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'पैर टूटा था, आंखों पर चोट थी', सुशांत सिंह राजपूत केस में नया मोड़, बहन श्वेता ने रोते हुए पोस्टमार्टम को लेकर किए गंभीर दावे

श्वेता सिंह कीर्ति ने सुशांत सिंह राजपूत के पोस्टमार्टम को लेकर नए दावे किए हैं। उन्होंने चोटों और कथित हथियार के इस्तेमाल का जिक्र किया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

Shweta singh sushant singh rajput- India TV Hindi
Image Source : SHWETA SINGH SUSHANT SINGH RAJPUT INSTAGRAM श्वेता सिंह और सुशांत सिंह राजपूत।

दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को छह साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने एक वीडियो संदेश में अपने भाई के पोस्टमार्टम को लेकर कुछ नए दावे किए हैं। श्वेता ने कहा कि हाल ही में उनकी उस व्यक्ति से बातचीत हुई, जिसने कथित तौर पर सुशांत का पोस्टमार्टम किया था। उनके मुताबिक, उस व्यक्ति ने पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर चोटों और कथित तौर पर किसी तरह के हथियार के इस्तेमाल की बात कही थी। हालांकि, श्वेता द्वारा बताए गए इन दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

'पैर टूटा था और आंखों पर चोट थी'

अपने वीडियो संदेश में श्वेता ने दावा किया कि उन्हें हाल ही में पोस्टमार्टम करने वाले व्यक्ति से जुड़ी कुछ जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि उनके भाई के साथ काफी बल प्रयोग किया गया था, उनका पैर टूटा हुआ था और आंखों पर भी चोट थी। श्वेता ने कथित तौर पर बंदूक के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर सुशांत की मौत को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि इन बातों को फिलहाल श्वेता के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में उनके वीडियो में किए गए इन नए दावों की पुष्टि करने वाली कोई नई आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट या जांच एजेंसी का बयान सामने नहीं आया है। इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

'मैं नफरत और बदले की भावना में नहीं डूबना चाहती'

श्वेता ने अपने वीडियो में सिर्फ सुशांत की मौत से जुड़े दावों की बात नहीं की, बल्कि अपने भावनात्मक अनुभव और लोगों से मिली प्रतिक्रिया के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि अटलांटा से लौटने के बाद उनसे मिलने वाले कई लोग भावुक हुए और उनके भाई को याद करते हुए रोए। उन्होंने कहा कि किसी अपने के साथ कुछ बुरा होने का दर्द समझना आसान नहीं होता। हालांकि, श्वेता ने साफ किया कि वह अपने दिल में नफरत, बदले की भावना या नाराजगी को जगह नहीं देना चाहतीं। उन्होंने कहा कि वह अपनी जिंदगी में प्यार, विश्वास, अच्छाई और ईश्वर के लिए खड़े रहना चाहती हैं। श्वेता ने अपने समर्थकों से भी अपील की कि वे किसी घटना की वजह से अच्छाई और ईश्वर पर अपना विश्वास न खोएं। उनका संदेश इस बात पर केंद्रित रहा कि दर्द के बावजूद इंसान को नकारात्मकता से बचना चाहिए और प्रेम के जरिए आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।

सुशांत की मौत को लेकर क्या है आधिकारिक स्थिति?

सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे। उनकी मौत को शुरुआत में आत्महत्या के तौर पर दर्ज किया गया था। इसके बाद मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच केंद्रीय एजेंसियों ने भी की। श्वेता सिंह कीर्ति इससे पहले भी अपने भाई की मौत के मामले में सवाल उठाती रही हैं और अगस्त 2026 में भी उन्होंने मामले में कथित गड़बड़ी को लेकर अपनी बात रखी थी। ऐसे में उनके ताजा बयान ने एक बार फिर पुराने मामले को चर्चा में ला दिया है। लेकिन उनके नए पोस्टमार्टम संबंधी दावों और सुशांत की मौत के तरीके के बीच किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक जांच या प्रमाण जरूरी होंगे।

दिशा सालियान केस की जांच भी फिर चर्चा में

सुशांत की मौत के साथ अक्सर उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला भी चर्चा में आता रहा है। दिशा सालियान की जून 2020 में मुंबई में मौत हुई थी। इस मामले में उनके पिता सतीश सालियान ने परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले में सीबीआई जांच का निर्देश दिया और एफआईआर दर्ज करने को कहा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने का अर्थ किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं है और जांच के दौरान उपलब्ध सामग्री के आधार पर ही किसी के खिलाफ कार्रवाई तय होगी।

सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर

बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने सितंबर में दिशा सालियान की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज की। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में उनके पिता के बयान और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े पहलुओं को शामिल किया गया है। एफआईआर में कई गंभीर धाराओं का उल्लेख है, लेकिन जांच एजेंसी की जांच पूरी होने से पहले किसी आरोप को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

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