ERONET और ECINET क्या हैं? क्या कोई सॉफ्टवेयर Voter List से आपका नाम हटा सकता है
भारत निर्वाचन आयोग वोटर लिस्ट बनाने के लिए डिजिटल और तकनीकी प्लेटफॉर्म ERONET और ECINET का प्रयोग करता है, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रियाओं का प्रबंधन करते हैं। क्या सॉफ्टवेयर आपका नाम वोटर लिस्ट से हटा सकते हैं?

Highlights
- चुनाव आयोग पर क्यों लग रहे आरोप
- वोटर लिस्ट से कोई हटा सकता है आपका नाम
- ERONET और ECINET क्या हैं?
चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप लगते रहे हैं और साथ ही ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर भी विवाद होता रहता है। वोट चोरी, यानी वोटर के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का आरोप लगाने वाली विपक्षी पार्टियां विशेष गहन संशोधन (SIR) को जिम्मेदार मानती हैं। वोट चोरी या वोटर का नाम हटाने के आरोप को चुनाव आयोग बार बार खारिज करता रहता है। चुनाव आयोग का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से किसी भी वोटर को वोटर लिस्ट से हटाया नहीं जा सकता। पोर्टल और ऐप्स केवल आवेदन दाखिल करने की अनुमति देते हैं, जिनकी फिर जांच की जाती है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता को नोटिस जारी किए बिना और उसे अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना कोई भी वोट नहीं हटाया जा सकता।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने के नियम
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में मतदाता सूची से अपना नाम हटवाने की प्रक्रिया का ढांचा निर्धारित किया गया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य दुरुपयोग को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को भी बिना सूचना दिए या विरोध करने का मौका दिए बिना अपना वोट न खोना पड़े।
वोटर लिस्ट में नाम हटाने की प्रक्रिया क्या है
यदि कोई मतदाता अपना नाम मतदाता सूची से हटवाना चाहता है या मतदाता सूची में दर्ज किसी प्रविष्टि पर आपत्ति करता है, तो उसे प्रपत्र 7 को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को जमा करना होगा। यदि मतदाता किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं, तो वे स्वयं भी इस प्रपत्र का उपयोग करते हैं। इसमें निर्वाचन क्षेत्र का नाम, मतदाता का ईपीआईसी नंबर (EPIC Number) नाम हटवाने का कारण और आवेदक का विवरण और हस्ताक्षर जैसी महत्वपूर्ण जानकारी आवश्यक होती है। जमा करने के बाद, स्थानीय बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) इसकी पावती जारी करता है।
जान लें खास बातें
- मतदाता का स्थायी रूप से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो जाना, पंजीकृत पते पर न मिलना, दो बार नाम दर्ज होना, मृत्यु हो जाना, या भारतीय नागरिक न होना। मनमाने या राजनीतिक आधार पर नाम हटाने की मांग नहीं की जा सकती।
- प्रत्येक आवेदन को आधिकारिक अभिलेखों में दर्ज किया जाता है। यदि कोई प्रपत्र अधूरा या दोषपूर्ण है, तो उसे प्रारंभिक चरण में ही अस्वीकार किया जा सकता है।
- यदि किसी मतदाता का नाम हटाने का प्रस्ताव है, तो मतदाता मूल्यांकन अधिकारी (ERO) को मतदाता को एक सूचना देनी होगी, जिसमें सुनवाई की तिथि, समय और स्थान निर्दिष्ट हो। यह सूचना व्यक्तिगत रूप से, पंजीकृत डाक द्वारा या मतदाता के निवास स्थान पर चिपकाकर दी जा सकती है।
- एक मतदाता निरीक्षण अधिकारी संबंधित पते पर जाकर यह जांच करता है कि मतदाता अभी भी वहां रह रहा है, उसकी मृत्यु हो गई है, या फिर पंजीकरण दोहराया गया है। प्राप्त जानकारी की रिपोर्ट मतदाता निरीक्षण अधिकारी को भेजी जाती है।
- नाम हटाने की मांग करने वाले आवेदक और जिस मतदाता के नाम पर सवाल उठाया जा रहा है, दोनों को सुनवाई का अधिकार है। निर्णय लेने से पहले, मतदाता नियंत्रण अधिकारी (ईआरओ) दस्तावेज़ मांग सकता है, व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य कर सकता है और शपथ के तहत बयान भी दर्ज कर सकता है।
- साक्ष्यों पर विचार करने के बाद, ईआरओ या तो आवेदन को अस्वीकार करता है या नाम हटाने की स्वीकृति देता है। स्वीकृति मिलने पर, नाम सूची से हटा दिया जाता है और अगली अद्यतन सूची में दर्ज हो जाता है।
- यदि किसी मतदाता को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटा दिया गया है, तो वह मतदाता सूची अधिकारी (ERO) के आदेश को चुनौती दे सकता है। वह निवास और पहचान प्रमाण के साथ प्रपत्र 6 भरकर अपना नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए आवेदन भी कर सकता है।
- प्रपत्र 7 में झूठी घोषणा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत दंडनीय है।
क्या कोई आपका नाम वोटर लिस्ट से हटा सकता है?
