1. Hindi News
  2. दिल्ली
  3. दिल्ली की बंजर जमीन का कायापलट, यमुना किनारे 'बांसेरा' को देखने आ रहे लोग, यहां की हरियाली मोह लेगी आप का मन-VIDEO

दिल्ली की बंजर जमीन का कायापलट, यमुना किनारे 'बांसेरा' को देखने आ रहे लोग, यहां की हरियाली मोह लेगी आप का मन-VIDEO

दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित एक अनूठा बैंबू थीम पार्क है। यहां हजारों की संख्या में बांस के पेड़ लगाए गए हैं। यहां कई तरह के आयोजन होते हैं। बड़ी संख्या में दिल्ली के लोग यहां पहुंच रहे हैं, जो कभी बंजर जमीन हुआ करती थी।

बांसेरा पार्क- India TV Hindi
Image Source : X/LTGOVDELHI बांसेरा पार्क

देश के कोने-कोने से लोग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में घूमने के लिए आते हैं। यहां के टूरिस्ट प्लेस को एक्सप्लोर करते हैं। ऐसे में दिल्ली के यमुना के किनारे बंजर पड़ी जमीन का कायापलट किया गया है। वीके सक्सेना ने दिल्ली के उपराज्यपाल का पदभार ग्रहण करने के ठीक बाद, राष्ट्रीय राजधानी में एक छोटा सा कदम उठाया। जो कि अब एलजी वीके सक्सेना का ये कदम पर्यावरण के साथ-साथ टूरिस्ट प्लेस को लेकर एक नई विकास गाथा लिख रहा है।

चारो ओर बांस ही बांस के पौधे

दिल्ली के सराय काले खां इलाके में यमुना नदी के किनारे स्थित एक अनूठा बैंबू थीम पार्क है, जिसे दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा विकसित किया गया है। इसका नाम बांसेरा रखा गया है। यह दिल्ली-एनसीआर का पहला ऐसा पार्क है, जहां हजारों  की संख्या में बांस के पौधे लगाए गए हैं। चारो और बांस की ही संरचानएं भी बनाई गई हैं।

पीएम मोदी से प्रेरित होकर LG ने उठाया ये कदम

इसी की जानकारी देते हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2030 तक देश की 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को पुनर्स्थापित करने के विशाल दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, उन्होंने 28 मई, 2022 को उपराज्यपाल का पदभार ग्रहण करने के ठीक बाद, दिल्ली में एक छोटा सा कदम उठाया।

कभी बंजर थी ये जमीन, कूढ़ों का था ढेर

जो कि दिल्ली के सराय काले खां के पास यमुना के किनारे बंजर पड़ी हुई जमीन, जो की कूड़े का ढेर बनी हुई थी। वहां पर बड़ी संख्या में बांसों के पौधे लगाकर बांसेरा की कल्पना की गई। इसके बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), जो दिल्ली में यमुना के बाढ़ के मैदानों का संरक्षक है। डीडीए के प्रयासों की बदौलत 18 महीनों के अंदर ही इस बंजर पड़ी जमीन का कायापलट करके पुनरुद्धार किया गया। जो कि पर्यावरण के परिवर्तन का एक बड़ा उदाहरण है।

30 हजार से लगाए गए बांस के पेड़

उपराज्यपाल ने कहा कि आज इस स्थान में लगभग 30,000 बांस के पेड़ लगाए गए हैं, जो 30 फीट से भी ऊँचे हैं। साथ ही अन्य देशी पेड़ों और हरी घास, फूलों और जलाशयों के मनोरम परिदृश्य के साथ, बांसेरा दिल्ली में एक अनोखे नए मनोरंजन स्थल और एक पारिस्थितिक आश्चर्य के रूप में उभरा है।

अन्य पेड़ों की तुलना में 30% अधिक ऑक्सीजन उत्सर्जन

यह छोटा सा कदम दिल्ली की वनस्पति विविधता को समृद्ध बनाने की दिशा में एक विश्वास की छलांग है। कभी लाखों टन कचरे, निर्माण और विध्वंस के कचरे और भारी अतिक्रमण के नीचे दबी एक बदबूदार ज़मीन, जो कि अब बांसेरा की जगह ले ली है। जहां बांस के पौधे हैं, जो अन्य पेड़ों की तुलना में 30% अधिक ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं और क्षरित मिट्टी को पुनर्जीवित करते हैं।

हरे-भरे लॉन और रेस्टोरेंट, संगीतमय फव्वारा

यहां नए बनाए गए जलाशय, हरे-भरे लॉन और रेस्टोरेंट, संगीतमय फव्वारा, पैदल मार्ग और बच्चों के खेल के मैदान जैसी मनोरंजक सुविधाएं आज बांसेरा में आगंतुकों का स्वागत करती हैं। यहां के पार्क में अब पतंग महोत्सव, योग कार्यक्रम और संगीत संध्या जैसे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

एलजी ने दिल्ली के लोगों से की खास अपील

यह पार्क यमुना किनारे की सुंदरता को बढ़ाता है। एलजी वीके सक्सेना की पर्यावरण और विकास से जुड़ी पहलों का एक अहम हिस्सा है। एलजी ने सभी दिल्लीवासियों से बांसेरा पार्क आने की अपील भी की है। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसका वीडियो भी शेयर किया है।