मुंबई: आम लोगों की जिंदगी को बड़े पर्दे पर दिखाने वाले मशहूर फिल्ममेकर बासु चटर्जी आज सुबह इस दुनिया से हमेशा के लिए चले गए। सोते हुए ही वो इस दुनिया को अलविदा कह गए। यूपी के मथुरा शहर में पले-बढ़े बासु चटर्जी को बचपन से ही फिल्में देखने का शौक था। मथुरा में एक ही सिनेमा हॉल था, वहां एक फिल्म तीन दिन के लिए लगती थी, बासु हर फिल्म देखा करते थे। फिल्मों को लेकर उनकी दीवानगी अलग थी। ग्रेजुएशन करके मुंबई आ गए। यहां एक मिलिट्री स्कूल में लाइब्रेरियन की नौकरी मिली थी। यहां आकर भी उनका मोह फिल्मों से नहीं हटा। मुंबई आकर बासु चटर्जी ने वर्ल्ड सिनेमा देखना शुरू किया। इटैलियन, जैपनीज, फ्रेंच तमाम फिल्में देखकर बासु को एहसास हुआ कि फिल्मों का दायरा बहुत बड़ा है, और उनका मन हुआ कि क्यों ना फिल्मों का गहन अध्ययन किया जाए। नतीजा, बासु ने नौकरी छोड़ दी, वैसे भी उन्हें तो सिने पर्दे पर उतारनी थीं बेहतरीन फिल्में।
'तीसरी कसम' से शुरू हुआ था फिल्मी सफर
बासु भट्टाचार्य की मशहूर फिल्म 'तीसरी कसम' से बासु चटर्जी ने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने 'सरस्वतीचंद्र' फिल्म को भी असिस्ट किया, लेकिन इसके बाद बासु को लगा कि जो भी सीखना था वो सीख चुके, अब उन्हें असिस्ट नहीं करना है, बल्कि फिल्म बनानी है। साल 1969 में बासु ने 'सारा आकाश' लोन लेकर बनाई।
Image Source : Instagram/Taran Adarshबासु भट्टाचार्य की मशहूर फिल्म 'तीसरी कसम' से बासु चटर्जी ने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने 'सरस्वतीचंद' फिल्म को भी असिस्ट किया, लेकिन इसके बाद बासु को लगा कि जो भी सीखना था वो सीख चुके, अब उन्हें असिस्ट नहीं करना है, बल्कि फिल्म बनानी है।
'सारा आकाश' को अपनी बेस्ट फिल्म मानते थे बासु
बासु चटर्जी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि 'सारा आकाश' उनकी अब तक की फिल्मों का निचोड़ था। यह उनकी पहली फिल्म थी लेकिन वो इसे अपनी बेस्ट फिल्म मानते थे। यह फिल्म ब्लैकं एंड वाइट थी, इसके बाद उनकी सारी फिल्में कलर में बनीं।
Image Source : Twitter/@jeetmusicबासु चटर्जी
नॉवेल के राइटर राजेंद्र यादव के घर पर ही शूट हुई 'सारा आकाश'
'सारा आकाश' फिल्म राजेंद्र यादव के उपन्यास 'सारा आकाश' पर आधारित फिल्म है। इस फिल्म की शूटिंग आगरा में राजेंद्र यादव के घर में ही शूट की गई। बासु ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उनके पिता रेलवे में थे और उन्हें कभी टिकट के पैसे नहीं देने पड़ते थे, तो वो मुंबई से आगरा अप डाउन करते रहते थे।
बॉक्स ऑफिस को नहीं मानते थे सफलता का पैमाना
बासु मानते थे कि फिल्मों की सफलता को पैसे के हिसाब से नहीं मापा जाना चाहिए। सारा आकाश ने पैसे ज्यादा नहीं कमाए, पैसे ये कमा भी नहीं सकती थी, लेकिन लोग लिखते हैं इसके बारे में ये भी तो सफलता है। बासु ने बताया कि दूसरी फिल्म से पैसे कमाकर उन्होंने सारा आकाश के लिए लिया लोन चुकाया था।
Image Source : TWITTERबासु चटर्जी का निधन
बासु कहते थे कि उनकी फिल्में लार्जर दैन लाइफ नहीं होती हैं, वो साधारण आदमी थे और जो जिंदगी देखी वही पर्दे पर उतारा। बासु का मानना था कि अच्छे कंटेंट की फिल्में भी अच्छा पैसा कमा सकती हैं, उनकी बहुत सारी फिल्में इसका उदाहरण हैं।
नए दौर के पसंदीदा फिल्ममेकर
बासु चटर्जी मानते थे कि नए दौर में फिल्मों का वातावरण अच्छा होता जा रहा है और नए दौर में अच्छी फिल्में बन रही हैं। संजय लीला भंसाली की फिल्में उन्हें पसंद थीं।
बासु चटर्जी की फिल्म लिस्ट
बासू चटर्जी ने सारा आकाश, गुदगुदी, कमला की मौत, चमेली की शादी, एक रुका हुआ फैसला, लाखों की बात, पसंद अपनी अपनी, अपने पराए, जीना यहां, शौकीन, प्रेम विवाह, मंजिल, चक्रव्यूह, बातों बातों में, दो लड़के दोनों कड़के, दिल्लगी, प्रियतमा, तुम्हारे लिये, स्वामी, सफेद झूठ, रजनीगंधा, खट्टा मीठा जैसी तमाम मशहूर फिल्में बनाईं।
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