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Explainer: सोने ने कैसे 609 अरब डॉलर के आयात को 1.9 खरब डॉलर के खजाने में कर दिया तब्दील

साल 2011 से 2025 के बीच ऐसा कोई साल नहीं रहा, जिसमें सोने की कीमत कम से कम दोगुनी न हुई हो। यह आंकड़े दिखाते हैं कि सोना लंबे समय में कितना मजबूत और भरोसेमंद निवेश साबित हुआ है।

सोने ने बीते वर्षों में निवेश के तौर पर शानदार रिटर्न देकर सभी को चौंकाया है।- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK सोने ने बीते वर्षों में निवेश के तौर पर शानदार रिटर्न देकर सभी को चौंकाया है।

कई दशकों तक भारत के नीति-निर्माताओं के बीच यह धारणा रही कि सोने का आयात अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह है। इसे विदेशी मुद्रा पर बोझ और पारंपरिक, गैर-उत्पादक निवेश के रूप में देखा जाता था। हालांकि, समय के साथ यह सोच काफी हद तक गलत साबित हुई है। जो निवेश कभी कमजोरी माना जाता था, वही आज भारतीय परिवारों के लिए सबसे बड़े संपत्ति सृजन के साधनों में से एक बनकर उभरा है। 2011 से 2025 के बीच भारत ने लगभग 12,670 टन सोना आयात किया, जिस पर करीब 609 अरब डॉलर खर्च हुए। लेकिन 4 अप्रैल 2026 तक सोने की कीमत करीब 4,677 डॉलर प्रति औंस पहुंचने के बाद, इसी सोने का कुल मूल्य बढ़कर लगभग 1.905 ट्रिलियन डॉलर हो गया है।

कुल विदेशी मुद्रा भंडार से भी अधिक बनी अतिरिक्त संपत्ति

अर्थ भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स आईएफएससी एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर, सचिन सावरिकर कहते हैं कि सिर्फ कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ही करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर की अतिरिक्त संपत्ति बनी है, जो भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार से भी अधिक है। खास बात यह है कि इस अवधि में किसी भी अन्य एसेट क्लास, सरकारी योजना या वित्तीय उत्पाद ने भारतीय परिवारों के लिए इतनी बड़ी संपत्ति नहीं बनाई।

Image Source : PIXABAYसाल 2025 में सोने का प्रदर्शन बहुत शानदार रहा।

आंकड़ों से समझ जाएंगे कैसे बनी बड़ी संपत्ति

सोने ने बीते वर्षों में निवेश के तौर पर शानदार रिटर्न देकर सभी को चौंकाया है। साल 2015 में 35 अरब डॉलर में आयात किया गया सोना आज 157 अरब डॉलर का हो चुका है, यानी करीब 350% का फायदा। 2018 में 32 अरब डॉलर का खरीदा गया सोना चार गुना से भी ज्यादा बढ़कर 142 अरब डॉलर हो गया है। यहां तक कि 2020 जैसे महामारी वाले साल में, जब भारत ने सिर्फ 430 टन सोना 22 अरब डॉलर में खरीदा था, वह भी आज की कीमत पर 65 अरब डॉलर का हो चुका है। 2011 से 2025 के बीच ऐसा एक भी साल नहीं है, जिसमें सोने की कीमत कम से कम दोगुनी न हुई हो।

सोने का आयात और उसका मूल्य

वर्ष आयातित (टन) आयात मूल्य (USD Bn) वर्तमान मूल्य (USD Bn) लाभ (USD Bn) लाभ %
2011 1,081.78 53.92 162.67 108.75 202%
2012 982.69 52.77 147.77 95.00 180%
2013 832.87 39.18 125.24 86.06 220%
2014 798.40 31.21 120.05 88.84 285%
2015 1,047.15 35.02 157.46 122.44 350%
2016 668.27 23.11 100.49 77.38 335%
2017 1,032.93 36.29 155.32 119.03 328%
2018 945.02 31.79 142.10 110.31 347%
2019 836.41 31.24 125.77 94.53 303%
2020 430.10 21.96 64.67 42.71 195%
2021 1,050.00 55.70 157.89 102.19 183%
2022 763.00 38.70 114.73 76.03 196%
2023 744.00 47.00 111.87 64.87 138%
2024 812.22 52.00 122.13 70.13 135%
2025 ~645.00 ~59.10 ~96.99 ~37.89 ~64%
कुल 12,669.84 ~608.99 ~1,905.15 ~1,296.16 ~213%

(Sources: 2011-2020: Ministry of Commerce & Industry, GoI (Lok Sabha Q. No. 4791, 24 March 2021, DGCIS)

2026 में क्या है अनुमान

साल 2025 में सोने का प्रदर्शन बहुत शानदार रहा। इस दौरान 53 बार गोल्ड प्राइस रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचा और डॉलर के हिसाब से करीब 67% सालाना रिटर्न दिया। भारतीय निवेशकों के लिए रुपये की कमजोरी के कारण यह रिटर्न करीब 73% तक पहुंच गया, जिससे सोना बाकी सभी एसेट क्लास से काफी आगे निकल गया। 2026 में सोने की कीमत थोड़ी स्थिर हो रही है। एक ही साल में 53 बार नया रिकॉर्ड बनाने के बाद, करीब 4,677 डॉलर के आसपास ठहराव आना गिरावट नहीं है, बल्कि बाजार का संतुलन बनाना है। जनवरी में सोना 5,594 डॉलर तक पहुंचा था, और इसके पीछे जो बड़े कारण थे, वे अभी भी बने हुए हैं। जैसे बढ़ता सरकारी घाटा, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और रियल यील्ड पर दबाव। ऐसे ठहराव आमतौर पर बड़ी तेजी के बाद आते हैं और लंबे समय के निवेशकों के लिए अच्छे मौके साबित होते हैं। अभी की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है।