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TRP बढ़ाने के लिए मेकर्स का बड़ा फैसला, 7 साल बाद 'उड़ने की आशा' की बदल जाएगी पूरी कहानी

'उड़ने की आशा' में सात साल के लीप के बाद कहानी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिसका असर TRP पर भी होगा। हाल ही में मेकर्स ने कंवर ढिल्लों का नया लुक भी शेयर किया है।

Udne Ki Aasha- India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM/@STARPLUS उड़ने की आशा

स्टार प्लस का लोकप्रिय शो 'उड़ने की आशा' लंबे समय से अपनी कहानी और कास्ट के चलते चर्चा में है। अब टीआरपी में बने रहने के लिए मेकर्स नया गेम खेलने वाले हैं और कहानी 7 साल आगे बढ़ने वाली है। मेकर्स अब सीरियल की कहानी में एक भावनात्मक मोड़ लेकर आ रहा है। सचिन और सायली की जिंदगी सात साल आगे बढ़ चुकी है। समय भले ही आगे निकल गया हो, लेकिन किस्मत ने उनके हिस्से के दुख-सुख संभालकर रखे हुए हैं। 'अनुपमा', 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' और 'क्योंकि एक सास भी कभी बहू थी 2' के बाद अब इस शो में लीप के बाद नया ड्रामा देखने को मिलेगा।

उड़ने की आशा के लिए कंवर ढिल्लों का बदला लुक

अपकमिंग एपिसोड में दर्शकों को देखने को मिलेगा कि अपने बेटे के जिंदा होने और उनसे दूर पल-बढ़ रहे होने से अनजान सचिन और सायली अपनी बेटी पूर्णा के साथ नई जिंदगी शुरू करते हैं। दोनों उस दर्द के साथ जी रहे हैं, जिसे वे अपनी कभी न भरने वाली कमी मान चुके हैं। 7 साल के लीप के बाद आने वाले एपिसोड्स में दर्शकों को प्यार, उम्मीद और दुख-सुख से भरा एक इमोशनल सफर देखने को मिलेगा। इस नए अध्याय के साथ कंवर ढिल्लों भी एक नए लुक में दिखाई देंगे। अपने किरदार के लिए उन्होंने ढाई साल बाद पहली बार अपने बाल कटवाए हैं।

7 साल बाद बदली कहानी

'उड़ने की आशा' अपनी इमोशनल कहानी से दर्शकों को बांधे हुए है। हाल के एपिसोड्स ने फैंस का दिल जीत लिया है। वे सचिन और सायली की कहानी में आए नए मोड़ और इमोशनल गहराई को पसंद कर रहे हैं। रोशनी की साजिश ने जब उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी तब से सचिन और सायली देशमुख परिवार से अलग रह रहे हैं। अपने बच्चे को खोने के दुख से उबरते हुए, इस कपल ने धीरे-धीरे अपनी एक छोटी लेकिन सुकून भरी जिंदगी बना ली है। उनकी खुशी की सबसे बड़ी वजह पंखुड़ी है, जिसकी वे बहुत प्यार और देखभाल से परवरिश कर रहे हैं। उसने उनकी जिंदगी में खुशियां भरी हैं और दुख के बावजूद उन्हें आगे बढ़ने में मदद की है।

सचिन और सायली की बेटा का दमदार अंदाज

पंखुड़ी की परवरिश में सचिन और सायली के संस्कार साफ झलकते हैं। सचिन की तरह ही वह भी अन्याय बर्दाश्त नहीं करती और अपने हक के लिए आवाज उठाने से कभी नहीं डरती। स्कूल में जब कोई लड़की पंखुड़ी और उसकी सहेली को परेशान करती है तो वह चुप नहीं रहती। मजबूत इरादों वाली और निडर पंखुड़ी डटकर मुकाबला करती है, जिससे साबित होता है कि उसे अपनी परवरिश करने वालों से ही हिम्मत और आत्मविश्वास मिला है।

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