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'श्री कृष्णा' की सत्यभामा याद है, कान्हा की पटरानी बन चलाया था नैनों से बाण, अब बदला अंदाज, फिर भी 33 साल से जमाई है धाक

'श्री कृष्णा' में भगवान कृष्ण की अलग-अलग पटरानियां दिखाई गई थीं, जिसमें से एक सत्यभामा थीं। इस किरदार को बेहद खूबसूरत एक्ट्रेस हसीना ने निभाया था, जो अब भी इंडस्ट्री में धाक जमाए हुए हैं।

Satyabhama- India TV Hindi
Image Source : STILL FROM MAHABHARAT सत्यभामा।

90 के दशक में 'रामायण' की सफलता के बाद दूरदर्शन पर जब पौराणिक धारावाहिक 'श्री कृष्णा' का प्रसारण शुरू हुआ तो दर्शकों ने इसे भी सिर-आखों पर बिठाया। इस धारावाहिक में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और राधा के साथ उनके निश्छल प्रेम को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया था। पौराणिक गाथाओं के अनुसार श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों का विशेष महत्व है और इस शो में भी उनकी भूमिकाएं काफी अहम थीं। इन्हीं पटरानियों में से एक देवी सत्यभामा के किरदार को पर्दे पर जीवंत करने वाली अभिनेत्री शशि शर्मा ने अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। आइए जानते हैं शशि शर्मा के इस दिलचस्प सफर के बारे में।

सत्यभामा के किरदार से मिली पहचान और अब का बदला लुक

धारावाहिक 'श्री कृष्णा' में रुक्मिणी के बाद देवी सत्यभामा के चरित्र को काफी प्रभावशाली ढंग से पेश किया गया था। शशि शर्मा ने इस चुनौतीपूर्ण भूमिका को जिस सहजता और गरिमा के साथ निभाया, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ था। उस दौर में यानी करीब तीन दशक पहले शशि शर्मा अपनी अद्भुत सुंदरता और सधे हुए अभिनय के लिए जानी जाती थीं। आज 61 वर्ष की उम्र में उनके लुक में काफी बदलाव आ चुका है, लेकिन उनके अभिनय का जलवा आज भी फीकी नहीं पड़ा है। वर्तमान समय में वे टेलीविजन और फिल्मों में मां, दादी या नानी के किरदारों में नजर आती हैं। स्टार प्लस के लोकप्रिय शो 'सुहानी सी एक लड़की' में उन्होंने दादी का जो किरदार निभाया था, उसे दर्शकों ने काफी पसंद किया।

जयपुर के रंगमंच से अभिनय की शुरुआत और पहला बड़ा ब्रेक

शशि शर्मा के अभिनय के सफर की शुरुआत काफी संघर्षपूर्ण और रोचक रही है। ग्लैमर की दुनिया में कदम रखने से पहले वे राजस्थान के जयपुर में थिएटर किया करती थीं, जिससे उनके अभिनय को एक मजबूत आधार मिला। उन्होंने साल 1986 में आई फिल्म 'जिंदा लाश' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसी दौरान उन्हें एक राजस्थानी फिल्म 'चांचा थारै चांदणे' में काम करने का अवसर मिला। किस्मत का खेल देखिए कि जब वे इस राजस्थानी फिल्म की शूटिंग कर रही थीं, उसी लोकेशन के पास ऐतिहासिक धारावाहिक 'द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान' की शूटिंग भी चल रही थी। वहां शशि को 'महारानी मैसूर' का बेहद महत्वपूर्ण रोल ऑफर हुआ। इस किरदार में उन्होंने अपने अभिनय की ऐसी छाप छोड़ी कि उनके करियर को एक नई दिशा मिल गई और इंडस्ट्री से उन्हें ढेरों प्रस्ताव मिलने लगे।

तीन दशकों का लंबा करियर और नकारात्मक किरदारों में जलवा

अपने लगभग 33 साल से भी अधिक लंबे अभिनय सफर में शशि शर्मा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने अब तक करीब 200 फिल्मों और 250 से ज्यादा टीवी सीरियल्स में अपनी अदाकारी का हुनर दिखाया है। उनके खाते में 'बागी' (2000), 'क्रोध', 'लज्जा', 'इंडियन बाबू' (2003) और 'जय संतोषी मां' जैसी कई बेहतरीन फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने दूरदर्शन के मशहूर डेली सोप 'शांति' और रानी मुखर्जी की मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'राजा की आएगी बारात' में भी महत्वपूर्ण रोल निभाए थे। अक्षय कुमार के अभिनय से सजी फिल्म 'तराजू' में शशि शर्मा एक बेहद कड़क और निगेटिव किरदार में नजर आई थीं। पर्दे पर उनके खलनायिका वाले रूपों को दर्शकों ने खूब सराहा, क्योंकि वे अपनी तीखी अभिव्यक्तियों और दमदार संवाद अदायगी से निगेटिव रोल को भी बेहद प्रभावशाली बना देती हैं।

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