़ का कांकेर जिला कभी नक्सल हिंसा से बुरी तरह प्रभावित रहा था, लेकिन अब यहां की तस्वीर तेजी से बदल रही है। कांकेर पुलिस ने स्थानीय युवाओं को सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए तैयार करने के लिए ‘मिशन रक्षक’ शुरू किया है। इस अभियान के तहत युवाओं को फिजिकल टेस्ट और लिखित परीक्षा की तैयारी पूरी तरह मुफ्त कराई जा रही है। बड़ी संख्या में युवा इसमें शामिल हो रहे हैं। खास बात यह है कि बड़ी संख्या में युवतियां भी बढ़-चढ़कर ट्रेनिंग ले रही हैं।

कभी नक्सलियों का ट्रेनिंग ग्राउंड था आमाबेड़ा

‘मिशन रक्षक’ के बाद आमाबेड़ा का वह मैदान, जहां कभी नक्सली ट्रेनिंग किया करते थे, अब ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से गूंज रहा है। स्थानीय युवा यहां अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। नक्सलवाद के खत्म होने के बाद इलाके की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। युवा अब पुलिस और सुरक्षा बलों में भर्ती होने का सपना लेकर नियमित अभ्यास कर रहे हैं। बता दें कि हाल ही में कभी नक्सल प्रभावित रहे बीजापुर की कहानी सामने आई थी जहां शिक्षक 53 बच्चों को मुफ्त में कोचिंग दे रहे हैं।

कांकेर में जगहों पर चल रही मुफ्त ट्रेनिंग

कांकेर पुलिस का यह अभियान जिले के 5 प्रमुख स्थानों आमाबेड़ा, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कोयलीबेड़ा और पखांजूर में चल रहा है। यहां बड़ी संख्या में स्थानीय युवक-युवतियां प्रशिक्षण ले रहे हैं। उम्मीदवारों को 100 मीटर दौड़, 1500 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद और गोला फेंक जैसी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा रहा है। सुबह करीब 2 घंटे फिजिकल ट्रेनिंग के साथ लिखित परीक्षा की तैयारी भी कराई जाती है।

'नक्सल इलाके में रोजगार के मौके सीमित थे'

कांकेर के पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने बताया कि जिले का बड़ा हिस्सा नक्सल प्रभावित रहा है। इसका स्थानीय युवाओं की जिंदगी पर गंभीर असर पड़ा। रोजगार के अवसर सीमित थे और शहर तक पहुंचना भी आसान नहीं था। कई युवा अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। वहीं, पढ़ाई पूरी करने वालों में भी बहुत से युवा बेरोजगार रह गए। इसी स्थिति को देखते हुए ‘मिशन रक्षक’ की शुरुआत की गई।

पुलिस, CRPF, BSF समेत कई भर्तियों की तैयारी

SP निखिल राखेचा ने कहा कि अभियान का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को राज्य पुलिस, CRPF, BSF, CISF, अग्निवीर और अन्य केंद्रीय व राज्य सुरक्षा बलों की भर्ती परीक्षाओं के लिए मुफ्त में तैयार करना है। अभियान शुरू होने के बाद युवाओं में उत्साह लगातार बढ़ा है। अकेले आमाबेड़ा में अब तक करीब 350 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें लगभग 62 युवतियां शामिल हैं। अन्य स्थानों पर भी बड़ी संख्या में युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

सुबह 5:30 बजे मैदान में पहुंचते हैं युवा

आमाबेड़ा के थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुदर्शन सिंह ध्रुव के मुताबिक, युवा सुबह करीब 5:30 बजे मैदान में पहुंच जाते हैं। सबसे पहले वार्मअप और जरूरी एक्सरसाइज कराई जाती है। इसके बाद वजन उठाने की ट्रेनिंग, दौड़, जमीन पर रेंगने की एक्सरसाइज, तेज दौड़, गोला फेंक, ऊंची कूद और लंबी कूद का अभ्यास कराया जाता है। लगभग सभी सुरक्षा बलों की भर्ती में फिजिकल टेस्ट की शुरुआत दौड़ से होती है, इसलिए युवाओं को 100 से 1500 मीटर तक अलग-अलग दूरी की दौड़ का अभ्यास कराया जा रहा है।

एक्सपर्ट ट्रेनर सुधारते हैं युवाओं की तकनीक

प्रशिक्षण के लिए विशेषज्ञ ट्रेनरों की टीम बनाई गई है। ये ट्रेनर युवाओं को अलग-अलग समूहों में अभ्यास कराते हैं और एक्सरसाइज या दौड़ने के दौरान उनकी तकनीक में सुधार करते हैं। फिजिकल ट्रेनिंग के साथ लिखित परीक्षा की तैयारी के लिए लाइब्रेरी भी बनाई गई है। ‘मावा मोडोल’ नाम का गाइडेंस सेंटर-कम-लाइब्रेरी शुरू किया गया है। स्थानीय बोली में ‘मावा मोडोल’ का अर्थ ‘हमारा लक्ष्य’ है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें युवाओं को मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती हैं।

अब गांव में ही मिल रही कोचिंग

उम्मीदवार संजीव कुमार प्रधान ने बताया कि पहले सरकारी नौकरी की तैयारी का मौका मुख्य रूप से उन युवाओं को मिलता था, जो कोचिंग के लिए शहर जा सकते थे। अब गांव और स्थानीय इलाकों में ही यह तैयारी हो रही है। उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग सिर्फ शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को भी चरण-दर-चरण समझाया जाता है। नियमित सुबह की ट्रेनिंग से फिटनेस बेहतर हुई है, दौड़ का समय कम हुआ है और अलग-अलग फिजिकल मानकों में प्रदर्शन सुधरा है।

घर से निकलना मुश्किल था, अब बेटियां मैदान में

उम्मीदवार श्रद्धा कुरेटी ने बताया कि इस अभियान का सबसे बड़ा बदलाव युवतियों के बीच दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, जब इलाके में नक्सली प्रभाव चरम पर था, तब महिलाओं और लड़कियों के लिए घर या गांव से बाहर निकलना आसान नहीं था। परिवार भी उन्हें रोकते थे। माओवादी फरमानों के कारण उच्च शिक्षा या गांव से बाहर नौकरी करने पर रोक थी। उन्होंने कहा कि इन आदेशों का विरोध करने वालों को सार्वजनिक रूप से मौत की सजा तक दी जाती थी। अब हालात बदल चुके हैं और युवाओं के सामने आगे बढ़ने के नए अवसर हैं।

महिला ट्रेनर बोलीं, 'मेहनत जारी रही तो चयन होगा'

बस्तर फाइटर्स की कांस्टेबल और महिला ट्रेनर प्रतिभा यादव ने युवाओं की मेहनत की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन बच्चों में काफी क्षमता है और मेहनत करने का मजबूत जज्बा भी है। अगर वे इसी तरह नियमित अभ्यास जारी रखते हैं, तो आने वाली भर्ती में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के चयन की उम्मीद है। ‘मिशन रक्षक’ के जरिए कांकेर के उन इलाकों में युवाओं को सुरक्षा बलों में जाने का रास्ता मिल रहा है, जहां कभी नक्सलवाद ने शिक्षा, रोजगार और सामान्य जीवन के अवसरों को प्रभावित किया था। (ANI से इनपुट्स के साथ)

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