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अनाथ को पहले दिखाई ममता, फिर जिस्म के बाजार में धकेला, सालों बाद पड़ी महेश भट्ट की नजर तो चमकी बार डांसर की जिंदगी

'आशिकी 2' की कहानी तो सबने देखी, पर इसके पीछे की कहानी शायद ही किसी ने जानी हो। इस कहानी को रचने वाली महिला की जिंदगी कई हादसों से गुजरी, बचपन में मां-बाप से जुदाई, देह व्यापार और फिर दुबई में बार डांसर बनने के बाद इनकी किस्मत कैसे चमकी, यहां जानें।

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Image Source : @WRITERSAHIBA20/INSTAGRAM शगुफ्ता रफीक।

2013 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'आशिकी 2' ने आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर को रातोंरात स्टार बना दिया। महज 15 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में 109 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था। इसे मोहित सूरी ने डायरेक्ट किया था, वही जिन्होंने 'सैयारा' जैसी फिल्म का भी निर्देशन किया है। बात करें 'आशिकी 2' की तो इस फिल्म को मुकेश भट्ट, भूषण कुमार और कृष्ण कुमार ने प्रोड्यूस किया था, लेकिन इस फिल्म की रूह इसकी कहानी, उस शख्स ने लिखी थी, जिसने खुद जिंदगी को इतने करीब से देखा है कि दर्द, मोहब्बत, टूटन और जिजीविषा उनके हर लफ्ज में सांस लेते हैं। हम बात कर रहे हैं शगुफ्ता रफीक की।

शगुफ्ता छोटी उम्र में ही करने लगीं ये काम

शगुफ्ता का जन्म कहां हुआ, उनकी असली मां कौन थीं, ये सब आज भी एक रहस्य है। उन्हें पाला एक सिंगल मदर ने जो थीं एक्ट्रेस अनवरी बेगम। कुछ लोग कहते हैं कि शगुफ्ता असल में अनवरी की नातिन थीं तो कुछ कहते हैं कि अनवरी ने उन्हें सड़क से उठाकर अपनाया था। सच क्या था, ये शायद खुद शगुफ्ता भी नहीं जानतीं। गरीबी ने उन्हें बचपन से ही झकझोर दिया था। महज 12 साल की उम्र में जब बच्चे स्कूल जाते हैं, शगुफ्ता ने अपनी मां के लिए प्राइवेट पार्टियों में नाचना शुरू कर दिया। वो जगहें वेश्यालय जैसी होती थीं, जहां रसूखदार मर्द अपनी रखैलों के साथ आते थे। 17 की उम्र तक वो नाचती रहीं और फिर शुरू हुआ एक ऐसा दौर जो शायद ही कोई जीना चाहे, जो थी सेक्स वर्क्स की दुनिया।

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पैसों के लिए शगुफ्ता थीं मजबूर                   

शगुफ्ता ने जियो टीवी को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वो 3000 रुपये प्रति रात कमाने लगी थीं। उस पैसे से झींगा-चिकन खरीदा, मां के लिए सोने की चूड़ियां लीं। लेकिन ये सब एक कीमत पर मिला, आत्मा की कीमत पर। मां को सब पता था, लेकिन पेट की भूख और इलाज की मजबूरी हर उस सोच से बड़ी थी। 10 साल तक शगुफ्ता इस दुनिया का हिस्सा रहीं, फिर एक सलाह पर दुबई चली गईं, बार डांसर बनने। वहां गाया, नाचा, मर्दों को एंटरटेन किया। शुरुआत में डरती रहीं, लेकिन फिर एक दिन एक अधेड़ उम्र के शख्स से मुलाकात हुई। उसने पैसों की बारिश कर दी, प्यार भी हुआ, शादी का प्रपोजल भी मिला... मगर किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।

महेश भट्ट ने दिया पहला मौका

1999 में मां को कैंसर हुआ, शगुफ्ता भारत लौट आईं। तीन साल बाद 2002 में एक मोड़ आया, उनकी मुलाकात महेश भट्ट से हुई। उन्होंने कहा, 'मैं लिखना चाहती हूं, क्योंकि मैं वो सब महसूस कर चुकी हूं जो कई ज़िंदगियों का सच है।' साल 2006 में उन्हें पहला मौका मिला, मोहित सूरी की फिल्म में 'कलयुग' के कुछ सीन्स लिखे। इसके बाद 'वो लम्हें', 'राज 2', 'मर्डर 2' और फिर 'आशिकी 2' जैसी हिट फिल्मों से उन्होंने दिखा दिया कि दर्द अगर कलम में ढल जाए, तो वो इतिहास बन जाता है।

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