फुटबॉलर बनने UK गए थे अर्चना पूरन सिंह के बेटे आर्यमान, झेलनी पड़ी बुलिंग, चोटों के चलते टूटा सपना
अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी के बेटे आर्यमान सेठी 14 साल की उम्र में फुटबॉल ट्रेनिंग लेने के लिए इंग्लैंड गए थे, लेकिन एक चोट लगने की वजह से उनका फुटबॉलर बनने का सपना टूट गया।

अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी के बेटे आर्यमान सेठी, जो एक यूट्यूबर के तौर पर जाने जाते हैं। वे कभी एक प्रोफेशनल फुटबॉलर बनना चाहते थे। 14 साल की उम्र में वे फुटबॉल अकादमी में ट्रेनिंग लेने के लिए इंग्लैंड चले गए, जहां उन्हें युवा रहीम स्टर्लिंग के खिलाफ खेलने का मौका मिला। हालांकि, पैर में दो बार गंभीर फ्रैक्चर होने और लंबे समय तक चले मुश्किल रिकवरी प्रोसेस के कारण उनके खेल से जुड़े सपने आखिरकार खत्म हो गए। आर्यमान ने अपने सफर के बारे में बात करते हुए बताया कि कैसे इंग्लैंड में ट्रायल के दौरान वे अच्छा खेल कर रहे थे, लेकिन फिर कई चोट लगाने के बाद सब कुछ बदल गया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें आर्सेनल और चेल्सी जैसे क्लबों में ट्रायल देने का मौका मिल सकता था। हालांकि, उन्हें कोई दूसरा रास्ता खोजने की सलाह दी गई, जहां उन्हें अपनी काबिलियत दिखाने का बेहतर मौका मिल सके।
अर्चना के बेटे ने इंग्लैंड में ली फुटबॉल ट्रेनिंग
आखिरकार, आर्यमान अपनी मां अर्चना के साथ इंग्लैंड गए। वहां ट्रेनिंग के पहले ही दिन उन्हें एहसास हुआ कि वहां फुटबॉल का लेवल उनके अब तक के अनुभव से काफी अलग था। 'ऑल फॉर एथलीट्स' पॉडकास्ट के एक इंटरव्यू में उन्होंने याद करते हुए कहा, 'मुझे लगा अरे, यह तो बिल्कुल अलग लेवल है! पास की स्पीड और फुर्ती... मैंने सोचा अच्छा, इसके आदी होने में थोड़ा समय लगेगा।' एक ट्रेनिंग ड्रिल के दौरान आर्यमान का सामना एक ऐसे यंग फुटबॉलर से हुआ, जिसे उन्हें लगा था कि वे आसानी से पीछे छोड़ सकते हैं। उन्हें जल्द ही पता चला कि वह खिलाड़ी रहीम स्टर्लिंग था, जो आगे चलकर लिवरपूल, मैनचेस्टर सिटी और चेल्सी जैसे क्लबों के लिए खेला। इस मुलाकात के बाद उन्हें समझ आया कि स्टर्लिंग में गजब का टैलेंट है। अकादमी के दूसरे होनहार खिलाड़ियों के बीच भी वह सबसे अलग नजर आते थे। उन्होंने कहा, 'ऐसा टैलेंट पीढ़ी में एक बार ही देखने को मिलता है।' आर्यमन का ट्रायल इतना अच्छा रहा कि उन्हें अकादमी में जगह मिल गई, बशर्ते वह इंग्लैंड में अपनी पढ़ाई जारी रखें। उनके परिवार ने इस मौके का समर्थन किया और इसके बाद वह एक बोर्डिंग स्कूल चले गए, ताकि अपनी पढ़ाई और फुटबॉल ट्रेनिंग के बीच तालमेल बिठा सकें।
आर्यमान सेठी विदेश में पढ़ाई करने को क्यों हुए मजबूर
14 साल की उम्र में घर छोड़ना आर्यमन के लिए आसान नहीं था। अपने परिवार और जानी-पहचानी जगहों से दूर बोर्डिंग स्कूल में उन्हें अकेलेपन का सामना करना पड़ा। उन्हें साथी छात्रों की बदमाशी और अजीब टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा। इनमें से कुछ छात्रों ने भारत को लेकर रूढ़िवादी बातें कहीं, जैसे कि क्या वे हाथी या गधे पर सफर करते हैं। उन्होंने याद करते हुए बताया, 'वहां के लोग पूछते थे- क्या तुम कोई राजकुमार हो? क्या तुम भारत से आए कोई राजकुमार हो?' उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को लगा कि वह किसी राजघराने से हैं, क्योंकि उनका परिवार आर्थिक रूप से काफी संपन्न था। मुश्किल माहौल के बावजूद आर्यमन धीरे-धीरे ट्रेनिंग रूटीन के हिसाब से ढल गए। तीन हफ्तों के भीतर ही उन्हें लगा कि एक खिलाड़ी के तौर पर उनमें सुधार हो रहा है और वह अपनी छाप छोड़ने लगे हैं।
