दिल्ली मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने 2016 के सड़क हादसे में 80 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता झेलने वाले 32 वर्षीय मैकेनिक को करीब 78.28 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने हादसे के लिए कार चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने को जिम्मेदार माना और बीमा कंपनी को रकम जमा करने का निर्देश दिया। जानिए क्या है पूरा मामला।
कार का दरवाजा अचानक खुलने से हुआ हादसा
मामले के अनुसार, मोहम्मद अबरार 11 जुलाई 2016 की दोपहर दिल्ली के शंकर रोड पर स्कूटर से जा रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे खड़ी एक कार के चालक ने अचानक कार का दरवाजा खोल दिया। इससे अबरार का स्कूटर दरवाजे से टकरा गया और उनके सिर में चोट लगी। उन्हें इलाज के दौरान दो बार ऑपरेशन कराना पड़ा।
चालक की लापरवाही को माना जिम्मेदार
28 सितंबर को दिए आदेश में पीठासीन अधिकारी अभिलाष मल्होत्रा ने हादसे के लिए कार चालक की लापरवाही को जिम्मेदार माना। बीमा कंपनी टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने अबरार पर भी लापरवाही का आरोप लगाया था, लेकिन ट्रिब्यूनल ने इसे खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि दोपहिया वाहन चलाने वाले व्यक्ति से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह बिना चेतावनी अचानक खुलने वाले कार के दरवाजे का अनुमान लगा ले।
80 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता
अस्पताल के डिसेबिलिटी बोर्ड ने अबरार की स्थायी दिव्यांगता 80 प्रतिशत आंकी थी। इसमें सिर की चोट के कारण न्यूरोफिजियोलॉजिकल और चलने-फिरने से जुड़ी अक्षमता शामिल थी। मनोवैज्ञानिक जांच में भी उनकी संज्ञानात्मक क्षमता में महत्वपूर्ण कमी सामने आई। ट्रिब्यूनल ने उनकी कार्यात्मक दिव्यांगता को 100 प्रतिशत माना।
मैकेनिक का काम करना हुआ मुश्किल
अबरार ने केवल 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी और वह एसी मैकेनिक के तौर पर काम करते थे। इस काम में भारी औजार उठाने और कठिन परिस्थितियों में काम करने की जरूरत होती है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अबरार यह काम नहीं कर सकते और दूसरे रोजगार की उनकी संभावनाएं भी काफी कम हैं।
इन मदों के तहत मिला मुआवजा
ट्रिब्यूनल ने करीब 78.28 लाख रुपये का मुआवजा तय किया। इसमें भविष्य की आय का नुकसान, इलाज के दौरान आय का नुकसान, चिकित्सा खर्च, दर्द और परेशानी, सुविधाओं से वंचित होने, मानसिक और शारीरिक सदमे, विकृति, कठिनाइयों तथा भविष्य में मानसिक तनाव और दुख समेत अन्य मद शामिल हैं। चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी संयुक्त रूप से जिम्मेदार थे, लेकिन राशि जमा करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी को दी गई।
(रिपोर्ट- PTI)
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