राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुहावने मौसम का दौर जल्द ही समाप्त हो सकता है। आने वाले दिनों में तापमान में लगातार बढ़ोतरी होने के आसार हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने यह जानकारी दी है। आईएमडी ने मंगलवार को दिल्ली समेत कई राज्यों में बारिश होने का अनुमान जताया है। साथ ही आईएमडी ने कहा कि सोमवार को पिछले 24 घंटों में दिल्ली के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी कम (5.1 डिग्री सेल्सियस या उससे कम), कई स्थानों पर सामान्य से कम (3.1 से 5 डिग्री सेल्सियस कम) और बाकी हिस्सों में सामान्य से कम (1.6 से 3 डिग्री सेल्सियस कम) दर्ज किया गया।
दिल्ली का जल्द बदलने वाला है मौसम
इसी तरह, कुछ स्थानों पर न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी कम (3.1 से 5 डिग्री सेल्सियस कम) रहा, जबकि दिल्ली के बाकी हिस्सों में यह सामान्य दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग के अनुसार यह स्थिति जल्द ही बदलने वाली है, खासकर एक अक्टूबर से, जब दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास रहने की उम्मीद है।
33 से 35 डिग्री सेल्सियस रह सकता है अधिकतम तापमान
आईएमडी ने कहा कि अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश व आसपास के क्षेत्र में बने ऊपरी हवा के चक्रवातीय परिसंचरण के असर से दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में तापमान में गिरावट देखी गई थी। इन दोनों मौसमी प्रणालियों के कारण आमतौर पर बारिश होती है, जिससे मौसम ठंडा हो जाता है।
इन राज्यों में हो सकती है बारिश
आईएमडी के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में बने इन मौसमी तंत्रों के कारण 28 और 29 सितंबर के दौरान दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में गरज-चमक और बिजली की कड़क के साथ बारिश हो सकती है। वहीं, 28 से 30 सितंबर के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश और 28 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान में भी ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है।
दिल्ली से लौट चुका दक्षिण-पश्चिम मानसून
दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर) 23 सितंबर को दिल्ली से लौट चुका है। पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवातीय परिसंचरण का असर खत्म होते ही तापमान बढ़ने की उम्मीद है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बने अल नीनो के प्रभाव के कारण यह स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
जानिए क्या है 'अल नीनो' और 'ला नीना'
अल नीनो दक्षिण दोलन (ENSO) की तीन स्थितियों में से एक है। यह एक जलवायु प्रक्रिया है, जो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान में बदलाव और उसके ऊपर वायुमंडल में होने वाले उतार-चढ़ाव से जुड़ी है। जहां अल नीनो का असर दुनिया भर में गर्मी बढ़ाने वाला माना जाता है, वहीं इसके विपरीत चरण 'ला नीना' से आमतौर पर ठंडक बढ़ती है। ईएनएसओ की एक तटस्थ स्थिति भी होती है।
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