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दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की शिफ्ट डिमांड को एक्टर ने बताया 'चोचला', बोले- 'जाकर कोई 9 से 5 की नौकरी पकड़ लीजिए'

एक्टर राजेंद्र चावला ने इंडस्ट्री में चल रही 8 घंटे शिफ्ट डिमांड पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'चोचला' बताया और कहा कि अगर किसी एक्टर को एक फिक्स्ड शिफ्ट में काम करना है तो उन्हें 9 से 5 की नौकरी पकड़ लेनी चाहिए।

deepika padukone- India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM/@DEEPIKAPADUKONE दीपिका पादुकोण।

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पिछले कुछ महीनों से शिफ्ट को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कथित तौर पर मां बनने के बाद दीपिका पादुकोण ने 8 घंटे शिफ्ट की डिमांड रखी थी, जिसके बाद उन्हें 2 बड़ी फिल्मों से हाथ धोना पड़ गया। इस पर जहां कुछ ने दीपिका पादुकोण का सपोर्ट किया तो कुछ के विचार बिलकुल अलग थे और उनका कहना था कि उनकी मांग जायज नहीं है। अब दिग्गज अभिनेता राजेंद्र चावला ने भी इस पूरे मामले पर अपनी राय रखी है। इसी के साथ उन्होंने पैपराजी कल्चर पर भी प्रतिक्रिया दी और नाराजगी जाहिर की।

काम करने का यही तरीका है- राजेंद्र चावला

बॉलीवुड बबल यूट्यूब चैनल से बात करते हुए राजेंद्र चावला ने फिल्म इंडस्ट्री के काम के तरीके और 8 घंटे शिफ्ट डिबेट पर प्रतिक्रिया दी और कहा, “मैं यह समझता हूं, लेकिन जब आप इस इंडस्ट्री में कदम रखते हैं तो आपको पहले दिन से ही ये जान और समझ लेना चाहिये कि यहां इसी तरीके से काम होता है। आपको ये बात स्वीकार करनी होगी कि इस इंडस्ट्री में 12-14 घंटे की शिफ्ट होती है, क्योंकि काम का बोझ बहुत ज्यादा होता है। उदाहरण के लिए डेली सोप के एक 22-25 मिनट के एपिसोड के लिए दिन रात काम करना पड़ता है।” 

9 से 5 की नौकरी कर लीजिए- राजेंद्र चावला

अपनी बात जारी रखते हुए राजेंद्र चावला कहते हैं- 'काम के इतने बोझ के बीच अगर आप अपनी इस जिद पर अड़े रहेंगे कि 'मैं 8 घंटे काम करूंगा या 5 घंटे', तो फिर काम कैसे पूरा होगा? अगर आप इस दौड़ में शामिल हो चुके हैं, तो आपको इसी रेस के अनुसार दौड़ना होगा। जैसा काम होगा, उसी के अनुसार काम करना होगा। अगर आप इसे नहीं अपना सकते, तो कोई 9 से 5 वाली नौकरी कर लीजिए और वहां खुश रहिए। आपको किसी ने मजबूर नहीं किया कि आप इस इंडस्ट्री में आएं। थके-हारे सोना, निराश होकर सोने से बेहतर है।'

पैपराजी कल्चर पर निकाली भड़ास

राजेंद्र चावला ने पैपराजी कल्चर पर भी नाराजगी जाहिर की। इस पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा- 'आज के समय में छोटी-छोटी घटनाओं को ऐसे पेश किया जाता है जैसे कोई तूफान आ गया हो। साधारण सी बात है किसी छोटी सी बात को जरूरत से ज्यादा तूल दिया जाना कारोबार बन चुका है। कई बार बेहद संवेदनशील पलों का भी तमाशा बना दिया जाता है। धर्मेंद्र के निधन पर भी कैमरों की होड़ दिखाई दी। ये अजीब कॉन्पटीशन है।'

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