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RSS प्रमुख मोहन भागवत 5 दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर, वंदे भारत ट्रेन से पहुंचे रायपुर

RSS प्रमुख मोहन भागवत 5 दिन के दौरे पर रायपुर पहुंचे। वह 27 से 31 दिसंबर तक रायपुर में रहकर कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों से संगठनात्मक मामलों पर चर्चा करेंगे।

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Image Source : PTI RSS प्रमुख मोहन भागवत।

रायपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी कि RSS के प्रमुख मोहन भागवत 5 दिन के दौरे पर शुक्रवार शाम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे। RSS के पदाधिकारियों ने बताया कि मोहन भागवत शुक्रवार की शाम को वंदे भारत ट्रेन से रायपुर स्टेशन पहुंचे। उन्होंने कहा कि भागवत 27 से 31 दिसंबर तक रायपुर के दौरे पर रहेंगे। पदाधिकारियों ने बताया कि RSS सरसंघचालक का यह संगठनात्मक दौरा है, और इस दौरान वह अलग-अलग सत्र में कार्यकताओं तथा वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ संगठन के मामलों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने बताया कि 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 2025 में अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है, इसी के मद्देनजर भागवत देश के अलग-अलग प्रांतों की यात्रा कर रहे हैं।

‘अंग्रेजों ने देश के इतिहास को विकृत किया’

भागवत ने इससे पहले गुरुवार को कहा कि भारत के ब्रिटिश शासकों ने यह संदेश फैलाने के लिए देश के इतिहास को विकृत किया कि स्थानीय आबादी खुद पर शासन करने के लिए अयोग्य है। RSS सरसंघचालक ने कहा,‘1857 में भारत के ब्रिटिश शासकों को एहसास हुआ कि असंख्य जातियों, संप्रदायों, भाषाओं, भौगोलिक असमानताओं और भारतीयों के आपस में लड़ने के बावजूद वे तब तक एकजुट रहेंगे जब तक कि वे विदेशी आक्रमणकारियों को देश से बाहर नहीं निकाल देते।’ वह नागपुर में सोमलवार एजुकेशन सोसाइटी के 70वें स्थापना दिवस के अवसर पर 21वीं सदी में शिक्षकों की भूमिका पर एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

‘ब्रिटिश शासकों ने फैलाए थे कई झूठ’

RSS प्रमुख ने कहा,‘ब्रिटिश शासकों ने कुछ ऐसा करने का निर्णय लिया जिससे भारतीयों की यह विशेषता समाप्त हो जाए और यह सुनिश्चित हो जाए कि ब्रिटिश शासन हमेशा के लिए बना रहे। उनका उद्देश्य भारतीयों के मन से उनके इतिहास, पूर्वजों और गौरवपूर्ण विरासत को भुला देना था। इस उद्देश्य के लिए, अंग्रेजों ने तथ्यों की आड़ में हमारे दिमाग में कई झूठ डाल दिए। सबसे बड़ा झूठ यह था कि भारत में ज़्यादातर लोग बाहर से आए थे। ऐसा ही एक झूठ यह है कि भारत पर आर्यों ने आक्रमण किया था जिन्होंने द्रविड़ों से लड़ाई की थी। उन्होंने प्रचार किया कि खुद शासन करना भारतीयों के खून में नहीं है और यहां के लोग धर्मशालाओं में रहने वालों की तरह रहते हैं।’ (भाषा)