सीरिया को आतंकवादी देशों की लिस्ट से हटाने जा रहे ट्रंप, जिसे कल तक मानते थे आतंकी मुल्क, आज उस पर क्यों बरसा रहे प्यार? समझें पूरा माजरा
जिस सीरिया को कल तक अमेरिका लिखा-पढ़ी में आतंकवाद प्रायोजक देश मानता था, आज उसके ऊपर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, आतंकी होने का दाग हटाने जा रहे हैं। समझिए इसके पीछे का लेबनान कनेक्शन क्या है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक देशों यानी State Sponsor of Terrorism की लिस्ट से हटाने का मन बना लिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि ट्रंप ने इसको लेकर अमेरिकी कांग्रेस को औपचारिक तौर पर सूचित कर दिया है। मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह कदम सीरिया के लिए आर्थिक पुनर्निर्माण और नए मौकों का मार्ग खोलेगा। इससे सीरिया के लोगों को बेहतर भविष्य के अवसर मिलेंगे।
आतंकवाद देशों की लिस्ट से सीरिया को हटाने के पक्ष में हैं ट्रंप
यह घोषणा उस वक्त हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की की राजधानी अंकारा में हुई NATO समिट 2026 के दौरान सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मीटिंग की। ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वह सीरिया को State Sponsor of Terrorism की लिस्ट से हटाने के पक्ष में हैं।
सीरिया ने बहुत अच्छा काम किया है, मुझे लगता है मुझे सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक देशों की लिस्ट से निकालना चाहिए: डोनाल्ड ट्रंप
47 साल से आतंकवाद प्रायोजक देशों की लिस्ट में है सीरिया
गौरतलब है कि सीरिया, दिसंबर 1979 से अमेरिका के विदेश विभाग की State Sponsor of Terrorism की लिस्ट में शामिल है। हालांकि, दिसंबर 2024 में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार के गिरने के बाद से अमेरिका के दोनों प्रमुख सियासी दलों रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के कई सांसद इस दर्जे को खत्म करने की डिमांड कर चुके हैं।
अमेरिका-सीरिया के संबंधों को सामान्य बनाने का हो रहा प्रयास
ट्रंप प्रशासन की तरफ से यह कदम अमेरिका और सीरिया के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। पिछले साल, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने हयात तहरीर अल-शाम यानी HTS, जिसे अल-नुसरा फ्रंट भी कहते हैं, को विदेशी आतंकवादी संगठन की लिस्ट से भी हटा दिया था। बशर अल-असद सरकार को गिराने वाले विद्रोह का नेतृत्व इसी संगठन ने किया था। अल-नुसरा फ्रंट का नेतृत्व अहमद अल-शरा ही कर रहे थे।
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लेबनान से इजरायली सेना की वापसी चाहते हैं ट्रंप
NATO समिट में अहमद अल-शरा से मुलाकात के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें आशा है कि इजरायल, साउथ लेबनान से अपनी आर्मी वापस बुला लेगा। ट्रंप ने कहा, 'मुझे लगता है कि इजरायल ऐसा करेगा। इजरायल ऐसा करना चाहता है।' हालांकि, ट्रंप ने इसके लिए कोई समयसीमा नहीं बताई।
सीरिया के जरिए लेबनान का मसला सुलझवाने की कवायद
इससे पहले फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान, पिछले महीने कतर के अमीर के साथ वार्ता में भी डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े मसले को सुलझाने में सीरिया और उसके राष्ट्रपति अहमद अल-शरा अहम रोल निभा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर इजरायल बिना लोगों को मारे यह काम नहीं कर सकता, तो अहमद अल-शरा और सीरिया यह जिम्मेदारी निभा सकते हैं।
अहमद अल-शरा कौन हैं?
जान लें कि अहमद अल-शरा, दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सरकार को गिराने के बाद सीरिया की सत्ता में आए हैं। अहमद अल-शरा, अबू मोहम्मद अल-जुलानी के नाम से भी मशहूर हैं। अहमद अल-शरा पहले विश्व के सबसे ज्यादा वांटेड लोगों में से एक थे। सीरिया में अल-कायदा से संबंधित चरमपंथी गुटों को लीड करने की वजह से अहमद अल-शरा के सिर पर अमेरिका ने 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 95 करोड़ 49 लाख 85 हजार रुपये का इनाम रखा था। हालांकि, 2024 के आखिर में, अमेरिका ने राजनयिक बैठकों के बाद इनाम की इस घोषणा को आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया था।
