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आप भी मूवी और फिल्म को एक ही समझते हैं? दोनों के बीच है बड़ा और दिलचस्प अंतर, जानने के बाद बदलेगा नजरिया

फिल्म और मूवी में फर्क होता है, क्या आप इस बात से वाकिफ हैं? दोनों में दिलचस्प और गहरा अंतर है, जिसे जानने के बाद आपका नजरिया बदल जाएगा।

movie vs film- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV मूवी और फिल्म में अंतर।

भारतीय जनमानस के लिए सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक गहरा जुनून है। हर शुक्रवार सिनेमाघरों के बाहर लगने वाली लंबी कतारें और वीकेंड पर टिकट खिड़की पर होने वाली भीड़ इस बात की गवाह है। डिजिटल क्रांति के इस दौर में अब मनोरंजन का यह जरिया थियेटर से निकलकर नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो और जीयो हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच चुका है। बदलते वक्त के साथ दर्शकों को अब एक ही जगह पर अनोखी कहानियों से लेकर पुरानी क्लासिक फिल्मों तक का सारा मसाला आसानी से मिल जाता है। डिजिटल दुनिया में सिनेमा को लेकर चर्चाएं और रिव्यूज की बाढ़ आना अब बेहद आम हो चुका है। लेकिन इस पूरे शोर-शराबे के बीच क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि हम अपनी आम बोलचाल में कभी 'मूवी' तो कभी 'फिल्म' शब्द का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे कर देते हैं? असल में इन दोनों शब्दों के फर्क है और इनका अर्थ एक-दूसरे से पूरी तरह अलग है।

क्या होती है मूवी? 

सरल और सीधे शब्दों में समझा जाए तो मूवी का मुख्य और एकमात्र उद्देश्य दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करना होता है। मूवी शब्द असल में मूविंग पिक्चर यानी चलचित्र का एक छोटा और आधुनिक रूप है। यह व्यावसायिक सिनेमा का हिस्सा होती है, जिसे मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर दर्शकों को आकर्षित करने के लिए बनाया जाता है। आमतौर पर दो से तीन घंटे की इस दुनिया में दर्शकों को हंसी-मजाक, तगड़ा एक्शन, हाई-वोल्टेज ड्रामा और शानदार रोमांस का एक पूरा पैकेज परोसा जाता है। इसमें बड़े सुपरस्टार्स, महंगे सेट्स, झूमने पर मजबूर कर देने वाले गाने और दमदार डायलॉग्स होते हैं। 'मूवी' का सबसे बड़ा लक्ष्य बॉक्स ऑफिस पर भारी कमाई करना और दर्शकों को कुछ देर के लिए हंसाना या रोमांचित करना होता है। इसे देखते समय दर्शक को ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं होती, बल्कि यह शुद्ध रूप से पॉपकॉर्न एंटरटेनमेंट का अनुभव देती है।

Image Source : India TVक्या है मूवी और फिल्म में फर्क।

क्या होती है फिल्म?

दूसरी ओर जब हम फिल्म शब्द की बात करते हैं तो इसका दायरा मनोरंजन से कहीं आगे बढ़कर कला और विजुअल लिटरेचर तक फैल जाता है। फिल्म शब्द का ऐतिहासिक संबंध उस फोटोग्राफिक सेल्युलाइड फिल्म रोल से है, जिस पर पुराने जमाने में सिनेमा को रिकॉर्ड किया जाता था। सिनेमाई परिभाषा में फिल्में सिर्फ देखने के लिए नहीं, बल्कि गहराई से महसूस करने के लिए बनाई जाती हैं। इनका उद्देश्य दर्शकों को केवल गुदगुदाना नहीं, बल्कि उन्हें किसी सामाजिक मुद्दे, मानवीय संवेदना या जीवन की कड़वी सच्चाई पर सोचने के लिए मजबूर करना होता है। फिल्मों में व्यावसायिक तड़के की जगह निर्देशक की व्यक्तिगत सोच, बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी, बारीक साउंड डिजाइन और कलाकारों के रीयलिस्टिक अभिनय को प्राथमिकता दी जाती है। यहां गानों और बेवजह के एक्शन के बजाय कहानी की रूह और किरदारों की जटिलताओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यही कारण है कि इस श्रेणी की कलाकृतियां अक्सर दुनिया भर के प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल्स और नेशनल-इंटरनेशनल अवॉर्ड्स में देश का प्रतिनिधित्व करती हैं और आलोचकों द्वारा सराही जाती हैं।

दोनों को अलग नजरिए से देखना है जरूरी

संक्षेप में कहा जाए तो मूवी जहां एक कमर्शियल प्रोडक्ट है, वहीं फिल्म कला का एक आर्ट फॉर्म है। मूवी आपको कुछ समय के लिए अपनी वास्तविक दुनिया और चिंताओं को भुलाकर एक काल्पनिक और रंगीन दुनिया की सैर कराती है। इसके विपरीत, एक बेहतरीन फिल्म आपको आपकी अपनी ही असल जिंदगी और समाज के उन पहलुओं से रूबरू कराती है, जिन्हें शायद आप अनदेखा कर रहे थे। इसलिए अगली बार जब आप थियेटर या किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कुछ देखने बैठें तो यह जरूर तय कर लें कि आप सिर्फ मनोरंजन के लिए मूवी देखना चाहते हैं या फिर सिनेमा की कला को महसूस करने के लिए कोई फिल्म।

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