A
Hindi News मनोरंजन टीवी IMDb पर 9.2 रेटिंग वाला TV सीरियल, सस्पेंस का धांसू पैकेज था ये मिस्ट्री-थ्रिलर, रामायण-महाभारत से भी तगड़ी थी पॉपुलैरिटी

IMDb पर 9.2 रेटिंग वाला TV सीरियल, सस्पेंस का धांसू पैकेज था ये मिस्ट्री-थ्रिलर, रामायण-महाभारत से भी तगड़ी थी पॉपुलैरिटी

90 के दशक में कई पॉपुलर टीवी शो छोटे पर्दे पर राज करते थे। 'रामायण' और 'महाभारत' जैसे पौराणिक टीवी शो का जलवा था, लेकिन इस दौर में एक मिस्ट्री थिलर शो रिलीज हुआ था, जिसकी फैन फॉलोइन गजब थी और लोग इसके प्रसारण का इंतजार करते थे।

Byomkesh Bakshi - India TV Hindi Image Source : BYOMKESH BAKSHI STILL, IMDB रजित कपूर एक सीन में।

एक ऐसा दौर था जब भारत में मनोरंजन का मतलब सिर्फ और सिर्फ दूरदर्शन हुआ करता था। न केबल टीवी था, न ओटीटी प्लेटफॉर्म और न ही अनगिनत चैनलों की भीड़। दूरदर्शन ही वह खिड़की था, जिससे देशभर के लोग कहानियों की दुनिया में झांकते थे। बच्चे हों या बुज़ुर्ग, महिलाएं हों या पुरुष, यहां तक कि सुनने और बोलने में असमर्थ दर्शकों के लिए भी खास कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे। खासकर शनिवार और रविवार को परिवार के साथ टीवी के सामने बैठना एक परंपरा जैसा था और इस परंपरा को खास बनाने की जिम्मेदारी पूरी तरह दूरदर्शन के कंधों पर थी। उस दौर में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले अधिकतर धारावाहिक सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं होते थे, बल्कि उनके पीछे कोई न कोई उद्देश्य जरूर छिपा होता था। सामाजिक संदेश, नैतिक मूल्य और सशक्त कहानी, यही उन शोज की पहचान थी। इन्हीं खास पेशकशों में से एक था जासूसी धारावाहिक 'ब्योमकेश बक्शी', जिसने 90 के दशक में दर्शकों को बांधकर रखा।

शेरलॉक होम्स का देसी अवतार

प्रसिद्ध लेखक शरदेन्दु बंद्योपाध्याय की बांग्ला जासूसी कहानियों पर आधारित ब्योमकेश बक्शी को अक्सर शेरलॉक होम्स का इंडियन वर्जन कहा जाता है। साल 1993 से 1996 तक दूरदर्शन पर प्रसारित हुए इस शो ने अपनी सधी हुई प्रस्तुति और दमदार कहानी कहने के अंदाज़ से खास पहचान बनाई। उस समय जब तकनीक सीमित थी, यह शो सिर्फ दिमागी खेल और तर्कशक्ति के बल पर दर्शकों को रोमांचित करता था।

कहानी और किरदारों का जादू

इस लोकप्रिय धारावाहिक का निर्देशन दिग्गज फिल्ममेकर बासु चटर्जी ने किया था। मुख्य भूमिका में रजित कपूर ने जासूस ब्योमकेश बक्शी के किरदार को जीवंत कर दिया, जबकि उनके भरोसेमंद दोस्त अजीत कुमार बनर्जी की भूमिका में केके रैना नज़र आए। शो की सबसे बड़ी खासियत यही थी कि ब्योमकेश बिना किसी फोरेंसिक लैब, डीएनए टेस्ट या हाई-टेक गैजेट्स के सिर्फ अपनी तेज बुद्धि और बारीक निरीक्षण शक्ति से सबसे जटिल मामलों को सुलझा लेता था। हर एपिसोड में दर्शकों को ऐसे केस देखने को मिलते थे, जो रहस्य और सस्पेंस से भरपूर होते थे। ब्योमकेश और अजीत की जोड़ी मिलकर ऐसे अपराधों की गुत्थियां सुलझाती थी, जो दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देती थीं। संवाद, बैकग्राउंड स्कोर और कहानी की रफ्तार सब कुछ बेहद संतुलित और प्रभावशाली था।

आज की फिल्मों से भी आगे

आज के दौर में पठान और एनिमल जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रही हैं और लोकप्रियता के नए मानक स्थापित कर रही हैं। लेकिन जब बात कंटेंट की गुणवत्ता और दर्शकों की स्थायी पसंद की आती है, तो ब्योमकेश बक्शी आज भी कहीं आगे नजर आता है। इसका सबसे बड़ा सबूत है इसकी IMDb रेटिंग। IMDb पर ब्योमकेश बक्शी को 10 में से 9.2 की शानदार रेटिंग मिली है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। वहीं पठान को IMDb पर 5.9 और एनिमल को 7.0 की रेटिंग मिली है। इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि भले ही आज की फिल्में तकनीक और बजट के मामले में आगे हों, लेकिन कहानी, निर्देशन और अभिनय के स्तर पर 90 के दशक का यह धारावाहिक आज भी दर्शकों के दिलों पर राज करता है। ब्योमकेश बक्शी सिर्फ एक जासूसी शो नहीं था, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता को चुनौती देने वाला अनुभव था। इसकी सादगी, गहराई और बुद्धिमत्ता इसे कालजयी बनाती है।

ये भी पढ़ें: The Bads of Bollywood विवाद: समीर वानखेड़े को बड़ा झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज किया केस

'डिजास्टर होगी हेरा फेरी 3', अक्षय कुमार संग विवाद के बाद ये क्या बोल गए परेश रावल