भारत की आर्थिक नीतियों में एक बड़ा सवाल हमेशा बना रहता है- ब्याज दरें कब और क्यों बढ़ती या घटती हैं? आम आदमी की मासिक किस्त (ईएमआई) से लेकर उद्योगों की पूंजी लागत तक, सब कुछ इससे प्रभावित होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन ब्याज दरों का फैसला कौन करता है? और कैसे तय होती है देश की मौद्रिक नीति? इस Explainer में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (मोनेटरी पॉलिसी कमिटी यानी एमपीसी) कैसे काम करती है, इसमें कौन-कौन शामिल होते हैं, और यह समिति देश की अर्थव्यवस्था को दिशा देने वाले सबसे अहम फैसले कैसे लेती है।
मौद्रिक नीति समिति की भूमिका
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) भारत में मौद्रिक नीति तय करने वाली एक स्वतंत्र और बेहद महत्वपूर्ण संस्था है। इस समिति का मुख्य मकसद देश में महंगाई को कंट्रोल में {4% (±2%) के दायरे में} रखना और आर्थिक वृद्धि यानी विकास दर को संतुलित बनाए रखना होता है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक हर दो महीने में एक बार होती है। हालांकि, विशेष परिस्थिति में यह ज्यादा बार भी हो सकती है। इमरजेंसी बैठक भी बुलाई जा सकती है।
MPC ब्याज दर पर फैसला कैसे लेती है?
मौद्रिक नीति समिति में कुल छह सदस्य होते हैं। इनमें तीन भारतीय रिजर्व बैंक से होते हैं और बाकी तीन बाहरी सदस्य होते हैं। मौजूदा समय में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति में फिलहाल छह सदस्यों में से आरबीआई के तीन सदस्य- संजय मल्होत्रा (गवर्नर), पूनम गुप्ता (डिप्टी गवर्नर), राजीव रंजन (कार्यकारी निदेशक) शामिल हैं, जबकि तीन बाहरी सदस्यों में नागेश कुमार (डायरेक्टर, ISID), सौगता भट्टाचार्य (अर्थशास्त्री) और राम सिंह (डायरेक्टर, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स) अपनी भूमिका निभा रहे हैं। बता दें, मौद्रिक नीति समिति का नेतृत्व भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर करते हैं। जब बैठक में ब्याज दर पर फैसला लेने की बारी आती है तो प्रत्येक सदस्य के पास एक वोट होता है और उन्हें वोटिंग करनी होती है। ब्याज दर में बदलाव का बहुमत से फैसला लिया जाता है (4 या उससे अधिक वोट से)। अगर वोट बराबर हो जाएं, तो गवर्नर का वोट निर्णायक माना जाता है। एमपीसी हर बैठक के बाद मौद्रिक नीति स्टेटमेंट जारी करती है, जिसमें ब्याज दरों में बदलाव (या यथास्थिति), महंगाई पर नजरिया और अर्थव्यवस्था की स्थिति का विश्लेषण होता है।
एमपीसी बैठक में क्या विश्लेषण करती है?
मौद्रिक नीति समिति के सभी छह सदस्य ब्याज दर में बदलाव से पहले महंगाई दर (सीपीआई), विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें, वित्तीय घाटा, ग्लोबल इकॉनमिक ट्रेंड्स और रुपये की स्थिति और विदेशी निवेश पर काफी गहन चर्चा करते हैं और फिर समिति किसी नतीजे पर पहुंचती है। मौद्रिक समीक्षा समिति, रेपो रेट (आरबीआई जिस दर पर बैंकों को कर्ज देता है), रिवर्स रेपो रेट (बैंकों से जमा पर आरबीआई जो ब्याज देता है), सीआरआर और एसएलआर और वैधानिक तरलता अनुपात और लिक्विडिटी एडजस्टमेंट पर फैसले लेती है।