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15 अगस्त को लाल किले के सामने प्रदर्शन कर सकते हैं UGC नेट के अभ्यर्थी, आंसर की नहीं जारी होने से हैं परेशान

पिछले साल यूजीसी नेट की परीक्षा 29 जून को हुई थी। इसके 22 दिन बाद 21 जुलाई को परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया गया, लेकिन इस बार अब तक आंसर की नहीं जारी की गई है। इस वजह से परीक्षा देने वाले लोगों को परेशानी हो रही है।

Representative Image- India TV Hindi
Image Source : PTI प्रतीकात्मक तस्वीर

यूजीसी नेट परीक्षा 2026 के अभ्यर्थी 15 अगस्त को लाल किले के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने ऐसा करने की चेतावनी दी है। इन लोगों का कहना है कि अगर 14 अगस्त तक आंसर की नहीं जारी की गई तो 15 अगस्त को शांतिपूर्ण प्रदर्शन होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 10 अगस्त को साफ किया था कि इसी सप्ताह आधिकारिक वेबसाइट पर आंसर की जारी कर दी जाएगी। ऐसे में 15 अगस्त तक आंसर की जारी होने की संभावना है, लेकिन अभ्यर्थियों ने 14 अगस्त को ही आखिरी डेट माना है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि आंसर की जारी करने में देरी होने से उन्हें एडमिशन लेने में परेशानी हो रही है। इससे एकेडमिक सेशन प्रभावित होगा और उनकी रिसर्च पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जब 30 जून को परीक्षा हुई तो अब तक आंसर की क्यों नहीं जारी हुई।

सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी

एक अभ्यर्थी ने एक्स पर अपना गुस्सा जताते हुए लिखा, "यूजीसी नेट के परिणाम संसद के मानसून सत्र के 13 अगस्त को समाप्त होने के बाद ही जारी किए जाएंगे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि विपक्षी दल संसद में इस मुद्दे को न उठाएं या यह खुलासा न करें कि समाजशास्त्र का प्रश्नपत्र लीक हो गया था।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "छात्रों के लिए परीक्षा परिणामों का इंतजार करना थका देने वाला और निराशाजनक है, जबकि ये परिणाम 20 दिनों के भीतर जारी हो जाने चाहिए थे। प्रशासन की इस विफलता का खामियाजा कई छात्रों के करियर को भुगतना पड़ रहा है।"

45 दिन बाद भी नहीं आई आंसर की

इस साल यूजीसी नेट की परीक्षा 30 जून को आयोजित हुई थी, लेकिन अब तक इसकी आंसर की नहीं जारी की गई है। परीक्षा के 45 दिन बाद अभ्यर्थियों को आंसर की का इंतजार है। इसके बाद रिजल्ट जारी होगा और छात्रों को एडमिशन लेना होगा। एक अभ्यर्थी ने कहा कि वह पहले ही प्राइवेट यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए प्रक्रिया शुरू कर चुका है। आशुतोष गोलवलकर नाम के व्यक्ति ने लिखा, "मैंने पीएचडी के लिए निजी विश्वविद्यालयों की तलाश शुरू कर दी है, क्योंकि परिणाम का इंतजार करते हुए समय बर्बाद करने का कोई मतलब नहीं है।" 

पूरे एजुकेशन सिस्टम पर होगा असर

वोक्सन विश्वविद्यालय के प्रतिभा विकास केंद्र और विदेश अध्ययन प्रकोष्ठ के वरिष्ठ प्रबंधक सैयद हसन के अनुसार यूजीसी नेट परिणाम घोषित करने में देरी केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है। इससे पूरा एजुकेशन सिस्टम प्रभावित होगा। इससे पीएचडी एडमिशन, जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) और सहायक प्रोफेसर पदों के इच्छुक छात्र बुरी तरह प्रभावित होंगे। जब छात्र अपने भविष्य के बारे में समय पर निर्णय नहीं ले पाते हैं, तो उनकी शैक्षणिक यात्रा पर स्वाभाविक रूप से गलत प्रभाव पड़ता है।" 

रिसर्च पर होगा असर

सैयद हसन ने कहा, “इसका प्रभाव केवल व्यक्तिगत उम्मीदवारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों तक भी फैलता है। चूंकि यूजीसी नेट पीएचडी प्रवेश के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है, इसलिए परिणामों में देरी से प्रवेश में देरी होती है, शैक्षणिक कार्यक्रम बाधित होते हैं और रिसर्च धीमी हो जाती है। पीएचडी प्रक्रिया में देरी से पाठ्यक्रम, योग्यता परीक्षा, पर्यवेक्षक का आवंटन और अनुसंधान गतिविधियां लेट हो जाती हैं। विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक कार्यक्रम को छोटा करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे रिसर्च प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय में जब भारत अपने रिसर्च सिस्टम को मजबूत करने और वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने का प्रयास कर रहा है, इस तरह की देरी के परिणाम एक परीक्षा चक्र से कहीं अधिक व्यापक हो सकते हैं।”

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