नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा तेजी से उभर रहा है, अब बॉलीवुड में भी लीक से हटकर फिल्में बनने लगी हैं और भारतीय सिनेमा अब उन अनछुए मुद्दों को उठा रहा है जो पहले हिंदी सिनेमा में अछूते थे। स्त्री हो या पुरुष सब बराबर मेहनत कर रहे हैं, और सभी को समान अवसर मिल रहा है। सिर्फ अभिनय में ही नहीं निर्देशन में भी कई महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने बॉलीवुड में अपनी खास जगह बनाई है। बॉलीवुड में महिला निर्देशकों को स्थापित होने में काफी वक्त लगा, और इनकी संख्या भी बेहद कम है। लेकिन इन महिला निर्देशकों ने ऐसी फिल्में दी हैं कि उन्हें अनदेखा तो कत्तई नहीं किया जा सकता है।
Women's day Special: वक्त के साथ बदलतीं छोटे परदे की बेटियां !
महिला दिवस के मौके पर हम कुछ ऐसी ही महिला निर्देशकों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जिन्होंने फिल्मों में पुरुष मोनोपोली को तोड़ते हुए कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
फातिमा बेगम बॉलीवुड की पहली महिला निर्देशक मानी जाती हैं। 1926 में फातिमा बेगम ने फिल्मों में निर्देशक के तौर पर काम शुरू किया। उसके बाद अरुणा राजे, अपर्णा सेन ने भी फिल्म निर्देशन में काम किया। लेकिन हाल के वर्षों में कई ऐसी महिला निर्देशक हैं जिन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी स्थिति दर्ज करा दी है।
फराह खान:
जब महिला निर्देशकों की बात हो तो सबसे पहला नाम फराह खान का आता है। फराह न केवल अच्छी कोरियोग्राफर हैं, फिल्म निर्देशक के तौर पर उन्होंने ‘मैं हूं ना’ और ओम शांति ओम जैसी फिल्में बनाकर काफी वाहवाही बटोरी हैं।
गौरी शिंदे:
पुणे से मास कॉम में स्नातक करने वाली गौरी शिंदे भी बॉलीवुड की जानी मानी निर्देशक हैं। गौरी शिंदे ने ‘इंग्लिश-विंग्लिश’ और ‘डिअर जिंदगी’ जैसी लीक से हटकर फिल्म बनाकर ये साबित कर दिया कि आज की महिला निर्देशिका किसी से कम नहीं हैं।