कानूनी तौर पर, एक ही निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी मतदाता किसी अन्य मतदाता के नाम पर आपत्ति जताने के लिए फॉर्म 7 दाखिल कर सकता है। लेकिन इससे वोट स्वतः रद्द नहीं हो जाता। ईआरओ को कोई भी आदेश पारित करने से पहले नोटिस जारी करना, सत्यापन करना और सुनवाई करना अनिवार्य है। इन चरणों के बिना किसी भी प्रकार का विलोपन गैरकानूनी है। झूठा आवेदन दाखिल करना दंडनीय अपराध है।
क्या किसी सॉफ्टवेयर के जरिए वोटों को रद्द किया जा सकता है?
- ऑनलाइन पोर्टल केवल आवेदन स्वीकार करते हैं; वे स्वयं नाम नहीं हटा सकते।
- प्रत्येक मामले में अभी भी सत्यापन और सुनवाई की आवश्यकता है।
- यहां तक कि थोक हेरफेर के संदिग्ध मामलों में भी, ईआरओ को उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
- यदि सॉफ्टवेयर-आधारित प्रतिरूपण का प्रयास किया जाता है, तो यह धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के बराबर होगा, लेकिन यह स्वयं कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार नहीं करेगा।
- सॉफ्टवेयर सिस्टम को एप्लिकेशनों से भर सकता है; लेकिन यह अपने आप रिकॉर्ड से नामों को मिटा नहीं सकता।
- भारत में मतदाता का नाम हटाना एक क्लिक का काम नहीं है। चाहे पड़ोसी द्वारा आवेदन किया गया हो या ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से, कानून के अनुसार नाम हटाने से पहले जांच-पड़ताल, सूचना, प्रत्यक्ष सत्यापन और सुनवाई आवश्यक है।
- फर्जी आवेदन दाखिल किए जा सकते हैं, लेकिन इनसे मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जा सकता।
- उचित प्रक्रिया को दरकिनार करने का कोई भी प्रयास गैरकानूनी और दंडनीय है।
क्या है ERONET
एसआईआर के दौरान इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स नेटवर्क (ERONET) और इसका मुख्य यूनिफाइड प्लेटफ़ॉर्म (ECINET) भारत की वोटर लिस्ट को मैनेज करने वाला टेक्निकल ढांचा बनाते हैं।
ERONET
इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स नेटवर्क (ERONET) एक केंद्रीकृत वेब-आधारित प्रणाली है जिसे विशेष रूप से मतदाता सूची (Electoral Roll) के प्रबंधन के लिए बनाया गया था। इसके जरिए मतदाताओं के नए नाम जोड़ने, पते या विवरण में सुधार करने और नाम हटाने (Deletion) की प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से संचालित किया जाता है। इसने देश भर के विभिन्न राज्यों की अलग-अलग 36 प्रणालियों को एक समान डिजिटल ढांचे में बदलने का काम किया।
ECINET
ECINET एक व्यापक और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसमें ERONET के मतदाता सूची से जुड़े कार्यों सहित चुनाव आयोग की 40 से अधिक अन्य सेवाओं और पोर्टलों को एक ही छत के नीचे मिला दिया गया है। यह मतदाताओं, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए एक साझा मंच है। इसके माध्यम से मतदाता पंजीकरण, आवेदन ट्रैक करना, ई-एपिक (e-EPIC) डाउनलोड करना और चुनावी आंकड़े देखना जैसी सेवाएं मिलती हैं
ERONET और ECINET कैसे काम करते हैं
सॉफ्टवेयर की परफॉर्मेंस को लेकर सार्वजनिक चर्चाओं के बावजूद, न तो ERONET और न ही ECINET के पास खुद से किसी वोटर को जोड़ने या हटाने का कानूनी अधिकार है। यह सॉफ्टवेयर मुख्य रूप से एक 'डिसीजन-सपोर्ट सिस्टम' के तौर पर काम करता है, जो संभावित डुप्लिकेट एंट्री या डेटा में कमी की पहचान करके फील्ड स्टाफ के लिए कार्रवाई की व्यवस्थित लिस्ट तैयार करता है।
किसी गड़बड़ी की पहचान होने पर, ज़मीनी स्तर पर फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) शुरू किया जाता है। बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर परिवारों से सीधे दस्तावेज़ों का सत्यापन करते हैं। 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट' की धारा 15 के तहत, वोटर रजिस्टर में बदलाव का कोई भी औपचारिक आदेश जारी करने से पहले, स्थानीय इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (Electoral Registration Officers) स्वतंत्र रूप से फील्ड रिपोर्ट की जांच करते हैं और उनके पास ही अंतिम कानूनी अधिकार होता है।
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