1. Hindi News
  2. मनोरंजन
  3. टीवी
  4. 'महाभारत' के महाबली भीम याद हैं? 20 की उम्र में BSF में हुए भरती, ओलंपिक में किया भारत को रीप्रेजेंट, फिर एक्टिंग छोड़ बदल दी जिंदगी की दिशा

'महाभारत' के महाबली भीम याद हैं? 20 की उम्र में BSF में हुए भरती, ओलंपिक में किया भारत को रीप्रेजेंट, फिर एक्टिंग छोड़ बदल दी जिंदगी की दिशा

'महाभारत' के कई किरदार ऐसे हैं, जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं, ऐसा ही एक किरदार है महाबली भीम का, जिसे प्रवीण कुमार ने निभाया था। प्रवीण एक नामी एथलीट भी थे।

Mahabharat bheem praveen kumar- India TV Hindi
Image Source : IMDB महाभारत के भीम।

भारतीय मनोरंजन और खेल जगत के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं, जिन्होंने अपनी शारीरिक क्षमता और कला के दम पर दो बिल्कुल अलग क्षेत्रों में शीर्ष स्थान हासिल किया। अक्सर हम पर्दे पर दिखने वाले कलाकारों को केवल उनके अभिनय से पहचानते हैं, लेकिन उनके पीछे संघर्ष और उपलब्धियों की एक ऐसी दुनिया होती है जिससे बहुत कम लोग वाकिफ होते हैं। एक ऐसी ही शख्सियत ने न केवल भारत के घर-घर में अपनी एक खास पहचान बनाई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल मैदानों पर तिरंगा लहराकर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा किया। यह कहानी एक ऐसे महानायक की है, जिसने सीमाओं की रक्षा की, खेलों में स्वर्ण पदक जीते और अंततः एक पौराणिक किरदार को पर्दे पर हमेशा के लिए अमर कर दिया।

सीमा सुरक्षा से खेल के मैदान तक

प्रवीण कुमार सोबती का जन्म 6 दिसंबर 1947 को पंजाब के एक छोटे से कस्बे सरहाली कलां में हुआ था। बचपन से ही उनकी कद-काठी काफी मजबूत और प्रभावशाली थी। इसी शारीरिक बनावट के कारण महज 20 साल की उम्र में वे सीमा सुरक्षा बल का हिस्सा बन गए। सेना के अनुशासन के बीच रहते हुए उनकी रुचि खेलों की तरफ बढ़ी। उनकी लंबी चौड़ी काया को देखकर बीएसएफ के अधिकारियों ने उन्हें डिस्कस थ्रो और हैमर थ्रो जैसे खेलों में हाथ आजमाने की सलाह दी। प्रवीण ने अधिकारियों की बात मानी और कड़ी ट्रेनिंग शुरू कर दी। जल्द ही उनकी मेहनत रंग लाई और 1960 के दशक में उन्होंने एक पेशेवर खिलाड़ी के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना शुरू कर दिया। वे केवल एक सैनिक नहीं थे, बल्कि भारत की उभरती हुई खेल शक्ति का चेहरा बन गए थे।

एशियाई खेलों में सफलता का परचम 

1960 और 70 के दशक में प्रवीण कुमार सोबती भारतीय एथलेटिक्स का एक ऐसा नाम बन चुके थे, जिनके आगे कोई प्रतिद्वंद्वी टिक नहीं पाता था। उनकी झोली पदकों से भरी थी। 1966 के एशियाई खेलों में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक और हैमर थ्रो में कांस्य पदक जीता। उनकी यह सफलता यहीं नहीं रुकी, 1970 के एशियाई खेलों में उन्होंने एक बार फिर अपनी बादशाहत कायम की और देश को स्वर्ण पदक दिलाया। प्रवीण ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी अपनी छाप छोड़ी और 1966 के खेलों में हैमर थ्रो में रजत पदक हासिल किया। 1974 के एशियाई खेलों में वे बहुत ही मामूली अंतर से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए, जिससे उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इतना ही नहीं उन्होंने ओलंपिक में भी भारत का नेतृत्व किया, लेकिन कोई पदक नहीं जीत सके।

'महाभारत' में 'भीम' के रूप में अमरता

खेलों से संन्यास लेने के बाद नियति उन्हें अभिनय की दुनिया में ले आई। जब बीआर चोपड़ा अपनी महान कृति 'महाभारत' के लिए कलाकारों का चयन कर रहे थे, तब उन्हें 'भीम' के किरदार के लिए एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो न केवल बलशाली दिखे, बल्कि उसमें मासूमियत और गंभीरता का संगम भी हो। प्रवीण कुमार सोबती अपनी लंबी कद-काठी और सौम्य चेहरे के साथ इस भूमिका के लिए एकदम सटीक साबित हुए। साल 2013 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और आम आदमी पार्टी ज्वाइन की, एक साल बाद ही वो बीजेपी में शामिल हो गए। साल 2022 में प्रवीण कुमार की 74 साल की उम्र में मौत हो गई।

ये भी पढ़ें: 'भूत बंगला' देख खली कॉमेडी के जादूगर की कमी, अगर आज होता जिंदा तो फिर रच देता 'भूल भुलैया' जैसा इतिहास