'महाभारत' की द्रौपदी की बदली अदा, मासूम हसीना अब दिखा रही धाकड़ अंदाज, बंगाल चुनाव में रच दिया इतिहास
'महाभारत' में द्रौपदी का रोल निभाने वाली एक्ट्रेस आज पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम भूमिका निभा रही है। भारतीय जनता पार्टी की जीत का श्रेय उन्हें भी जाता है। मासूम सी दिखने वाली ये हसीना आज धाकड़ अंदाज में टीएमसी से लोहा लेती हैं।

एक मासूम चेहरा, जिसकी आंखों में एक समय पूरा देश अक्स देखता था। एक ऐसी शख्सियत, जिसने सत्तर के दशक के अंत और अस्सी के दशक में अपनी अदाकारी से भारतीय टेलीविजन के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया। लोग उन्हें केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि एक प्रतीक मानते थे। लेकिन समय का पहिया घूमा और उस मासूम हसीना ने अपनी कोमलता का त्याग कर एक ऐसा धाकड़ अवतार धारण किया, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। कल तक जो महाभारत टीवी शो में द्रौपदी के चीरहरण पर न्याय की गुहार लगा रही थी, आज वही नारी राजनीति के अखाड़े में दहाड़ रही है। आखिर कैसे एक अभिनेत्री ने ग्लैमर की दुनिया को पीछे छोड़, बंगाल की तपती सड़कों पर अपना पसीना बहाया और राजनीति के बड़े-बड़े दिग्गजों को चौंकाते हुए एक नया इतिहास रच दिया?
पर्दे की द्रौपदी और अदाकारी का स्वर्णिम सफर
रूपा गांगुली का नाम जेहन में आते ही बीआर चोपड़ा की 'महाभारत' की वह छवि उभर आती है, जिसने उन्हें रातों-रात घर-घर में पहचान दिला दी। 1980 के दशक अंत में जब द्रौपदी का किरदार निभाने के लिए एक प्रभावशाली व्यक्तित्व की तलाश थी तब रूपा गांगुली ने अपनी सशक्त आवाज और दमदार अभिनय से उस भूमिका में जान फूंक दी। उन्होंने केवल पौराणिक कथाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा। रूपा ने मृणाल सेन और अपर्णा सेन जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया। उनकी फिल्म 'पद्मा नदीर माझी' और 'युगांत' ने यह साबित कर दिया कि वह केवल एक ग्लैमरस चेहरा नहीं, बल्कि एक मंझी हुई अदाकारा हैं। बंगाली सिनेमा से लेकर हिंदी सिनेमा तक उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और कई राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए।
सुरों की दुनिया में भी बिखेरा जादू
कम ही लोग जानते हैं कि रूपा गांगुली केवल एक बेहतरीन अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि एक सुरीली गायिका भी हैं। उन्होंने कई बंगाली फिल्मों में अपनी आवाज दी। फिल्म 'आबोहोमान' के लिए उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगर फीमेल का नेशनल अवॉर्ड मिला। उनकी आवाज में वही गहराई और भावुकता थी, जो उनके अभिनय में नजर आती थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, कला के इन तमाम रंगों के बीच रूपा के भीतर एक सामाजिक कार्यकर्ता और अन्याय के खिलाफ लड़ने वाली महिला जन्म ले रही थी, जो आगे चलकर राजनीति के जटिल गलियारों की ओर मुड़ गई।
ग्लैमर की चकाचौंध से राजनीति के कांटों भरे रास्ते तक
रूपा गांगुली का राजनीति में प्रवेश अचानक नहीं था, बल्कि यह बंगाल की तत्कालीन परिस्थितियों के प्रति उनके आक्रोश का परिणाम था। साल 2015 में उन्होंने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। उस समय बंगाल की राजनीति में भाजपा एक उभरती हुई शक्ति थी और रूपा गांगुली पार्टी के लिए एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं। उन्होंने फिल्मी सुख-सुविधाओं को त्याग कर जमीन पर उतरने का फैसला किया। उन्होंने रैलियां कीं, विरोध प्रदर्शनों में लाठियां तक झेलीं और कई बार उन्हें शारीरिक हमलों का सामना भी करना पड़ा। उनके इस जुझारू तेवर ने उन्हें धाकड़ नेता की छवि दी, जिससे कार्यकर्ता उनसे जुड़ते चले गए।
बंगाल की राजनीति में पैठ और चुनावी रणभूमि में इतिहास
बंगाल की राजनीति हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है, खासकर एक महिला और सिनेमा की दुनिया से आए व्यक्ति के लिए, लेकिन रूपा गांगुली ने हार नहीं मानी। 2016 के विधानसभा चुनावों से लेकर राज्यसभा तक उन्होंने हर मोर्चे पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी। उन्होंने महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और बंगाल के विकास के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। हालिया सालों में बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में जिस तरह से रूपा ने अपनी जगह बनाई, वह काबिले तारीफ है। उनके नेतृत्व में भाजपा ने कई क्षेत्रों में अपनी पैठ मजबूत की। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि उन्होंने बंगाल के चुनावी इतिहास में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी और यह साबित कर दिया कि एक कलाकार अगर ठान ले तो वह जनसेवक के रूप में भी उतनी ही सफल हो सकती है।
एक नई पारी की शुरुआत
आज रूपा गांगुली की पहचान केवल द्रौपदी के रूप में नहीं, बल्कि एक कद्दावर राजनेता के रूप में होती है। उन्होंने दिखाया है कि कैसे एक अभिनेत्री अपने अभिनय की संवेदनशीलता को राजनीति की दृढ़ता में बदल सकती है। बंगाल की राजनीति में उनका कद अब इतना बड़ा हो चुका है कि उनकी हर बात और हर कदम पर विरोधियों की नजर रहती है। पश्चिम बंगाल चुनाव में सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट रूपा गांगुली ने चुनाव लड़ा था। रूपा गांगुली 35 हजार 782 वोटों से चुनाव जीती हैं। रूपा गांगुली को 1 लाख 28 हजार 970 वोट मिले हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की अरुंधति मैत्रा उर्फ लवली मैत्रा को बुरी तरह हराया है। अरुंधति मैत्रा भी टीवी इंडस्ट्री का नामी चेहरा हैं।
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