IIT एग्जाम क्रैक कर छोड़ी पढ़ाई, बनीं एक्ट्रेस और जीते 3 नेशनल अवॉर्ड, नाना पाटेकर की पत्नी की अनसुनी कहानी
नीलकांती पाटेकर ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा पास करने के बावजूद इंजीनियरिंग छोड़ अभिनय चुना। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नाना पाटेकर की पत्नी रहीं नीलकांती ने मराठी रंगमंच और सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं हैं। 8 अक्टूबर 2026 को 75 साल की उम्र में गोवा में कार्डियक अरेस्ट के चलते उनका निधन हो गया। करीब पांच दशक लंबे करियर में नाना ने अपनी दमदार अदाकारी से हिंदी और मराठी सिनेमा में खास मुकाम हासिल किया। उनके निधन के बाद एक बार फिर उनकी निजी जिंदगी और परिवार से जुड़ी बातें चर्चा में हैं। नाना पाटेकर की पत्नी नीलकांती पाटेकर भी खुद एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री रही हैं। उन्होंने मराठी रंगमंच और सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। खास बात यह है कि पढ़ाई में अव्वल रहीं नीलकांती ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा तक पास कर ली थी, लेकिन इंजीनियरिंग की राह छोड़कर उन्होंने अभिनय को अपना करियर बनाया। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता की पत्नी होने के बावजूद नीलकांती की अपनी उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त है। अब नाना के निधन के बाद उनकी जिंदगी और करियर से जुड़े ये पहलू एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
IIT की परीक्षा में हासिल की थी सफलता
नीलकांती पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। उनके पिता केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग में कार्यरत थे। नौकरी की वजह से परिवार को अलग-अलग शहरों में रहना पड़ा और नीलकांती का बचपन भी कई जगहों के अनुभवों के बीच बीता। अलग-अलग सामाजिक और सांस्कृतिक माहौल को करीब से देखने का असर उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ा। पढ़ाई के मामले में नीलकांती काफी मेधावी थीं। उन्हें विज्ञान में खास दिलचस्पी थी और उन्होंने फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया। पिता की इच्छा पर उन्होंने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा भी दी और उसमें सफल रहीं। हालांकि जिंदगी ने उनके लिए कुछ और तय कर रखा था। इंजीनियरिंग की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय नीलकांती ने उस रास्ते को छोड़ दिया, क्योंकि उनका मन अभिनय और रंगमंच में ज्यादा रमता था। उन्होंने पढ़ाई की सुरक्षित राह के बजाय थिएटर को चुना और यहीं से उनके अभिनय करियर की शुरुआत हुई।
रंगमंच से मिली पहचान
मराठी थिएटर में नीलकांती ने काफी सक्रियता से काम किया। मंच पर उनके अभिनय में सहजता और भावनात्मक गहराई नजर आती थी। उनकी प्रतिभा को शुरुआती दौर में ही पहचान मिल गई थी। साल 1973 में महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रतियोगिता में उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का स्वर्ण पदक मिला। यह सम्मान उनके अभिनय कौशल का बड़ा प्रमाण माना गया और इसके बाद थिएटर की दुनिया में उनकी पहचान और मजबूत होती चली गई। हालांकि अभिनय से जुड़ने के शुरुआती दौर में आर्थिक स्थिरता भी उनके लिए जरूरी थी। इसी वजह से उन्होंने बैंक में नौकरी भी की। लेकिन नौकरी के बावजूद रंगमंच के प्रति उनका लगाव कम नहीं हुआ। आखिरकार अभिनय ही उनके करियर की सबसे बड़ी पहचान बन गया।
नाना पाटेकर से ऐसे हुई मुलाकात
अभिनय और थिएटर की दुनिया में सक्रिय रहने के दौरान ही नीलकांती की मुलाकात नाना पाटेकर से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बाद में यह रिश्ता शादी तक पहुंचा। साल 1978 में नीलकांती और नाना पाटेकर ने शादी कर ली। उस समय दोनों ही अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि शादी के बाद उनका रिश्ता हमेशा सुर्खियों से दूर नहीं रहा। दोनों के वैवाहिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए और एक समय ऐसा भी रहा जब दोनों अलग-अलग रहने लगे। इसके बावजूद दोनों ने अपने रिश्ते को कानूनी तौर पर खत्म नहीं किया। उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी कई तरह की खबरें भी सामने आती रहीं, जिनमें नाना पाटेकर और अभिनेत्री मनीषा कोइराला की कथित नजदीकियों का जिक्र भी हुआ। इसके अलावा बेटे की असमय मौत ने भी परिवार को गहरा सदमा दिया।
'आत्मविश्वास' के लिए मिला बड़ा सम्मान
नीलकांती पाटेकर ने मराठी सिनेमा में भी काम किया और साल 1989 में रिलीज हुई फिल्म 'आत्मविश्वास' में अहम भूमिका निभाई। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहा गया। फिल्म में उनके काम के लिए उन्हें महाराष्ट्र सरकार की ओर से सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। इस उपलब्धि ने साबित किया कि नीलकांती केवल एक स्टार की पत्नी के तौर पर नहीं, बल्कि अपने दम पर एक गंभीर और प्रतिभाशाली अभिनेत्री के रूप में पहचान बना चुकी थीं।
'छावा' में फिर दिखीं नीलकांती
लंबे समय बाद नीलकांती पाटेकर को विक्की कौशल और रश्मिका मंदाना की फिल्म 'छावा' में भी देखा गया। भले ही फिल्म में उनका रोल बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उनकी मौजूदगी ने पुराने दर्शकों को उनकी अभिनय यात्रा की याद जरूर दिला दी। नीलकांती की कहानी इस मायने में खास है कि उन्होंने एक तरफ पढ़ाई में अपनी काबिलियत साबित की और दूसरी तरफ अपने दिल की आवाज सुनते हुए अभिनय को करियर के रूप में चुना। आईआईटी की परीक्षा पास करने के बावजूद इंजीनियरिंग की राह छोड़कर रंगमंच को अपनाने का उनका फैसला आज भी उनकी जिंदगी की सबसे दिलचस्प कहानियों में गिना जाता है।
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