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इंडियन वेब सीरीज का जनक, 'पंचायत' से 'गुल्लक' तक 9+ IMDb रेटिंग वाली 7 सीरीज का मास्टरमाइंड, ये IITian कभी था फराह खान का असिस्टेंट

'पंचायत', 'गुल्लक', 'कोटा फैक्ट्री' जैसी वेब सीरीज का जब भी नाम लिया जाता है तो इनके साथ एक शख्स नाम अपने आप जुड़ जाता है, जिसे इंडियन वेब सीरीज का जनक भी कहा जा सकता है। जानते हैं इस शख्स के बारे में।

Arunabh kumar panchayat- India TV Hindi
Image Source : ARUNABH KUMAR INSTAGRAM पंचायत की कास्ट के साथ अरुणाभ कुमार।

अगर आप डिजिटल मनोरंजन के शौकीन हैं तो 'द वायरल फीवर' (TVF) का नाम आपके लिए अनजान नहीं होगा। 'कोटा फैक्ट्री', 'पिचर्स' और 'गुल्लक' जैसे संजीदा और दिल छू लेने वाले शोज देने वाले इस प्लेटफॉर्म ने भारतीय युवाओं की सोच को एक नई दिशा दी है, लेकिन इस क्रांति के पीछे मुजफ्फरपुर के एक छोटे से लड़के, अरुणाभ कुमार की वह जिद्दी कहानी है, जो असफलताओं के बीच भी अपनी स्टोरीटेलिंग के सपने को जिंदा रखने का माद्दा रखती थी।

बिहार की गलियों से IIT खड़गपुर तक का सफर

अरुणाभ की जड़ें बिहार के मुजफ्फरपुर में हैं। एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे अरुणाभ के पिता स्टेट बैंक में कैशियर थे और मां एक स्कूल की प्रिंसिपल। बेहतर शिक्षा की तलाश में उन्होंने बचपन में 10 से ज्यादा स्कूल बदले, जो शायद उनके व्यक्तित्व में आए लचीलेपन का कारण बना। जयपुर से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह इंजीनियरिंग का सपना लेकर कोटा पहुंचे। साल 2001 में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT खड़गपुर में दाखिला मिल गया। हालांकि वहां वह मशीनें तो पढ़ रहे थे, लेकिन उनका दिल थिएटर और कहानियों में धड़कता था।

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मुंबई की चकाचौंध और 'ओम शांति ओम' का अनुभव

इंजीनियरिंग के बाद अरुणाभ ने एक सुरक्षित करियर की जगह अनिश्चितताओं से भरा फिल्म मेकिंग का रास्ता चुना। 2006 में वह सपनों की नगरी मुंबई पहुंचे। शुरुआती संघर्ष के बाद उन्हें शाहरुख खान की रेड चिलीज एंटरटेनमेंट में काम करने का मौका मिला। साल 2007 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'ओम शांति ओम' में उन्होंने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया। अरुणाभ आज भी उस अनुभव को अपना 'फिल्म स्कूल' मानते हैं, जहां उन्होंने सेट की बारीकियों और बड़े पर्दे के जादू को करीब से देखा।

जब जेब खाली थी और गोवा में वेटर का किया काम 

फिल्म इंडस्ट्री की चमक जितनी बाहर से दिखती है अंदर का संघर्ष उतना ही स्याह होता है। 'ओम शांति ओम' के बाद अरुणाभ के पास कोई स्थायी काम नहीं था। तीन साल तक उन्होंने पैसों की भारी तंगी झेली। हालात इतने खराब हो गए थे कि गुजारा करने के लिए उन्होंने एड एजेंसियों और कॉर्पोरेट फिल्मों में छोटे-मोटे काम किए। एक दौर ऐसा भी आया जब पेट पालने के लिए उन्हें गोवा के एक रेस्तरां में वेटर तक का काम करना पड़ा। लेकिन यह तंगी उनके इरादों को डिगा नहीं पाई; वह बस एक सही मौके का इंतजार कर रहे थे।

TVF का उदय और डिजिटल क्रांति की शुरुआत

साल 2011 में अरुणाभ ने ठान लिया कि अगर उन्हें बड़े पर्दे पर जगह नहीं मिल रही, तो वह अपना खुद का मंच बनाएंगे। उन्होंने 'TVF मीडिया लैब' की नींव रखी। फरवरी 2012 में उन्होंने एक स्पूफ वीडियो 'राउडीज' (Rowdies) रिलीज किया, जिसने रातों-रात इंटरनेट पर तहलका मचा दिया। यह वह दौर था जब भारत में यूट्यूब कंटेंट अभी अपनी शैशवावस्था में था। इसके बाद अरुणाभ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

पिचर्स: भारत की पहली ग्लोबल वेब सीरीज

अरुणाभ केवल वीडियो तक सीमित नहीं रहे, उन्होंने भारत को उसकी पहली असली वेब सीरीज 'पिचर्स' दी। यह सीरीज न केवल युवाओं के बीच कल्ट बन गई, बल्कि 'IMDb' की टॉप 250 वैश्विक शोज की लिस्ट में जगह बनाने वाली पहली भारतीय सीरीज बनी। आज अरुणाभ कुमार की बदौलत TVF एक ऐसा ब्रांड बन चुका है, जो मध्यवर्ग की साधारण कहानियों को असाधारण तरीके से पेश करता है। एक वेटर से लेकर डिजिटल किंग बनने तक का उनका यह सफर सिखाता है कि अगर आपकी कहानी सच्ची है, तो दुनिया उसे सुनने के लिए मजबूर हो ही जाएगी।

9 से ज्यादा रेटिंग वाली 7 TVF सीरीज

  • एस्पिरेंट- 9.1
  • कोटा फैक्ट्री - 9
  • पंचायत- 9
  • गुल्लक- 9.1
  • पिचर- 9.1
  • सपने वर्सेज एवरीवन- 9.2
  • संदीप भैया- 9

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