कितना खतरनाक है चक्रवात 'ARNAB', बंगाल की खाड़ी में बना डीप डिप्रेशन, किन राज्यों को खतरा?
बंगाल की खाड़ी में बना मौसम सिस्टम अब डीप डिप्रेशन में बदल चुका है और ओडिशा व आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। हवा की रफ्तार बढ़ने पर यह खतरनाक चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।

बंगाल की खाड़ी में बने मौसम सिस्टम के कारण मंगलवार को ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश हुई। IMD ने बताया कि यह सिस्टम डीप डिप्रेशन में बदल चुका है और तट की ओर बढ़ रहा है। फिलहाल, यह सिस्टम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक डीप डिप्रेशन के रूप में है और आगे चलकर खतरनाक चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है। चक्रवाती तूफानों के नामों की सूची के अनुसार, उत्तरी हिंद महासागर में बनने वाले अगले चक्रवात का नाम 'अर्नब' होगा।
IMD का ताजा अपडेट
IMD ने बुधवार को बताया कि बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे जुड़े उत्तर-पश्चिम हिस्से में बना डीप डिप्रेशन पिछले छह घंटों में 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ा। सुबह 5:30 बजे यह सिस्टम इसी क्षेत्र में केंद्रित था। यह कलिंगपट्टनम से करीब 70 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, गोपालपुर से 150 किलोमीटर दक्षिण, विशाखापत्तनम से 150 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व और पुरी से 230 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम में था।
IMD के मुताबिक, इस मौसम सिस्टम के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की बहुत अधिक संभावना है। यह बुधवार, 23 सितंबर की रात तक विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) और गोपालपुर (ओडिशा) के बीच, कलिंगपट्टनम के पास से उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को डीप डिप्रेशन के रूप में पार कर सकता है।
डीप डिप्रेशन और चक्रवाती तूफान को कैसे पहचाना जाता है?
IMD के अनुसार, मौसम विभाग कम दबाव वाले सिस्टम को उसकी तीव्रता और समुद्र के ऊपर अधिकतम लगातार हवा की गति के आधार पर वर्गीकृत करता है।
- 17 से 27 नॉट (31-50 किमी प्रति घंटे) की हवा की रफ्तार वाले सिस्टम को डिप्रेशन कहा जाता है।
- 28 से 33 नॉट (52-61 किमी प्रति घंटे) की रफ्तार वाले सिस्टम को डीप डिप्रेशन कहा जाता है।
- 34 नॉट (63 किमी प्रति घंटे) या उससे अधिक की रफ्तार वाले सिस्टम को चक्रवाती तूफान कहा जाता है।
इसका मतलब है कि हर लो प्रेशर सिस्टम अपने आप चक्रवात नहीं बनता। चक्रवाती तूफान की श्रेणी में आने के लिए सिस्टम को निर्धारित हवा की गति की सीमा पार करनी होती है।
किन राज्यों पर पड़ेगा असर?
ओडिशा सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हो सकता है। राज्य के कई हिस्सों में पहले से ही भारी बारिश हो रही है। बुधवार रात डीप डिप्रेशन के राज्य से टकराने की आशंका को देखते हुए सरकार ने रणनीतिक स्थानों पर कर्मचारी और मशीनरी तैनात कर दी है। 11 जिलों के कलेक्टरों ने वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया। अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर लोगों को ठहराने के लिए चक्रवात और बाढ़ राहत केंद्र तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए जरूरी सामान और उपकरणों का पर्याप्त भंडार तैयार रखा गया है। स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें भी हाई अलर्ट पर हैं। नदियों, जलाशयों और बांधों में पानी के स्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
ओडिशा में स्कूल बंद
भारी बारिश को देखते हुए ओडिशा के चार जिलों में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला किया गया है। IMD के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में खतरा अधिक है, जहां पहले से लगातार बारिश हो रही है।
- खुर्दा जिले में मंगलवार से गुरुवार तक सभी स्कूल बंद रखने को कहा गया है।
- गंजाम जिले में सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को मंगलवार से गुरुवार तक बंद रखने का आदेश दिया गया है।
- जगतसिंहपुर जिले में मंगलवार को सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला किया गया है।
- गजपति जिले में मंगलवार से गुरुवार तक स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। यह आदेश सरकारी और निजी दोनों संस्थानों पर लागू होगा।
भारी बारिश और खराब मौसम को देखते हुए कुछ सड़कों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। इनमें गंजाम और कंधमाल को जोड़ने वाला कलिंगा घाट भी शामिल है। चिल्का झील में सतपाड़ा और जाह्नीकुड़ा के बीच फेरी सेवा भी 25 सितंबर तक चार दिनों के लिए बंद रहेगी। गजपति, गंजाम और कुछ अन्य जिलों में पेड़ गिरने और सड़कें बंद होने की खबरें भी सामने आई हैं।
आंध्र प्रदेश में भी असर की आशंका
डीप डिप्रेशन का असर तटीय आंध्र प्रदेश पर भी पड़ने की संभावना है। आंध्र प्रदेश सरकार ने संभावित चक्रवाती तूफान के प्रभाव से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। गृह एवं आपदा प्रबंधन मंत्री वंगालापुडी अनिता ने अधिकारियों को 24 घंटे कंट्रोल रूम चालू रखने और मौसम की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लोगों से तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बड़े होर्डिंग्स और जर्जर इमारतों से दूर रहने की अपील की है।
ये भी पढ़ें-