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अंडरवर्ल्ड के निशाने पर था डायरेक्टर, मिलने लगी जान से मारने की धमकी, लेनी पड़ी CID ट्रेनिंग, फिर रातोंरात...

90 के दशक में बॉलीवुड पर अंडरवर्ल्ड का कितना दखल था, ये बात किसी से छिपी नहीं है। अब बॉबी देओल, काजोल और मनीषा कोइराला स्टारर 'गुप्त' के डायरेक्टर राजीव राय ने भी कुछ ऐसा ही खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें गुप्त की सफलता के बाद अंडरवर्ल्ड से धमकियां मिलने लगी थीं।

Rajiv Rai- India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM/RAJIV_RAI_ डायरेक्टर राजीव राय।

एक समय था जब बॉलीवुड पर अंडरवर्ल्ड का कब्जा हुआ करता था। यहां तक कि फिल्मों पर अंडरवर्ल्ड का ही पैसा लगता था और फिल्म में किसे कास्ट किया जाएगा, ये भी अंडरवर्ल्ड ही तय करता था। कुछ दिनों पहले 'आशिकी' फेम अनु अग्रवाल ने इसे लेकर बात की थी और अब बॉबी देओल, काजोल और मनीषा कोईराला स्टारर 'गुप्त' के डायरेक्टर राजीव राय ने भी ऐसा ही खुलासा किया है, जिन्होंने अक्षय कुमार और रवीना टंडन स्टारर 'मोहरा' का भी निर्देशन किया था। गुप्त की सफलता के बाद ही राजीव राय अंडरवर्ल्ड की नजरों में आ गए थे। अब उन्होंने उस दौर को लेकर खुलकर बात की और बताया कि कैसे अंडरवर्ल्ड से उन्हें धमकियां मिलने लगी थीं।

जब अंडरवर्ल्ड के निशाने पर आए राजीव राय

सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में डायरेक्टर राजीव राय ने खुलासा किया कि उन्हें अंडरवर्ल्ड से जान से मारने की धमकी मिलने लगी थी। इस दौरान उनके ऑफिस पर भी हमला हुआ था। उन्होंने 90 के दशक में अपने डरावने अनुभव के बारे में बात की और बताया कि उन्होंने जब इसकी शिकायत की तो उन्हें अंडरवर्ल्ड के कॉल लेने से मना कर दिया गया और सुरक्षा के लिए सीआईडी ट्रेनिंग भी दी गई।

गुप्त के बाद शुरू हुई समस्या

डायरेक्टर ने कहा- 'प्रॉब्लम 'गुप्त' के बाद शुरू हुई। गुप्त के बाद मैंने दो फिल्में कीं, जो उम्मीद के मुताबिक नहीं रहीं, मेरे लिये ये बहुत परेशान करने वाला था। फिर अगले दिन मेरे लैंडलाइन पर एक कॉल आया और किसी ने मुझसे पैसों की डिमांड की। मैंने कुछ नहीं कहा। मैंने तुरंत पुलिस को फोन किया और इस बारे में बताया। पुलिस ने मुझे बात न करने की समझाइश दी। मेरे ऑफिस में रिकॉर्डर थे और मैंने सब रिकॉर्ड करके पुलिस को भेज दिया। मैंने चार-पांच सेकेंड बात की और समझ गया कि कुछ गड़बड़ है तो ऐसे दिखावा किया कि मैं कोई और हूं।'

जब ऑफिस पर हुआ हमला

अपनी आपबीती सुनाते हुए राजीव राय आगे कहते हैं- 'पुलिस ने मुझे अपनी सुरक्षा के लिए सीआईडी से ट्रेनिंग लेने को कहा। 1997 में मेरे ऊपर अटैक हुआ, मेरे ऑफिस में ये सब हुआ था। वो बंदूक और गोलियों के साथ आए, लेकिन मेरे बॉडीगार्ड्स वहीं थे। बॉडीगार्ड आगे की ओर भागे तो वो डर गए। ये अजीब था। फिर इन सारी घटनाओं के बाद मैंने रातोंरात देश छोड़ दिया और यूके शिफ्ट हो गया। मेरे ऊपर प्रेशर था। मेरे पिता की तबीयत ठीक नहीं थी, मुझे उनका ख्याल रखना था। उन्हें कुछ हो, मैं ये बर्दाश्त नहीं कर सकता था। मुझे लगा कि अगर मुझे कुछ हो गया तो उनका ख्याल कौन रखेगा।'

बेटे का भी आया ख्याल

राजीव राय ने आगे कहा- 'मेरा बेटा ऑटिस्टिक है, मुझे उसे पढ़ाना था, उसका ख्याल रखना था और लगातार धमकियां मिल रही थीं। मेरे पास देश छोड़ने के बहुत कारण थे। मैंने सोचा अब मुझे फैसला कर लेना चाहिए। भगवान ने जो थोड़ा बहुत पैसा दिया है, वह काफी है। मैंने जब 20 साल तक काम नहीं किया तो अपनी पुरानी फिल्मों से पैसा कमाया। जब मेरे ऑफिस में हमला हुआ तो मैंने ट्रेनिंग ली। वो सिखाते थे कि गाड़ी कैसे बदलनी है, कंधे पर नजर रखना और भी बहुत कुछ। मेरे पास रेड लाइट पार करने की भी अनुमति थी, क्योंकि जब आपकी गाड़ी रुकती है, वो आपको गोली मार सकते हैं।'

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