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क्या है 1962 में इतिहास रचने वाली चार्ली कंपनी के '120 बहादुर' की कहानी? रिलीज से पहले जानें पूरी दास्तां

फरहान अख्तर स्टारर 120 बहादुर रिलीज के लिए तैयार है, जो असल कहानी पर आधारित है। 1962 में रेजांग ला में इतिहास रचने वाली चार्ली कंपनी की पूरी कहानी दिखाने का प्रयास इस फिल्म में किया गया है।

Farhan Akhtar 120 Bahadur- India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM फरहान अख्तर।

बहुत पहले की बात है, जब लद्दाख की वीरान, बर्फ से ढकी पहाड़ियों में एक नाम गूंजा करता था, रेजांग ला। ये कोई आम दर्रा नहीं था, बल्कि वीरता की वह मिसाल थी जो आज भी हर फौजी के दिल में आग भर देती है। 18000 फीट की ऊंचाई, सांस लेने में दिक्कत, ठंडी हवा की चुभती मार और हर कोने में छिपा मौत का साया, लेकिन इसी दुर्गम मोर्चे पर 13 कुमाऊं बटालियन की चार्ली कंपनी ने वो कर दिखाया जो इतिहास में अमर हो गया। 18 नवंबर की उस काली रात को जब चीन की फौज चुपचाप रेजांग ला की ओर बढ़ रही थीं, तब वहां मात्र 120 भारतीय सैनिक तैनात थे, बिना बंकर, बिना भारी हथियारों और बिना पीछे हटने की सोच के साथ ये लोग डटे हुए थे।

जब वीरता ने गोलियों को मात दी

इनकी अगुवाई कर रहे थे मेजर शैतान सिंह भाटी (PVC), एक ऐसा नाम, जो अपने आप में फौलाद है। मेजर शैतान सिंह की मौजूदगी ही जवानों का हौसला थी। उनके शांत लेकिन दृढ़ नेतृत्व में चार्ली कंपनी ने वो किया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। रात भर चली भीषण लड़ाई में चार्ली कंपनी ने चीन के कई हमलों को नाकाम कर दिया। हर जवान आखिरी सांस तक लड़ा, आखिरी गोली तक लड़ा। अगर चीन इस दर्रे पर कब्जा कर लेता तो चुषूल एयरफील्ड उसकी गिरफ्त में होता, जो रणनीतिक रूप से बेहद अहम था। पर ऐसा नहीं हुआ, बल्कि 120 बहादुरों ने लड़ते-लड़ते इतिहास बदल दिया।

अब ये कहानी आ रही है पर्दे पर

इस वीरता की गाथा को अब फिल्माया गया है एक दमदार फिल्म में, जो है '120 बहादुर'। इस फिल्म में फरहान अख्तर, मेजर शैतान सिंह की भूमिका निभा रहे हैं। निर्देशन किया है रजनीश 'राजी' घई ने किया है और फिल्म को रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर (एक्सेल एंटरटेनमेंट) और अमित चंद्रा (ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज) ने प्रोड्यूस किया है। ‘120 बहादुर’ सिर्फ एक वॉर फिल्म नहीं है। ये उन वीरों की आवाज है जो बर्फीले तूफानों में भी सीना तान कर खड़े रहे। ये उस बलिदान की कहानी है जिसे न कोई मौसम रोक पाया, न कोई बंदूक। ये उन जांबाजों को सलाम है जिन्होंने 'हम लड़ेगें', 'हम रुकेंगे नहीं' को सच कर दिखाया।

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