Explainer: कभी गरम तो कभी नरम दिखे हैं ट्रंप के तेवर, जानिए रूस पर भड़के तो अब चीन पर क्यों डाल रहे डोरे
डोनाल्ड ट्रंप को समझना किसी पहेली से कम नहीं है। कभी पुतिन की तारीफ करते हैं, तो कभी रूस को खतरा बता देते हैं। कभी चीन पर टैरिफ लगाते हैं तो कभी बीजिंग से डील की बात कहते हैं। ऐसे क्यों है चलिए समझते हैं।

Donald Trump Attitude: अमेरिका की राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप का अंदाज इस समय पूरी दुनिया के लिए पहली बना हुआ है। कभी नरमी, कभी तल्खी, कभी धमकी तो कभी मुस्कान के साथ सौदेबाजी, ट्रंप की यही पहचान बन गई है। मौजूदा सनय ट्रंप की विदेश नीति को समझना किसी के लिए आसान नहीं रहा है। ट्रंप जिस रफ्तार से दुश्मन बनाते हैं, उसी तेजी से दोस्ती के गीत भी गुनगुनाते हैं। आज जब रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को दो धड़ों में बांट दिया है और चीन का बढ़ता प्रभाव पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, ऐसे में ट्रंप का बदलता रुख एक बार फिर सुर्खियों में है। चलिए ऐसे में नजर डालते हैं कि रूस पर भड़के हुए ट्रंप अब चीन को लेकर नरम क्यों पड़ते दिख रहे हैं।
हवा में उड़ गए ट्रंप के दावे
डोनाल्ड ट्रंप का रूस के साथ रिश्ता हमेशा विवादों में रहा है। एक समय तो ट्रंप पर रूस समर्थक होने तक के आरोप लगाए गए थे। चुनावों में रूसी हस्तक्षेप की बात भी सामने आई है और ट्रंप ने खुद प्रचार अभियानें को दौरान दावे किए थे कि रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करवाना उनके लिए बेहद आसान रहने वाला है। अब चुनाव के बाद ट्रंप राष्ट्रपति हैं लेकिन रूस और यूक्रेन की जंग लगातार जारी है। ऐसे यह तो साफ है कि ट्रंप के दावे हवा में उड़ गए हैं और जमीनी हकीकत कुछ अलग ही है।
रूस पर ट्रंप का बदलता रवैया
रूस और यूक्रेन की जंग के चलते ही ट्रंप पुतिन पर कभी नरम तो कभी गरम नजर आते हैं। कभी यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलें देने की बात कहते हैं, कभी रूस पर प्रतिबंध लगाने की बात कहते हैं तो पुतिन से अलास्का में मुलाकत करने चले जाते हैं। 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तब ट्रंप ने पुतिन की रणनीतिक समझ को जमकर सराहा था लेकिन बाद में रूस की आक्रामक नीति को पागलपन तक बता दिया। अब, 2025 की राजनीति में ट्रंप का लहजा और भी सख्त हो गया है। ट्रंप अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी यूरोप के साथ मिलकर रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे जंग को खत्म किया जा सके।
क्यों बदला ट्रंप का अंदाज?
डोनाल्ड ट्रंप क अंदाज क्यों बदला इसके पीछे कई कारण हैं। जिसमें राजनीतिक दबाव सबसे पहले आता है। राजनीतिक दबाव का मतलब यह है कि अमेरिकी जनमत अब रूस के खिलाफ है। जनता यूक्रेन के प्रति सहानुभूति रखती है। ट्रंप इस बात को बखूबी समझते भी हैं। इतना ही नहीं ट्रंप अब तक कई जंगों को खत्म करवाने के दावे कर चुके हैं लेकिन रूस और यूक्रेन की जंग में वो पूरी तरह फेल साबित हुए हैं। ऐसे में अगर जंग जारी रही तो आने वाले दिनों में ट्रंप के सामने सियासी संकट से निपटना आसान नहीं होगा।
चीन पर मेहरबान ट्रंप
ट्रंप और रूस के रिश्तों से इतर अब चलिए नजर आमेरिका और शी जिनपिंग के संबंधों पर डालते हैं। ट्रंप और चीन का रिश्ता हमेशा ट्रेड वॉर के नाम से याद किया जाएगा। ट्रंप चीन को अमेरिका का आर्थिक दुश्मन तक कह चुके हैं। लोकिन, हाल के महीनों में ट्रंप के तेवर चीन को लेकर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने एक तरफ जहां टैरिफ लगाया हो तो वहीं दूसरी तरफ कहा है कि चीन से टकराने की बजाय समझदारी से सौदे करने चाहिए। अगर हम व्यापार में जीत जाए, तो बाकी सब अपने आप सुलझ जाएगा। यह बयान ट्रंप के नारे “Make America Great Again” के विपरीत है। तो ऐसे में सवाल यह है कि ट्रंप चीन पर मेहरबान क्यों नजर आ रहे हैं। चलिए इसे भी समझते हैं।
अमेरिका को है चीन की जरूरत
चीन दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है। अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां चीन पर निर्भर हैं। ट्रंप यह समझते हैं कि अगर वो टैरिफ वॉर में उलझे रहे तो अमेरिकी में महंगाई बढ़ेगी और लोगों की नाराजगी भी देखने को मिलेगी। इतना ही नहीं ट्रंप की नई रणनीति “डिवाइड एंड डील” पर आधारित है। वो रूस और चीन को एक साथ मजबूत होते नहीं देखना चाहते हैं। ऐसे में ट्रंप का मानना है कि अगर चीन के साथ उनकी डील होती है तो रूस इससे जरूर प्रभावित होगा।
यूक्रेन जंग पर ट्रंप के बदलते तेवर
यूक्रेन युद्ध को लेकर ट्रंप के बयान विरोधाभासी रहे हैं। कभी वो कहते हैं, “मैं 24 घंटे में यह युद्ध खत्म कर दूंगा,” तो कभी यूक्रेन को मिल रही अमेरिकी मदद पर सवाल उठाते हैं। उनका मानना है कि अमेरिका को “दूसरों के युद्धों में झोंकने” की बजाय अपनी सीमाओं की रक्षा पर ध्यान देना चाहिए। हाल ही में उन्होंने कहा था “अमेरिका को यूक्रेन में पैसा फेंकने से पहले यह देखना चाहिए कि उसे क्या फायदा मिल रहा है।” ट्रंप की यह सोच अमेरिकी आम जनता को लुभाती है, जो महंगाई और टैक्स के बोझ से परेशान है। पर इससे यह भी संकेत मिलता है कि ट्रंप का रुख पूरी तरह यूक्रेन समर्थक नहीं है। वो इसे एक “डीलिंग कार्ड” की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि रूस या यूरोप से कुछ हासिल किया जा सके।
ट्रंप का पावर गेम
डोनाल्ड ट्रंप सुर्खियों में हैं। रूस पर सख्ती, चीन पर नरमी,और दुनिया के सामने “अमेरिका फर्स्ट” की पुरानी धुन। लेकिन असलियत यह है कि ट्रंप की नीति किसी स्थिर सिद्धांत पर नहीं, बल्कि परिस्थितियों पर आधारित है। ट्रंप हर मुद्दे को “बिजनेस डील” की तरह देखते हैं फिर चाहे वह युद्ध हो, टैरिफ या कूटनीति। ट्रंप की यही “कभी गरम, कभी नरम” शैली ही उन्हें अमेरिकी राजनीति का सबसे चर्चित और विवादित चेहरा बनाती है।
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