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मशहूर साउथ निर्देशक का निधन, इस गंभीर बीमारी ने ली जान, इंडस्ट्री में पसरा मातम

मशहूर फिल्म निर्माता शाजी एन करुण का गंभीर बीमारी के चलते 73 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें मलयालम सिनेमा में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने मोहनलाल की कान्स फेस्टिवल फिल्म 'वानप्रस्थम' का निर्देशक किया था।

Shaji N Karun Death- India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM मशहूर साउथ निर्देशक का निधन

मशहूर मलयालम फिल्म निर्माता और निर्देशक शाजी एन करुण का निधन हो गया है। 28, अप्रैल 2025 सोमवार को वह तिरुवनंतपुरम के वझुथाकौड में उनके आवास पर मृत पाए गए। वह 73 वर्ष के थे। लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे शाजी एन करुण को तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और दो दिन पहले उन्हें वझुथाकौड स्थित उनके घर लाया गया था। शाजी एन करुण को हाल ही में राज्य फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह में जे सी डैनियल पुरस्कार 2023 से सम्मानित किया गया था। निर्देशक शाजी एन के मौत की खबर सामने आते ही साउथ फिल्म इंडस्ट्री में मातम छा गया है। इस खबर ने पूरी इंडस्ट्री के साथ-साथ उनके प्रशंसकों को भी सदमे में डाल दिया है। हर कोई सोशल मीडिया के जरिए उन्हें याद कर रहा है और भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है।

शाजी एन करुण के मौत की वजह

1 जनवरी, 1952 को केरल के कोल्लम में जन्मे शाजी एन करुण का निधन कैंसर की वजह से हुआ। भारत के सबसे सम्मानित फिल्म मेकर में से एक शाजी इंडस्ट्री में अपने काम के लिए जाने जाते थे। वह अपनी पहली फीचर फिल्म 'पिरवी' (1988) से ही लोगों के बीच छा गए थे, जिसने 1989 के कान फिल्म फेस्टिवल में कैमरा डी'ओर - मेंशन डी'ऑनर जीता। उनके निर्देशन में बनी 'पिरवी', 'स्वाहम' (1994) और 'वानप्रस्थम' (1999) जैसी फिल्में आज भी दर्शक देखना पसंद करते हैं। उनका अंतिम संस्कार थाइकौड के संतिकावदोम में किया जाएगा। उनके परिवार में उनकी पत्नी अनसूया देवकी वारियर और बेटे अप्पू और अनिल हैं।

इन पुरस्कारों से नवाजे गए थे

मलयालम फिल्म निर्माता और निर्देशक शाजी एन करुण को सरकार ने कई पुरस्कारों से सम्मानित किया है, जिनमें 'पिरवी' के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म (पिरवी, वानप्रस्थम, कुट्टी स्रन्क) के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार और कई केरल राज्य फिल्म पुरस्कार शामिल हैं। फिल्म निर्माण से परे, करुण ने केरल की फिल्म संस्कृति को आकार देने में एक परिवर्तनकारी की भूमिका निभाई। वह केरल राज्य चलचित्र अकादमी के संस्थापक अध्यक्ष थे जो फिल्म और टेलीविजन के लिए भारत की पहली अकादमी थी और 1998 से 2001 तक केरल के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFK) के कार्यकारी अध्यक्ष थे।

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