Middle-East में चल रही जंग अब सिर्फ क्रूड ऑयल के ठिकानों और मिलिट्री अड्डों पर हमलों तक सीमित नहीं है। अब संघर्ष में एक नया और पहले से ज्यादा खतरनाक मोर्चा खुलता नजर आ रहा है और वह है पीने के पानी का। दरअसल, हाल ही में ईरान की तरफ से किए गए अटैक में कुवैत के Desalination प्लांट को निशाना बनाया गया है, जो समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाता है। इसके बाद से चर्चा तेज हो गई है कि खाड़ी देशों की कमजोर नस उनका पीने का पानी है। और अगर Desalination प्लांट पर हमले होते हैं तो इससे करोड़ों लोगों को पीने के पानी के बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।
खाड़ी देशों के लिए डिसेलिनेशन प्लांट कितने अहम?
दरअसल, खाड़ी का इलाका दुनिया के शुष्क इलाकों में एक हैं। यहां नदियां कम हैं और बारिश भी सीमित होती है। इसकी वजह से ग्राउंडवाटर के रिसोर्स भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं। ऐसे में समंदर के खारे पानी को Desalination प्लांट के जरिए मीठा बनाकर उसे लोगों तक पहुंचाया जाता है। यही वजह है कि खाड़ी देशों की जनसंख्या, इंडस्ट्री, अस्पताल और होटल का बड़ा हिस्सा Desalination Plants के पानी पर ही निर्भर है।
ईरान से कुवैत तक डिसेलिनेशन प्लांट पर हुए बड़े हमले
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते ईरान और खाड़ी के अन्य देशों में पानी से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर पर कई बार हमले हुए।
| देश |
समय |
प्रभावित डिसेलिनेशन प्लांट या स्थान |
हमले को लेकर दावा |
प्रभाव |
| ईरान |
मार्च, 2026 |
केश्म द्वीप |
डिसेलिनेशन प्लांट पर हमले का दावा लेकिन अमेरिका और इजरायल ने इनकार कर दिया। |
करीब 30 गांवों की वाटर सप्लाई पर असर पड़ा। |
| ईरान |
अप्रैल, 2026 |
असालूयेह, पार्स पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स |
हमले में बिजली और डिसेलिनेशन की सुविधाओं को नुकसान हुआ। |
इंडस्ट्रियल एरिया की वाटर और पावर सप्लाई प्रभावित होने की आशंका। |
| बहरीन |
मार्च, 2026 |
एक प्रमुख डिसेलिनेशन प्लांट |
ईरान के ड्रोन हमले से डिसेलिनेशन प्लांट को क्षति हुई। |
डिसेलिनेशन प्लांट तो हुआ, लेकिन जलापूर्ति चलती रही। |
| कुवैत |
मार्च–अप्रैल 2026 |
दोहा वेस्ट पावर और वाटर डिसेलिनेशन प्लांट सहित दो प्रमुख प्लांट |
मिसाइलों और ड्रोन के मलबे से डिसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचा। |
प्रशासन ने आपातकालीन योजना लागू की, हालांकि जल की आपूर्ति स्थिर रही। |
| कुवैत |
17 जुलाई 2026 |
शुआइबा पावर और वाटर डिसेलिनेशन कॉम्पलेक्स |
ईरानी हमले में कई इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन यूनिट्स को नुकसान हुआ। |
कुवैत के जल और बिजली के ढांचे पर हमले से सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं। |
| UAE |
मार्च 2026 |
फुजैराह F1 Plant और दुबई का जेबेल अली डिसेलिनेशन प्लांट |
ड्रोन से संवेदनशील वाटर प्लांट्स के पास हमले की रिपोर्ट। |
जल के बुनियादी ढांचे को लेकर तनाव बढ़ा। |
खाड़ी के किस देश में कितने हैं डिसेलिनेशन प्लांट?
| देश का नाम |
डिसेलिनेशन प्लांट की संख्या |
प्रमुख डिसेलिनेशन प्लांट |
| ईरान |
करीब 75 |
होर्मोजगान, सिस्तान-बलूचिस्तान, बुशेहर और खुजेस्तान |
| UAE |
लगभग 70 |
जेबेल अली, तवीलाह, फुजैराह F1-F2, शुवेहात |
| कुवैत |
8 प्रमुख प्लांट |
दोहा ईस्ट, दोहा वेस्ट, शुआइबा, शुवैख, अल-जौर, सुबिया |
| बहरीन |
5-6 प्रमुख प्लांट |
अल-दुर 1, अल-दुर 2, अल-हिद्द, रस अबू जरजूर, सितरा |
डिसेलिनेशन प्लांट पर किस देश की कितनी है निर्भरता?
Arab Center Washington DC में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी देशों का पीने के पानी का इंतजाम करीब-करीब Desalination पर बेस्ड है।
| देश |
पेयजल में Desalination की हिस्सेदारी |
हालात |
| बहरीन |
90–99% |
लगभग पूरा पीने का पानी Desalination Plants से मिलता है। |
| कुवैत |
90–99% |
पीने के पानी के लिए करीब-करीब पूरी तरह Desalination पर निर्भर हैं। |
| कतर |
90–99% |
मीठे पानी का मुख्य स्रोत Desalination से निकला पानी ही है। |
| ओमान |
86% |
पीने के पानी का ज्यादा भाग Desalination से आता है। |
| सऊदी अरब |
70% |
पीने के पानी का बड़ा हिस्सा Desalination Plants से मिलता है। |
| UAE |
42% |
अधिकांश शहरी जल नेटवर्क Desalination Plants पर ही निर्भर है। |
सोर्स- Arab Center Washington DC
हालांकि, ईरान के हालात इन देशों से जुदा हैं। ईरान के पास नदियां, बांध और ग्राउंडवाटर के रिसोर्स मौजूद हैं, इसलिए नेशनल लेवल पर उसकी निर्भरता बाकी खाड़ी देशों के मुकाबले कम है। हालांकि, ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों और द्वीपों में Desalination Plant ही पीने के पानी का मुख्य स्रोत हैं।
डिसेलिनेशन प्लांट पर हमले होना इतना बड़ा खतरा क्यों?
अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने साल 2010 की अपनी एक रिपोर्ट में वॉर्निंग दी थी कि अगर खाड़ी देशों के प्रमुख Desalination Plant लंबे वक्त के लिए बंद हो जाएं तो इससे कई देशों में नेशनल इमरजेंसी जैसे हालात बन सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी देशों के 90 फीसदी से ज्यादा Desalinated Water का प्रोडक्शन सिर्फ 56 बड़े प्लांट्स से होता है। यानी अगर खाड़ी के देशों में Desalinated Water के प्लांट्स पर हमले बढ़े, तो इसका प्रभाव करोड़ों लोगों पर पड़ेगा और उन्हें पानी के बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे में सवाल है कि क्या पश्चिम एशिया का युद्ध भी रूस-यूक्रेन की तरह लंबा खिंचने वाला है, जो सालों साल तक चल सकता है। इससे पूरी दुनिया की इकोनॉमी पर असर पड़ सकता है। लोगों को खाने और पानी के संकट का सामना करना पड़ सकता है।
(इनपुट- AP)
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