नई दिल्ली: दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग सरकार की बिजली सब्सिडी योजना का फायदा उठाते हैं। ऐसे में योजना का फायदा उठाने वालों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है। दिल्ली सरकार ने बिजली सब्सिडी योजना का फायदा उठाने के लिए आधार की पहचान अनिवार्य कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली सरकार ने अपनी बिजली सब्सिडी योजना का फायदा उठाने के लिए ग्राहकों के लिए आधार पहचान जरूरी कर दी है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि लाभार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सरकारी खजाने पर बिजली सब्सिडी का बोझ भी बढ़ता जा रहा है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 तक दिल्ली सरकार का बिजली सब्सिडी के लिए आवंटन 4,037.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। ऐसे में मौजूदा वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए सरकार ने इस काम के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजट रखा। हालांकि पिछले दशक में दिल्ली में बिजली ग्राहकों की संख्या में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और अभी यह संख्या 73 लाख से ज़्यादा है।
हाल ही में दिल्ली से ये खबर भी सामने आई थी कि दिल्ली सरकार ने बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट के आदेश दिए हैं। इसके तहत 3 महीने में ऑडिट पूरा करना होगा। गौरतलब है कि बीते कई सालों से ये मांग की जा रही थी कि CAG ऑडिट किया जाए लेकिन बिजली कंपनियां इसके लिए तैयार नहीं थीं। हालांकि जब ये फैसला लिया गया तो उस वक्त कोर्ट से भी बिजली कंपनियों को झटका लगा और उन्हें कोई राहत नहीं दी गई।
बता दें कि ये मामला नया नहीं है। वर्तमान में दिल्ली में रेखा गुप्ता यानी बीजेपी की सरकार है। इससे पहले राज्य में अरविंद केजरीवाल यानी आप की सरकार थी। केजरीवाल ने भी अपने कार्यकाल में बिजली कंपनियों के ऑडिट की बात कही थी लेकिन उनके कार्यकाल में भी ये काम नहीं हो सका था। मकसद साफ है कि कैग के ऑडिट में अगर बिजली कंपनियों में किसी तरह की कोई अनियमितता की बात सामने आती है तो सख्त एक्शन की तैयारी की गई है।
बता दें कि दिल्ली में बिजली केवल आम आदमी की जरूरत से जुड़ा मुद्दा नहीं है बल्कि ये एक राजनीतिक मुद्दा भी है क्योंकि बड़ी संख्या में दिल्ली में लोग बिजली सब्सिडी योजना का फायदा लेते हैं। (इनपुट- PTI)
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