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Explainer: नोएडा में कैसे भड़की हिंसा? वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी से लेकर CM योगी के बयान तक, जानें सब कुछ

नोएडा में सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर जमकर बवाल काटा और आगजनी-पत्थरबाजी की। इसके बाद हालात को काबू में करने के लिए भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई।

Noida- India TV Hindi
Image Source : PTI नोएडा में भड़की हिंसा

नोएडा: दिल्ली से सटे नोएडा में सोमवार का दिन बेहद भारी बीता। यहां प्रदर्शनकारी श्रमिक सड़कों पर उतर आए और देखते ही देखते प्रदर्शन ने हिंसा का रूप अख्तियार कर लिया। हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों का पुलिस के साथ टकराव हुआ और वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने जगह-जगह आगजनी और पथराव भी किया। 

150 से ज्यादा गाड़ियों में तोड़फोड़ और 4 दर्जन से ज्यादा फूंक दीं

मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने अलग-अलग इलाकों में 50 से ज्यादा फैक्ट्रियों में पथराव किया। 150 से ज्यादा गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और 4 दर्जन से ज्यादा वाहन फूंक दिए गए।

इसके बाद भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। प्रदर्शन की वजह से नोएडा की जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा। नोएडा में कई जगहों पर रोड ब्लॉक किए गए और कई जगह रूट को डायवर्ट भी किया गया। 

नोएडा में झगड़ा फैक्ट्री मालिकों और मजदूरों के बीच का था। मसला सैलरी और ओवर टाइम का था लेकिन कर्मचारियों के हिंसक प्रदर्शन से आम लोगों को जबरदस्त मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जाम के कारण ऑफिस जाने वाले लोग कई कई घंटे तक फंसे रहे। नोएडा फेस टू में तो एक ऐसा परिवार जाम में फंसा, जिसके परिवार में किसी की मौत हुई थी लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इस परिवार की गाड़ी को भी रोक लिया।

Image Source : PTIप्रदर्शनकारियों ने फूंके वाहन

क्या थी प्रदर्शन की वजह; कैसे फैला?

दरअसल नोएडा का फेज-2 इलाका इंडस्ट्रियल एरिया है। यहां मदरसन, ऋचा ग्लोबल, रेनबो, पैरामाउंट, एसएनडी और अनुभव कंपनियों के 1000 से ज्यादा कर्मचारी सैलरी बढ़ाने को लेकर पिछले 3 दिन से प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन करने वाले ज्यादातर श्रमिकों की सैलरी करीब 10 से लेकर 13 हजार रुपये महीना है।

इनका कहना है कि इतने कम पैसे में अपना पेट भरना और घर चलाना मुश्किल है। करीब 500 कर्मचारी मदरसन कंपनी के बाहर जुटे थे। सबसे पहले यहीं हिंसा हुई। श्रमिकों का कहना है कि पुलिस ने लाठी चार्ज किया जिसकी वजह से हिंसा भड़की। सुनवाई न होने से यहां कर्मचारी उग्र हो गए और पथराव कर दिया। कई गाड़ियों और बसों को आग लगा दी। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उनकी गाड़ी पलट दी। हालात बिगड़े तो कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची।

कर्मचारियों ने उन पर पथराव कर दिया। फिर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। फेज 2 के बाद धीरे धीरे प्रदर्शन नोएडा के करीब 10 इंडस्ट्रियल इलाकों और आसपास के जिलों में फैल गया। सेक्टर 85 में डिक्सन कंपनी का गेट तोड़ दिया गया। नोएडा सेक्टर 63 में मारुति नेक्सा शोरूम में सर्विस के लिए आई गाड़ियों में आगजनी की गई। प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने नोएडा सेक्टर 63 थाने को घेराव किया और जमकर पत्थरबाजी की।

कर्मचारियों ने नोएडा सेक्टर 57 में 30 से ज्यादा फैक्ट्रियों और दफ्तरों में तोड़फोड़ की। सेक्टर 40 और 60 में कंपनियों का घेराव किया। हालात को काबू करने के लिए पुलिस के साथ-साथ PAC को तैनात किया गया। इंडस्ट्रियल इलाके में कंपनियों के बाहर भारी फोर्स तैनात है।

Image Source : PTIप्रदर्शनकारियों को खदेड़ती पुलिस

4 दिन से चल रहा था प्रदर्शन, सोमवार को हुआ हिंसक

मजदूरों की ये मांगे नई नहीं हैं। पिछले चार दिन से प्रोटेस्ट चल रहा था। प्रशासन मजदूरों से बात कर रहा था। नोएडा की डीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी थी। मजदूरों की कई मांगें भी मान ली गई थीं। कंपनियों से कहा गया था कि 11 अप्रैल से मजदूरों को ओवरटाइम करने पर डबल भुगतान देना होगा। कंपनियां इसके लिए तैयार थीं लेकिन आज अचानक प्रदर्शनकारियों ने हिंसा शुरू कर दी। 

