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CBSE के नए चेयरमैन और सचिव के नाम की हुई घोषणा, जानें उनके बारे में

सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लिया और मौजूदा सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव का ट्रांसफर कर नए चेयरमैन और सचिव की घोषणा की।

CBSE- India TV Hindi
Image Source : CBSE/X CBSE से जुड़ी बड़ी खबर

नई दिल्ली: CBSE के नए चेयरमैन और सचिव के नाम की घोषणा हो गई है। सरकार ने मंगलवार को ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) विवाद के बीच वरिष्ठ IAS अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया प्रमुख नियुक्त किया है और 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा अधिकारी वरुण भारद्वाज को सीबीएसई का नया सचिव नियुक्त किया है।

सरकार ने राहुल सिंह और हिमांशु गुप्ता का किया था ट्रांसफर

इससे पहले सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सीबीएसई के सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया था और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद से संबंधित मुद्दों की जांच के लिए समिति का गठन किया था। मंगलवार को जारी कैबिनेट सचिवालय के ज्ञापन के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस राधा चौहान करेंगी।

चौहान को अधिकार दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर वह अन्य विभागों के अधिकारियों से सहायता ले सकती हैं। जबकि क्षमता निर्माण आयोग जांच पैनल को सचिवालयी सहायता प्रदान करेगा। पैनल को एक महीने के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया है।

कौन हैं नवनियुक्त अधिकारी?

सीताराम 2001 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं और वर्तमान में गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव हैं। वहीं, वरुण भारद्वाज वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। वह  2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा अधिकारी हैं।

OSM प्रणाली विवाद क्या है?

CBSE उस समय विवादों में आ गया था, जब कक्षा 12 के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां उनकी लिखावट से मेल नहीं खा रहीं हैं। इससे OSM प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान में गड़बड़ी की आशंका पैदा हो गई।

इसके बाद CBSE बोर्ड परीक्षा प्रक्रिया में OSM प्रणाली के कार्यान्वयन को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की और ये मामला हाईलाइट हो गया और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा होने लगी क्योंकि इससे लाखों बच्चों का भविष्य जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया।

यही कारण है कि बोर्ड को भी तकनीकी खामियों, भुगतान विफलताओं और सत्यापन एवं पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई गई है।

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