नई दिल्ली: इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर भीषण हमला किया है। इस दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के घर और ऑफिस को भी निशाना बनाया गया है। ईरान के ऊपर एक साथ कई मिसाइलें दागी गई हैं और उसके परमाणु प्वाइंट को भी निशाना बनाया गया है। हालांकि इस हमले में अभी खामेनेई बच गए हैं और छिपे हुए हैं।
इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार कर दिया है। ईरान ने इजरायल और अमेरिका पर 30 से अधिक मिसाइलें दागी हैं। ईरान ने ये बात कही भी थी कि इतना घातक हमला करेंगे कि किसी ने सोचा भी नहीं होगा। ऐसे में सवाल ये उठता है कि इजरायल और अमेरिका क्यों ईरान में खून की नदियां बहाना चाहते हैं?
ईरान पर हमले की ये है सबसे बड़ी वजह
ईरान पर हमले की सबसे बड़ी वजह ये है कि ईरान परमाणु शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा रखता है और इसके लिए लगातार कोशिश में जुटा है। अमेरिका और इजरायल को पहले से ही इस बात का खौफ सता रहा था कि कहीं ईरान चुपके से परमाणु बम नहीं बना ले।
ईरान पहले भी इस तरह की हरकतें कर चुका है। उसने यूरेनियम की बड़ी मात्रा जमा की है, जो बम बनाने के काम आता है। इसीलिए बीते साल जून 2025 में भी हमला हुआ था लेकिन ईरान फिर भी नहीं रुका। अमेरिका और इजरायल, ईरान पर हमला करके उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोक देना चाहते हैं, जिससे वह दोबारा परमाणु शक्ति बनने की ओर नजर भी ना उठा सके। इसी वजह से ईरान पर इजरायल और अमेरिका द्वारा घातक हमला किया गया है।
ईरान जिनका समर्थन करता, वे करते हैं इजरायल और अमेरिका पर हमले
खूनी संघर्ष का एक कारण ये भी है कि ईरान के द्वारा हिजबुल्लाह (लेबनान), हमास (गाजा), हूती (यमन) और इराक/सीरिया में शिया मिलिशिया को समर्थन मिलता है। जबकि 2023-2024 गाजा युद्ध में इन ग्रुप्स ने अमेरिका और इजरायल पर हमले किए थे। एक कारण ये भी है, जो अमेरिका और इजरायल के अंदर ईरान के लिए नफरत पैदा करते हैं।
अमेरिका और ईरान की क्यों नहीं बात हो पा रही?
बीते कुछ समय से अमेरिका ने ईरान पर ये प्रेशर बनाने की कोशिश की, कि अपना सारा परमाणु प्रोग्राम बंद करो, सारा संवर्धित यूरेनियम हमें सौंपो, मिसाइल प्रोग्राम और प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हमास, हूती) को सपोर्ट बंद करो। लेकिन ईरान ने ये शर्तें नहीं मानीं। इसलिए ट्रंप ने कहा – अब बात नहीं होगी, अब एक्शन लिया जाएगा।