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बिहार का लाल सिनेमा में हासिल किया स्टारडम, NSD से मिला था रिजेक्शन, लेकिन मेहनत की दम पर पलट दी कायनात

मनोज बाजपेयी को नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से रिजेक्शन मिला था। इस रिजेक्शन के बाद भी उन्होंने अपने सपनों का पीछा नहीं छोड़ा और अपनी दम पर स्टार बने।

Manoj Bajpayee- India TV Hindi
Image Source : IMAGE SOURCE-INSTAGRAM@MANOJBAJPAYEE मनोज बाजपेयी

बॉलीवुड में ऐसे कई दिग्गज कलाकार आए जिन्होंने अपनी दम पर यहां पहचान बनाई और स्टारडम हासिल किया। बिहार के लाल मनोज बाजपेयी भी ऐसे ही कलाकारों में से एक हैं। खास बात ये है कि आज बॉलीवुड में इतने बड़े स्टार बन चुके मनोज बाजपेयी को कभी नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से भी रिजेक्ट कर दिया गया था। लेकिन मनोज ने अपने सपनों का पीछा नहीं छोड़ा और अपनी मेहनत से कायनात पलट दी। आज मनोज बाजपेयी बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर्स में गिने जाते हैं। आइये जानते हैं मनोज बाजपेयी के करियर की कहानी। 

खुद बताया था रिजेक्शन का किस्सा

मनोज बाजपेयी ने बीते दिनों एक इंटरव्यू में इसका खालासा किया था। मनोज बाजपेयी ने 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' के लिए एक पोस्ट में ऑडिशन में रिजेक्ट होने से लेकर बॉलीवुड के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक बनने तक के अपने संघर्ष की कहानी साझा की। मनोज बाजपेयी ने अपनी कहानी की शुरुआत खुद को किसान का बेटा बताते हुए की। उन्होंने बताया कि 17 साल की उम्र में उन्होंने बिहार के अपने गांव से दिल्ली का सफर तय किया और थिएटर में व्यस्त रहे, 'मैं एक किसान का बेटा हूं, मैं बिहार के एक गांव में पांच भाई-बहनों के साथ पला-बढ़ा। हम झोपड़ीनुमा स्कूल में पढ़ते थे। हमारा जीवन सादा था, लेकिन जब भी हम शहर जाते, थिएटर जरूर जाते थे। मैं बच्चन का प्रशंसक था और उन्हीं की तरह बनना चाहता था। 9 साल की उम्र में ही मुझे पता चल गया था कि अभिनय ही मेरा भाग्य है। लेकिन मैं सपने देखने का जोखिम नहीं उठा सकता था, इसलिए मैंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। फिर भी, मेरा मन किसी और चीज पर नहीं लगता था, इसलिए 17 साल की उम्र में मैं दिल्ली विश्वविद्यालय चला गया। वहां मैंने थिएटर किया, लेकिन मेरे परिवार को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। आखिरकार, मैंने पिताजी को एक पत्र लिखा - वे नाराज नहीं हुए और उन्होंने मेरी फीस भरने के लिए 200 रुपये भी भेजे, घर पर लोग मुझे 'निकम्मा' कहते थे, लेकिन मैंने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।'

रिजेक्शन के बाद आते थे बुरे विचार

मनोज बाजपेयी ने खुलासा किया कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में बार-बार दाखिला न मिलने के बाद उनके मन में आत्महत्या के विचार आने लगे थे, लेकिन उनके दोस्तों ने उन्हें तब तक सहारा दिया जब तक कि उन्हें दाखिला नहीं मिल गया। मनोज ने बताया कि मैं एक बाहरी व्यक्ति था, जो घुलने-मिलने की कोशिश कर रहा था। इसलिए, मैंने खुद ही अंग्रेजी और हिंदी सीखी - भोजपुरी मेरी बोली का एक अहम हिस्सा थी। फिर मैंने एनएसडी में आवेदन किया, लेकिन तीन बार मेरा आवेदन खारिज हो गया। मैं आत्महत्या करने के कगार पर था, इसलिए मेरे दोस्त मेरे पास सोते थे और मुझे अकेला नहीं छोड़ते थे। उन्होंने मुझे तब तक हिम्मत दी जब तक कि मुझे दाखिला नहीं मिल गया। 

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