Explainer: 'मिसाइल नहीं अब ड्रोन वॉर', आज के युग में कैसे बदला युद्ध का तरीका?
यूक्रेन ने जिस तरह से रूस पर ताजा हमले किए हैं, उससे लगता है कि अब ये लड़ाई मिसाइलों से नहीं, ड्रोन से होगी। जानिए इस एक्सप्लेनर में....

दुनिया के कई देशों के बीच युद्ध जारी है और ये बार-बार इंगित कर रहा है कि दुनिया में हाल-फिलहाल शांति का कोई चांस नहीं है। खास बात यह है कि अब तो लड़ाइयां हो रही हैं उनमें तकनीक अहम भूमिका अदा कर रही है। 7, 8 और 9 मई को पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ तुर्किए के असिसगार्ड सोंगर ड्रोन का इस्तेमाल किया। तुर्किए के असिसगार्ड ड्रोन सेना के लिए डिजाइन किए गए हैं। ये ड्रोन डे-लाइट और इंफ्रारेड कैमरों से लैस हैं। असिसगार्ड ड्रोन की ऑपरेशनल रेंज लगभग 10 किमी है। यह समुद्र तल से 2800 मीटर की ऊंचाई पर उड़ सकता है, इसमें कई तरह के इन-बिल्ट हथियार हैं। यह मशीनगन की तरह 200 राउंड फायर कर सकता है और इसमें विस्फोटक का पे-लोड भी भेजा जा सकता है।
यूक्रेन का ऑपरेशन स्पाइडर वेब
यूक्रेन ने एक जून को रूस के भीतर घुसकर उसके वायु ठिकानों पर एक सटीक और योजनाबद्ध तरीके से हमला किया, जिसे उसने ‘ऑपरेशन स्पाइडर वेब’ नाम दिया। इस ऑपरेशन में यूक्रेन ने ड्रोनों के एक झुंड, स्वार्म ने 4000 किलोमीटर दूर स्थित सुदूर साइबेरिया के एयरबेस समेत प्रमुख लक्ष्यों को निशाना बनाया और रूस के 41 बमवर्षक विमानों को ध्वस्त कर दिया। अब यूक्रेन के इस ऑपरेशन की यह घटना आधुनिक युद्ध के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ बन गई है और कहा जा रहा है कि अब मिसाइलों की जरूरत नहीं होगी, एक देश दूर से ही दूसरे देश को तबाह कर सकते हैं।
ड्रोन से होंगे हमले
ड्रोन जो आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल होने को तैयार हैं वही ड्रोन अब युद्धक्षेत्र में भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। इससे लगता है कि आने वाले समय में AI, स्वार्म टेक्नोलॉजी और ऑटोनोमस सिस्टम तीसरे युद्ध की नई परिभाषा तय करेंगे। भारत पाकिस्तान के संघर्ष में जिस तरह से ड्रोन से हमले किए गए उससे अब ये तय हो गया है कि ड्रोन अब निर्णायक हथियार बन चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर जैसी घटना याद दिलाती है कि नागस्त्र-1 आत्मघाती ड्रोनों ने पाकिस्तान के तुर्की-निर्मित कामिकाज़े ड्रोनों को निष्क्रिय कर दिया था।
ड्रोन युद्ध की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि अब टैंकों जैसे पारंपरिक हथियारों की उपयोगिता कम होती जा रही है। जनरल मारिया कोवाक्स ने 2025 में लातविया के रीगा में आयोजित ड्रोन समिट में कहा, “ड्रोन युद्ध की रणनीतियों को फिर से परिभाषित कर रहे हैं। ये सटीक, स्केलेबल और लागत-कुशल हैं।”
अगली पीढ़ी के ड्रोन AI संचालित होंगे, जो मार्गदर्शन, लक्ष्य चयन और मिशन निष्पादन जैसे निर्णयों को न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ करेंगे। चीन का Jiu Tian “मदरशिप” ड्रोन, जो जुलाई 2025 में परीक्षण के लिए तैयार है, 100 से अधिक AI-नियंत्रित FPV ड्रोन तैनात करने में सक्षम है, जिनमें प्रत्येक स्वतंत्र निर्णय ले सकता है। ऐसे सिस्टम रियल टाइम अनुकूलन के माध्यम से रक्षा प्रणालियों को मात दे सकते हैं, लेकिन इससे ऑटोनोमस हमलों में जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल भी उठते हैं।
अगला युद्ध ड्रोन वॉर ही होगा
रूस पर यूक्रेन के ड्रोन अटैक के बाद पूरी दुनिया मान रही है कि अगला युद्ध ड्रोन से ही होगा। अगला युद्ध सस्ते हथियार से लड़ा जाएगा और उसमें दुश्मन का महंगा सामान गिराया जाएगा। जैसे यूक्रेन ने 50-60 हजार के ड्रोन से रूस को 60 हजार करोड़ का नुकसान करा दिया, वैसा हर देश अपने दुश्मन के साथ करना चाहेगा।
ड्रोन टेक्नोलॉजी अमीर मुल्कों का मोहताज़ नहीं है। ये टेक्नोलॉजी तो ऐसी है कि रूस वीपनरी का इतना बड़ा मास्टर होकर भी ईरान से ड्रोन खरीद रहा है। यूक्रेन के साथ युद्ध में रूस की सेना ईरान की शाहेद- 136 और शाहेद- 131 ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है। वेस्टर्न मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक पुतिन ने इन ड्रोंस के लिए ईरान को 2 बिलियन डॉलर का पेमेंट गोल्ड में किया है।
बदल रहा है ड्रोन का मार्केट
ड्रोन का मार्केट बदल रहा है, साथ ही युद्ध की तकनीक भी बदल रही है। पहले हमास और अब यूक्रेन ने दुनिया को बता दिया है कि पावरफुल दुश्मन से लड़ना हो तो सस्ते हथियार भी बड़े काम के हो सकते हैं। फाइटर प्लेन भेजने या मिसाइल मारने की जगह ड्रोन भेजना आसान है, सस्ता भी है और ये इफेक्टिव भी है।
ऑपरेशन सिंदूर की बात करें तो भारतीय सेना के सस्ते ड्रोन्स ने पाकिस्तान के एयर डिफेंस को इंगेज किया और एयरफोर्स के एडवांस ड्रोन्स ने पाकिस्तान के एयर डिफेंस को न्यूट्रलाइज कर दिया। ये हमारा पहला युद्ध था, जिसमें हमारा दुश्मन से कांटैक्ट नहीं हुआ। हमने दुश्मन को सामने नहीं देखा, हमने उनको रडार पर देखा या किसी और सर्विलांस मशीन पर देखा, LoC पर जो रहा था वो अपवाद था।