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'हनुमान अंश' के ग्रैमी जीतने वाले विदेशी सिंगर जेफरी कैसे बने कृष्णदास? नीम करोली बाबा ने बदली जिंदगी, अनुष्का-विराट भी हैं फैन

अमेरिकी गायक जेफरी कैगेल की नीम करोली बाबा से मुलाकात ने उन्हें कृष्णदास बना दिया। भक्ति संगीत को वैश्विक पहचान देने वाले कृष्णदास के भजन अब ‘हनुमान अंश’ में गूंज रहे हैं।

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Image Source : KRISHNADASMUSIC, VIRALBHAYANI/INSTAGRAM कृष्णदास, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा।

कभी न्यूयॉर्क में जन्मा एक अमेरिकी युवक अध्यात्म की तलाश में भारत आया था। उसे शायद खुद भी अंदाजा नहीं था कि यह यात्रा उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान बन जाएगी। यह कहानी है जेफरी कैगेल की, जिन्हें आज दुनिया कृष्णदास के नाम से जानती है। 31 मई 1947 को न्यूयॉर्क में जन्मे जेफरी साल 1970 में भारत पहुंचे थे। उनका मकसद कोई करियर बनाना या शोहरत हासिल करना नहीं, बल्कि खुद को और जीवन के गहरे अर्थ को तलाशना था। इसी खोज के दौरान उनकी मुलाकात नीम करोली बाबा से हुई और यही मुलाकात उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुई।

नीम करोली बाबा से मुलाकात ने बदली दिशा

भारत आने के बाद जेफरी कैगेल का आध्यात्मिक झुकाव लगातार बढ़ता गया। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम और नीम करोली बाबा के आश्रम से उनका गहरा जुड़ाव बना। बताया जाता है कि उन्होंने करीब 2 साल 6 महीने आश्रम में बिताए। इसी दौरान बाबा की शिक्षाओं और सान्निध्य ने उनके भीतर ऐसी छाप छोड़ी, जिसने उनके जीवन का रास्ता ही बदल दिया। बाबा ने उन्हें ‘कृष्णदास’ नाम दिया और इसके बाद जेफरी कैगेल की पहचान धीरे-धीरे पीछे छूटती चली गई।

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संगीत बना भक्ति का रास्ता

कृष्णदास ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और कीर्तन को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। उन्होंने पश्चिमी दुनिया से आने के बावजूद भारतीय मंत्रों, भजनों और कीर्तन को अपनी आवाज और संगीत के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। रणवीर अल्लाहबादिया के इंटरव्यू में कृष्णदास ने ये सब खुद बयां किया, उन्होंने बताया कि जब वो भारत से अमेरिका की फ्लाइट लेकर वापसी करने वाले थे तो उन्होंने बाबा से सवाल किया कि क्या वो अमेरिका में कैसे नीम करोली बाबा के लिए कुछ कर सकते हैं, इसके जवाब में बाबा ने कहा कि सेवा पूछ के नहीं की जाती। जाते-जाते उन्होंने कहा कि वो अमेरिका कृष्णदास की आवाज बनेंगे। हारमोनियम की धुन और मंत्रोच्चार के साथ उनकी प्रस्तुति सुनने वालों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव देती है। उनके लिए संगीत केवल मनोरंजन नहीं रहा, बल्कि साधना और लोगों को भीतर की शांति से जोड़ने का माध्यम बन गया।

अब ‘हनुमान अंश’ में सुनाई देगी उनकी आवाज

कृष्णदास की आध्यात्मिक यात्रा और नीम करोली बाबा से उनके जुड़ाव को लेकर अब एक नया अध्याय सामने आया है। नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ में कृष्णदास के दो भजन शामिल किए गए हैं। उन्होंने फिल्म के लिए ‘सीता राम’ और ‘ओम नमः शिवाय’ भजन दिए हैं। खास बात यह है कि दोनों रचनाएं उनकी अपनी आवाज में फिल्म में सुनने को मिलेंगी। इस तरह दशकों से भक्ति संगीत को दुनिया तक पहुंचाने वाले कृष्णदास की आवाज अब बड़े पर्दे पर भी आध्यात्मिक माहौल का हिस्सा बन गई है। ये फिल्म 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और फिल्म की कमाई 130 करोड़ के पार पहंच गई है, जबकि इसका बजट सिर्फ 2 करोड़ ही था।

दुनिया भर में सुने जाते हैं कृष्णदास के भजन

कृष्णदास ने वर्षों की साधना के बाद कीर्तन और भक्ति संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई। 1996 से अब तक वह कई एल्बम जारी कर चुके हैं। उनका एल्बम ‘लाइव आनंदा’ वर्ष 2012 में ग्रैमी अवॉर्ड्स के लिए नामांकित भी हुआ था। उनकी आवाज में गाई गई हनुमान चालीसा को दुनिया भर में सुना जाता है। न्यूयॉर्क के एक चर्च में उनके द्वारा प्रस्तुत हनुमान चालीसा का पाठ भी काफी लोकप्रिय रहा है। आज डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उनके भजनों को लाखों लोग सुनते हैं।

भक्ति संगीत के जरिए शांति का संदेश

कृष्णदास ने अपने कीर्तन और संगीत से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक फाउंडेशन की स्थापना भी की। इसका उद्देश्य नीम करोली बाबा की शिक्षाओं और भक्ति संगीत के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। कृष्णदास का मानना रहा है कि संगीत इंसान को उसके भीतर की शांति और आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ सकता है। शायद यही वजह है कि उनकी प्रस्तुतियों में धर्म और संस्कृति की सीमाओं से आगे बढ़कर एक सार्वभौमिक भाव दिखाई देता है।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा भी हैं मुरीद

कृष्णदास के संगीत ने भारतीय फिल्म और खेल जगत की कई हस्तियों को भी प्रभावित किया है। क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा उनके भजनों के फैंस में शामिल हैं। दोनों कई मौकों पर आध्यात्मिक संगीत और कीर्तन के प्रति अपनी रुचि जाहिर कर चुके हैं। कृष्णदास के संगीत को लेकर यह जोड़ी भी सकारात्मक भाव साझा करती रही है और उनके कॉन्सर्ट में शामिल होने की खबरें सामने आती रही हैं।

भारत उनके लिए सिर्फ देश नहीं, घर जैसा है

कृष्णदास एक बार फिर भारत आए हैं और ऋषिकेश, दिल्ली, मुंबई तथा बेंगलुरु में अपने संगीत कार्यक्रम कर रहे हैं। ऋषिकेश और दिल्ली में उनके कार्यक्रम हो चुके हैं। भारत आने के दौरान वह कैंची धाम भी पहुंचे, जहां से उनके आध्यात्मिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यादें जुड़ी हैं। एक इंटरव्यू में वह भारत आने को अपने घर लौटने जैसा बता चुके हैं। जिस देश में कभी एक अमेरिकी युवक अध्यात्म की तलाश में आया था, उसी भारत ने उसे दुनिया के सामने कृष्णदास के रूप में पहचान दी।

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