दिल्ली में ₹1 करोड़ की रंगदारी का खेल, गोल्डी बराड़ के नाम पर दुबई से धमकी; फायरिंग की साजिश नाकाम, 3 गिरफ्तार
दिल्ली में कारोबारियों से 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और पैसे न देने पर फायरिंग की कथित साजिश का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, UAE नंबर से धमकी भरी कॉल की गई और मामले में भारत-दुबई नेटवर्क से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ और नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने 1 करोड़ की रंगदारी मांगने वाले एक कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क के तार दुबई और भारत से जुड़े हैं और इसमें गोल्डी बराड़ गैंग के नाम का इस्तेमाल कर दिल्ली के कारोबारियों को धमकाया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि रंगदारी नहीं देने पर पीड़ित के घर पर कई राउंड फायरिंग करने की साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
पूरी कहानी की शुरुआत 16 सितंबर 2026 की रात से हुई। पुलिस के मुताबिक रात करीब 8 बजकर 15 मिनट पर शिकायतकर्ता प्रवीन जैन के मोबाइल पर तीन मिस्ड कॉल आईं। इसके बाद रात करीब 9 बजकर 27 मिनट पर उनके बेटे आयुष को संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के एक मोबाइल नंबर से कॉल आई।
गोल्डी बराड़ से बताया कनेक्शन
कॉल करने वाले ने कथित तौर पर खुद को गोल्डी बराड़ का सहयोगी बताया और परिवार से 1 करोड़ की रंगदारी मांगी। आरोप है कि पैसे नहीं देने पर परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इसके बाद भी परिवार को दोबारा फोन कर रंगदारी की मांग और धमकी दोहराई गई।
मामले की सूचना मिलने के बाद रोहिणी स्थित थाना रूप नगर पुलिस ने जांच शुरू की। इस मामले में 17 सितंबर 2026 को एफआईआर नंबर 162/2026 दर्ज की गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 308(4) और 351(4) के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता और कॉल के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को देखते हुए नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की एसटीएफ ने थाना रूप नगर पुलिस के साथ मिलकर जांच शुरू की। डीसीपी नॉर्थ निहारिका भट्ट की निगरानी में एसीपी ऑपरेशंस नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट विशेष धत्तरवाल, एसटीएफ के इंस्पेक्टर आशीष दुबे और थाना रूप नगर के एसएचओ इंस्पेक्टर रमेश कौशिक के नेतृत्व में टीम बनाई गई।
पुलिस ने तकनीकी निगरानी, डिजिटल रिकॉर्ड और खुफिया जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। जांच में सामने आया कि कॉलिंग के लिए इंटरनेट आधारित तकनीक और सर्वर का इस्तेमाल किया गया था। तकनीकी जांच के दौरान आईपी एड्रेस 51.91.249.248 सामने आया, जो ओवीएच एसएएस नाम की फ्रांस की कंपनी से जुड़ा पाया गया। पुलिस के मुताबिक इससे संकेत मिला कि कॉल के लिए वीपीएस और डेटा सेंटर आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया गया था।
यूएई से जुड़े तार
जांच के दौरान कुछ डिजिटल अकाउंट्स के तार यूएई से जुड़े मिले। इन तकनीकी सुरागों के आधार पर पुलिस ने अबूजर नाम के एक व्यक्ति की गतिविधियों की जांच की। पुलिस के मुताबिक अबूजर 13 जून 2026 को दुबई गया था। इसके अलावा दुबई में उस्मान की सिम के इस्तेमाल और एक मोबाइल हैंडसेट के आईएमईआई से भी जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
इन सुरागों के आधार पर पुलिस ने देहरादून और करनाल में जुबैर, मारूफ और उस्मान से पूछताछ की। पूछताछ और तकनीकी जांच से पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि धमकी भरी कॉल दुबई से आरिश नाम के व्यक्ति ने की थी, जो उस्मान और अबूजर का भाई बताया गया है।
दुबई से धमकी भरी कॉल
जांच में शामली के रसूलपुर गुजरान निवासी आरिफ उर्फ पिस्टल का नाम भी सामने आया। पुलिस के मुताबिक आरिफ भारत में इस पूरे नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी था। आरोप है कि आरिफ ने आरिश को धमकी भरी कॉल करने के लिए मोटी रकम देने की पेशकश की और उसे हरियाणवी भाषा में बात करने के लिए कहा, ताकि दुबई से की जा रही कॉल दिल्ली में किसी स्थानीय अपराधी की कॉल लगे। जांच के दौरान पुलिस को तितवाड़ा निवासी मुबारिक उर्फ गुल्लू की भूमिका भी सामने आई। पुलिस के मुताबिक वह इस कथित साजिश का मुख्य आरोपी था।
19 सितंबर एक और कारोबारी धमकाया
इसी बीच 19 सितंबर को दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक और कारोबारी को बिल्कुल इसी तरह की धमकी मिली। सेक्टर-1, रोहिणी में रहने वाले निर्माण कारोबारी मनोज मलिक के छोटे भाई को रात करीब 10 बजकर 11 मिनट और 10 बजकर 12 मिनट पर उसी यूएई नंबर से दो व्हाट्सऐप कॉल आईं।
इसके बाद 37 सेकंड का एक ऑडियो मैसेज भी भेजा गया। कॉल करने वाले ने खुद को महेंद्रगढ़ का विक्रांत बताया और कथित तौर पर गोल्डी बराड़ गैंग से जुड़ा होने का दावा किया। उसने 48 घंटे के अंदर 1 करोड़ देने की मांग की। साथ ही आरोप है कि पैसे नहीं देने पर घर पर फायरिंग और अन्य गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इस मामले को लेकर 24 सितंबर 2026 को थाना विजय विहार, रोहिणी में एफआईआर नंबर 0520/2026 दर्ज की गई। इसमें बीएनएस की धारा 308(2) और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया गया।
