मर्द के दर्द को चित्रित करती है फिल्म 'हाय जिंदगी', जानें क्यों देखें ये फिल्म

'हाय जिंदगी' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म में मर्द के दर्द पर बात की गई है। फिल्म की कहानी और कलाकारों का काम कैसा है, जानें।

Photo: PRESS KIT हाय जिंदगी की कास्ट।
मूवी रिव्यू:: हाय जिंदगी
Critics Rating: 3 / 5
पर्दे पर: 14/11/2025
कलाकार:
डायरेक्टर: अजय राम
शैली: रॉम कॉम
संगीत: .............

महिला सुरक्षा और उनके हित के लिए कानून में कई प्रावधान हैं जिनके कारण आज के समय में इस तरह के कानून का कुछ लोगों द्वारा गलत इस्तेमाल भी किया जा रहा है। अब पुरुष भी अपनी सुरक्षा के लिए कानून की मांग कर रहे हैं ताकि अगर उनके साथ भी कभी कुछ गलत होता है तो वे पुलिस या अदालत का रुख कर सकें। मौजूदा सोसाईटी के इस कड़वे सच को पेश करती हाय जिंदगी एक बेहद संवेदनशील फिल्म है। निर्माता सुनील कुमार अग्रवाल और निर्देशक अजय राम की यह सोशल ड्रामा फिल्म दरअसल एक आंख खोलने वाला सिनेमा है।

कहानी

इसकी स्टोरी चार सहेलियों पलक (गरिमा सिंह), मेघा (आयुषी तिवारी), ज्योति (सोमी श्री) और नंदिनी (दीपांशी त्यागी) के बारे मे है. पार्टी करने, डिस्को जाने और लौंग ड्राईव पर जाने को ही ये जिंदगी मानती हैं। चारों दोस्त एक दिन पलक के पापा के फार्महाउस मे जाने की योजना बनाती है। पलक के डैडी की कंपनी में जॉब करने वाले वरुण (गौरव सिंह) को ये लड़कियां अपने साथ ले जाती हैं। फार्महाउस मे शराब और मस्ती का दौर चलता है। वरूण को गहरे नशे मे चढ़ाकर लड़कियां उसके जिस्म से खेलती है। जब वह बेहोशी से बाहर निकलता है तो पुलिस को जाकर अपने साथ हुई जबर्दस्ती की बात बताता है मगर उसकी शिकायत न लिखकर पुलिसवाले उसपर हंसते हैं। आगे वह क्या करता है, यह आपको फिल्म देखकर पता चलेगा। सिनेमा के क्लाइमैक्स की चर्चा खास तौर पर होनी चाहिए। फिल्म के अंतिम 20 मिनट बहुत पावरफुल है। इसका बड़ा क्रेडिट फिल्म के डायरेक्टर और प्रमुख कलाकारों को जाता है।

एक्टिंग

अदाकारी की बात करें, तो सभी कलाकारों ने बहुत नेचुरल अभिनय किया है। हालांकि नए चेहरे हैं मगर जिस तरह इन्होंने ऐक्टिंग की है वो प्रशंसनीय है। गौरव सिंह, आयुशी तिवारी, गरिमा सिंह के अलावा सभी आर्टिस्ट ने अपने चरित्रों को जीवंत कर दिया है।

डायरेक्शन

निर्देशक अजय राम बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने इतने जटिल मुद्दे पर आधारित सिनेमा मनोरंजन को ध्यान में रखकर बनाया है। मर्द के दर्द को उन्होंने पिक्चर मे प्रभावी रूप से चित्रित किया है। फिल्म कहीं भी बोर नहीं करती और जरूरी बात भी कह जाती है।

क्यों देखें

कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि अगर आप कुछ अलग कंटेंट देखना चाहते हैं तो निस्संकोच यह फिल्म आपके लिए है. एक अलग तरह का अनुभव यदि आप हासिल करना चाहते हैं तो सिनेमाघरों मे रिलीज यह फिल्म देखने के काबिल है।