Explainer: एक तरफ ट्रंप का शांति प्लान, दूसरी ओर इजरायल का नया फरमान; गाजा खाली नहीं करने पर क्या करेंगे नेतन्याहू?
गाजा को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नया प्लान तैयार किया है। हमास के पूरी तरह खात्मे के लिए इजरायल ने गाजा से सभी फिलिस्तीनियों को तत्काल बाहर निकल जाने का आदेश दिया है। इसके बावजूद वहां डटे रहने वाले आतंकी माने जाएंगे।

Explainer: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फिलिस्तीनियों के लिए एक नया और बड़ा फरमान जारी किया है। इससे हमास के भी होश उड़ गए हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बुधवार को शेष फिलस्तीनियों को गाजा शहर छोड़ने का आदेश देते हुए कहा कि यह उनके लिए ‘अंतिम अवसर’ है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग शहर में रुकेंगे, उन्हें आतंकवादियों का समर्थक माना जाएगा और उन्हें इजराइल के नवीनतम हमलों का सामना करना पड़ेगा।
गाजा नहीं छोड़ने वाले अब माने जाएंगे आतंकी
इजरायल का प्लान गाजा को हमास आतंकियों से पूरी तरह मुक्त करना है। इसलिए नेतन्याहू ने यह नया फरमान जारी किया है। यह इजरायली सेना की एक नई रणनीति मानी जा रही है। बता दें कि इजरायली सेना अक्सर यह आरोप लगाती रही है कि हमास के आतंकी आम नागरिकों के बीच छुपकर इजरायल के खिलाफ आतंकी साजिश को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में उन्हें चुन-चुनकर मारने के लिए इजरायल को अब यही विकल्प सबसे सही लगता है।
ट्रंप के प्रस्ताव का क्या होगा
इजरायल ने यह फरमान ऐसे वक्त में जारी किया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पर 20 सूत्रीय शांति प्लान पेश किया है। हालांकि हमास ने अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। मगर इजरायल ने हमास पर दबाव बनाने के लिए बुधवार को भी गाजा पर बड़ा हमला किया। इस बीच गाजा के स्थानीय अस्पतालों ने जानकारी दी है कि इजरायल द्वारा किये गए हमलों में कम से कम 16 फिलस्तीनी मारे गए। पिछले महीने इजरायल द्वारा गाजा पर कब्जा करने के लिए शुरू किए गए बड़े हमले के बाद से लगभग चार लाख फिलस्तीनी गाजा शहर से पलायन कर चुके हैं। लेकिन हजारों लोग अब भी वहां हैं, जिनमें से कई इतने कमजोर हैं कि दक्षिणी हिस्से में स्थित शिविरों तक नहीं जा सकते।
गाजा में रहने वाले हमास और फिलिस्तीनियों में अब फर्क नहीं करेगा इजरायल
इजरायल ने साफ कह दिया है कि अगर फिलिस्तीनी गाजा नहीं छोड़ते तो वह अब हमास और फिलिस्तीनियों में कोई फर्क नहीं करेगा। यानि आम फिलिस्तीनियों को भी आतंकवादी मानकर उनके खिलाफ सैन्या कार्रवाई की जाएगी। इजरायल के इस फरमान से गाजा में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में गाजा पर इजरायल अपने सैन्य अभियान को और तेज कर सकता है। इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह उन गाजा निवासियों के लिए अंतिम अवसर है जो दक्षिण की ओर जाना चाहते हैं और हमास आतंकवादियों को गाजा शहर में अलग-थलग छोड़ना चाहते हैं।
जो लोग गाजा में रहेंगे उन्हें आतंकवादी और आतंकवाद समर्थक माना जाएगा।’’ अधिकारियों के मुताबिक, इजराइली हमले में मारे गए लोगों में वे भी शामिल हैं, जिन्होंने गाजा शहर में विस्थापितों के लिए बने एक केंद्र में थे। अल-अहली अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, शहर के पूर्वी जितून इलाके में स्थित अल-फलाह स्कूल पर कुछ ही मिनटों के अंतराल पर दो बार हमले हुए। उन्होंने बताया कि हताहतों में पहले हमले के बाद मदद के लिए पहुंचे लोग भी शामिल हैं।
गाजा में हमास को चुन-चुन कर खत्म करना चाहता है इजरायल
इजरायली सेना गाजा में छुपे आतंकियों को चुन-चुनकर सफाया करना चाहती है। इसीलिए स्कूलों, अस्पतालों और राहत शिविरों तक को आतंकियों के छुपे होने की आशंका के बाद निशाना बनाया जा रहा है। इजरायली सेना का दावा है कि हमास राहत शिविरों, स्कूलों और अस्पतालों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में इजरायली सेना ने हमले तेज कर दिए हैं। अस्पताल ने बताया कि बुधवार सुबह गाजा शहर के पश्चिमी हिस्से में एक पेयजल टैंक के आसपास जमा लोगों पर हुए हमले में पांच फलस्तीनी मारे गए।
अल-अवदा अस्पताल के मुताबिक, मध्य गाजा स्थित नुसरत शरणार्थी शिविर पर भी इजराइली हमले हुए, जिसमें एक दंपति की मौत हो गई। उसने बताया कि बुरेज शरणार्थी शिविर पर एक अन्य हमले में एक और व्यक्ति मारा गया। इजराइली सेना ने बुधवार के हमलों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इजराइली सेना ने कहा कि बुधवार दोपहर गाजा के पास के इलाकों में चेतावनी सायरन तब बजने लगे, जब ‘दो प्रक्षेपास्त्र’ उसकी सीमा में दाखिल हुए। उसने बताया कि इन घटनाओं में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
ट्रंप के प्रस्ताव पर सहमत हैं नेतन्याहू, अब हमास का इंतजार
ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलती ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रस्ताव में कुछ पहलुओं पर और बातचीत की ज़रूरत है, जो कतर द्वारा एक दिन पहले की गई टिप्पणियों से मेल खाता है। हमास ने कहा कि वह इस योजना का अध्ययन करेगा, और यह स्पष्ट नहीं है कि वह कब प्रतिक्रिया देगा। दो प्रमुख मध्यस्थों कतर और मिस्र की टिप्पणियों से अरब देशों की 20 सूत्री योजना के प्रस्ताव के प्रति असंतोष झलकता है। वहीं नेतन्याहू ट्रंप के इस प्रस्ताव पर सहमत हैं, क्योंकि इस प्रस्ताव को व्हाइट हाउस में ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा सोमवार को सहमति जताए जाने के बाद पेश किया था।