चोट के चलते आर्यमान सेठी का खेलना हुआ मुश्किल
हालांकि, जब सब कुछ सही होता दिख रहा था तभी उन्हें एक बड़ा झटका लगा। स्कूल में रग्बी खेलते समय उनका पैर टूट गया और पिंडली की हड्डी फ्रैक्चर हो गई। इसके बाद वह ठीक होने के लिए भारत लौट आए। पूरी तरह ठीक होने के बाद आर्यमान को महाराष्ट्र की ओर से खेलने की अनुमति मिल गई, लेकिन वापसी के पहले ही मैच में उन्हें एक और बड़ा झटका लगा। उनके उसी पैर में दोबारा फ्रैक्चर हो गया और इस बार हड्डी तीन टुकड़ों में टूट गई। उन्होंने याद करते हुए बताया, 'मैं उठा, लेकिन मेरा पैर बिल्कुल बेजान हो गया और मैं जमीन पर गिर पड़ा।' इस दूसरी चोट ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वे कभी उस लेवल तक वापस पहुंच पाएंगे, जहां तक पहुंचने का उन्होंने सपना देखा था। उन्होंने उस समय को याद करते हुए कहा, 'मुझे लगा कि अब सब खत्म हो गया है। मुझे नहीं लगता कि लगातार दो फ्रैक्चर के बाद मैं वापसी कर पाऊंगा। यह वह समय होता है, जब हर कोई विकसित होता है, जब शरीर में तेजी से सुधार हो रहा होता है। अगर आप उस समय पीछे की ओर जा रहे हैं तो वह समय आपको वापस नहीं मिल सकता।'
अर्चना के बेटे आर्यमान का टूटा फुटबॉलर बनने का सपना
दूसरा फ्रैक्चर जनवरी 2011 में हुआ था। आर्यमान की सर्जरी हुई और रिहैबिलिटेशन शुरू करने से पहले उन्हें काफी समय तक बैसाखियों के सहारे रहना पड़ा। बॉलीवुड एक्ट्रेस अर्चना पूरन के बड़े बेटे ने इतनी चुनौतियों के बावजूद फुटबॉल में एक और मौका आजमाने की कोशिश और आखिरकार ट्रेनिंग फिर से शुरू करने के लिए इंग्लैंड लौट गए। हालांकि, उनकी रिकवरी वैसी नहीं हुई जैसी सोची गई थी। वे बीमार पड़ गए, उन्हें लगातार दर्द होता रहा और रिहैबिलिटेशन के दौरान उन्हें एक और चोट लग गई। बार-बार मिली इन चोट का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगा, जिससे उनके लिए मैदान पर खेलना और भी मुश्किल हो गया। उन्होंने याद करते हुए बताया, 'मुझे याद है कि मैं कई बार मैदान पर ही रो पड़ा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा शरीर मेरी बात ही नहीं सुन रहा है। मुझे पता था कि क्या करना है और कैसे करना है, लेकिन मानसिक रूप से मैं इतना टूट चुका था कि मैं गेंद को किक मारने के बारे में सोच भी नहीं सकता था।' अपने सपनों को हाथ से फिसलते देखना उनके लिए बहुत मुश्किल होता जा रहा था। आखिरकार, उनका कॉन्ट्रैक्ट आगे नहीं बढ़ाया गया और उन्हें इस सच्चाई का सामना करना पड़ा कि उनका प्रोफेशनल फुटबॉल करियर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा, 'मुझ पर इस बात का बहुत दबाव था कि मेरा सपना मुझसे दूर जा रहा है और तभी फुटबॉल का सफर खत्म हो गया।'
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