इसी दौरान ये अफवाह फैला दी गई कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी है। इससे प्रोटेस्टर्स और भड़क गए। अब नोएडा पुलिस सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाह फैलाने वाले अकाउंट पर एक्शन ले रही है। अब तक दो एक्स हैंडल्स पर अफवाह फैलाने के आरोप में FIR दर्ज की गई है, जबकि 50 से अधिक ऐसे बॉट हैंडल चिन्हित किए गए हैं, जो पिछले 24 घंटों में क्रिएट किए गए और इनके जरिए नोएडा में मजदूरों को भड़काने वाली अफवाहें फैलाई गईं।

CM योगी ने प्रशासन से रिपोर्ट मांगी, कही ये बात

नोएडा में मजदूरों के प्रोटेस्ट पर योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन से डिटेल रिपोर्ट मांगी है। हिंसा की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनाई है और मजदूरों के साथ बात करने और उनकी मांगों पर सहानुभूति के साथ विचार करने को कहा है। जिस वक्त नोएडा में हिंसा हुई, उस वक्त योगी पश्चिम उत्तर प्रदेश में ही थे। उन्होंने कहा कि सरकार श्रमिकों के साथ है लेकिन कुछ लोग साजिश के तहत प्रदेश के माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा।

विपक्ष ने क्या कहा?

नोएडा में मजदूरों के प्रोटेस्ट से विपक्ष ने योगी पर हमला किया। सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी गरीब विरोधी है। बीजेपी ने नोएडा को कुछ उद्योगपतियों के हवाले कर दिया। जो मजदूरों का खून चूस रहे हैं इसीलिए ऐसे हालात बने हैं।

CM योगी के निर्देश के बाद हाई लेवल कमेटी का गठन

सीएम योगी के निर्देश के बाद श्रमिकों के हित में श्रम विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए हाई लेवल कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी के अध्यक्ष औद्योगिक विकास आयुक्त होंगे। सभी पक्षों से बातचीत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर है।

300 लोगों को हिरासत में लिया गया

सूत्रों के हवाले से खबर है कि 300 लोगों को प्रीवेंटिव अरेस्ट कर न्यायिक हिरासत में भेज में दिया गया है। ये प्रदर्शन में शामिल हैं। जिन्होंने माहौल खराब करने की कोशिश की, ऐसे कुछ व्हाट्सएप ग्रुप की जांच साइबर टीम कर रही है। 

बीजेपी सरकार में मंत्री नंद गोपाल नंदी का सामने आया बयान

नंद गोपाल नंदी ने कहा, "जनपद गौतमबुद्ध नगर में औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन को हमारी सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल गठित किया गया है। माननीय प्रधानमंत्री के बहुमूल्य मार्गदर्शन में एवं माननीय मुख्यमंत्री के यशस्वी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का औद्योगिक परिवेश एक आदर्श के रूप में स्थापित हुआ है। सरकार के निरंतर प्रयासों एवं सटीक निर्णयों का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश को भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में एक नई पहचान मिली है । औद्योगिक विकास की इस उल्लेखनीय यात्रा में सभी स्टेक होल्डर्स का सकारात्मक योगदान एवं प्रभावी भूमिका है। निवेशक के हितों के साथ ही औद्योगिक श्रमिकों एवं कामगारों का हित भी हमारी सरकार की प्राथमिकता है। जनपद गौतमबुद्ध नगर की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर है।"

उन्होंने कहा, "समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के अराजक और गुंडा तत्व समय– समय पर ऐसे प्रदर्शनों की आड़ लेकर प्रदेश की शांति व्यवस्था बाधित करने का षड्यंत्र करते रहे हैं। प्रथमदृष्ट्या इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि अफवाह के माध्यम से श्रमिकों को उकसाने में उनकी संदिग्ध भूमिका है। सरकार द्वारा गठित समिति श्रमिक संगठन के प्रतिनिधियों, उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों एवं समस्त स्टेक होल्डर्स के साथ वार्ता कर रही है। सभी बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा एवं सम्यक विचारोपरान्त प्रकरण का यथोचित समाधान यथाशीघ्र निकाल लिया जाएगा। उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में हमने 9 साल लगाए हैं। इसी का परिणाम है कि आज देश-विदेश की शीर्ष कंपनियां उत्तर प्रदेश में निवेश कर रही हैं। उत्तर प्रदेश इन्वेस्टमेंट के माध्यम से वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसी भी असामाजिक तत्व द्वारा इस पहचान और परिवेश को चुनौती देने पर ऐसी कार्यवाही होगी की उसकी सात पीढ़ियों तक लोग अपराध का नाम सुनकर कापेंगे।मैं सभी पक्षों से संयम और धैर्य बरतने को अपील करता हूं।"