दोनों धमकियों के पीछे एक ही नेटवर्क होने का शक
पुलिस के मुताबिक, दोनों मामलों में एक ही यूएई नंबर का इस्तेमाल होना बेहद महत्वपूर्ण सुराग था। इससे पुलिस को शक हुआ कि दोनों कारोबारियों को धमकी देने के पीछे एक ही नेटवर्क हो सकता है। जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि रंगदारी नहीं देने पर रूप नगर में शिकायतकर्ता के घर पर कई राउंड फायरिंग करने की कथित साजिश रची गई थी। पुलिस के मुताबिक, यह योजना फायरिंग की घटना से करीब दो दिन पहले बनाई गई थी। इसके बाद फायरिंग कर दोबारा रंगदारी की मांग करने की योजना थी।
पुलिस ने की फायरिंग की साजिश नाकाम
हालांकि, पुलिस को समय रहते इसकी जानकारी मिल गई और थाना रूप नगर के साथ मिलकर पीड़ित के घर पर सुरक्षा और रोकथाम के इंतजाम किए गए। इस तरह कथित फायरिंग की साजिश को अंजाम दिए जाने से पहले ही नाकाम कर दिया गया।
इसके बाद पुलिस ने आरिफ उर्फ पिस्टल की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। तकनीकी निगरानी से उसकी लोकेशन गुजरात के अहमदाबाद में मिली। इसके बाद एसटीएफ और थाना रूप नगर की टीम ने अहमदाबाद पुलिस की मदद से कार्रवाई की और 24 सितंबर 2026 को अहमदाबाद के वेजलपुर इलाके से आरिफ उर्फ पिस्टल को गिरफ्तार कर लिया।
रंगदारी नेटवर्क की भारतीय कड़ी की जांच
पुलिस के मुताबिक, आरिफ की गिरफ्तारी से इस कथित भारत-दुबई रंगदारी नेटवर्क की भारतीय कड़ी का पता लगाने में महत्वपूर्ण मदद मिली। पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि रंगदारी की रकम नहीं मिलने पर धमकी को अंजाम देने के लिए शूटर्स को भी लगाया गया था।
पुलिस के मुताबिक, तितवाड़ा निवासी मुबारिक उर्फ गुल्लू ने इन शूटर्स के लिए दिल्ली के किराड़ी इलाके में ठहरने की व्यवस्था की थी और कमरे का किराया भी दिया था। जांच में चार संदिग्ध शूटर्स के नाम सामने आए हैं। इनमें दो पानीपत और दो मुजफ्फरनगर के खालापार इलाके के बताए जा रहे हैं। ये सभी फिलहाल वांछित हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पुलिस ने इस मामले में मुबारिक उर्फ गुल्लू को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक मुबारिक शिकायतकर्ता के कारोबारी साझेदार दिलशाद का सगा भाई है।
इन लोगों की हुई गिरफ्तारी
जांच में पुलिस का दावा है कि मुबारिक ने पूरी साजिश रची और सह-आरोपी आरिफ को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई। इसके अलावा उसने शूटर्स के लिए किराड़ी में रहने की व्यवस्था की और कमरे का किराया भी दिया। मुबारिक को दिल्ली में 25 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में पुलिस ने एक अन्य आरोपी नवाब अली उर्फ सोनिज को भी गिरफ्तार किया है। वह मुजफ्फरनगर के खालापार का रहने वाला है और पुलिस के मुताबिक उन चार वांछित शूटर्स में से एक था, जिन्हें कथित तौर पर फायरिंग के लिए लगाया गया था।
पुलिस के मुताबिक नवाब अली 1 अक्टूबर 2026 को ट्रेन के जरिए फरार होने की कोशिश कर रहा था। रेवाड़ी और अलवर के बीच चलती ट्रेन से उसे पकड़ने की कार्रवाई की गई और आरपीएफ की समय पर मिली मदद से उसे रेवाड़ी स्टेशन के पास चलती ट्रेन से पकड़ लिया गया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी आरिफ उर्फ पिस्टल की उम्र 32 साल है। वह अहमदाबाद के फतेहबाड़ी का रहने वाला है और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली जिले के रसूलपुर गुजरान का रहने वाला बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक, आरिफ पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ 2016 से 2026 के बीच थाना कैराना, जिला शामली में कुल 12 मामले दर्ज बताए गए हैं। इनमें हत्या के प्रयास, रंगदारी, आपराधिक धमकी, दंगा और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि आरिफ इस कथित भारत-दुबई रंगदारी नेटवर्क में भारत की एक महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कड़ी के तौर पर काम कर रहा था।
डिजिटल सबूत और वित्तीय लेन-देन की जांच
फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है। पुलिस चार संदिग्ध शूटर्स समेत बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है। साथ ही दुबई से धमकी भरी कॉल करने वाले व्यक्ति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसियां कॉल डिटेल, डिजिटल सबूत और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही हैं, ताकि इस कथित नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाया जा सके।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि एक ही यूएई नंबर से दिल्ली के दो कारोबारियों को ₹1 करोड़ की समान रंगदारी मांग के साथ धमकी देने वाला यह नेटवर्क किसी और वारदात में भी शामिल रहा है या नहीं। फिलहाल, पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ रही है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ इस कथित भारत-दुबई रंगदारी नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने आने की उम्मीद है।
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