ईरान के होर्मुज बंद करने के बावजूद नहीं रुकेगा तेल, खाड़ी देश प्लान पर कर रहे काम! जानें स्ट्रेट को कैसे करेंगे बाईपास
दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन मानी जाने वाली Strait Of Hormuz क्या अब अपनी रणनीतिक अहमियत खोने वाली है। क्या सऊदी अरब, यूएई और इराक होर्मुज को बाईपास करके तेल निर्यात करने में कामयाब हो सकते हैं, इस आर्टिकल में विस्तार से समझिए।
Highlights
- फुजैराह तक नई पाइपलाइन बिछाकर UAE होर्मुज बाईपास करने की कोशिश में है।
- इराक भी तुर्की, सीरिया और जॉर्डन तक पाइपलाइन बिछाने की प्लानिंग पर काम कर रहा है।
- अगर पाइपलाइन बिछाने का काम सफल हुआ तो 60% तेल बिना होर्मुज से गुजरे एक्सपोर्ट हो सकेगा।
Middle East में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने एक बार फिर Strait Of Hormuz को बंद कर दिया है और वहां से निकलने वाले जहाजों पर निशाना बनाने की लगातार धमकी दे रहा है। इसकी वजह से दुनिया भर और खासकर एशिया के देशों में टेंशन बढ़ गई है कि अगर Hormuz लगातार बंद रहता है तो क्रूड ऑयल कैसे मिलेगा। इस बीच, अच्छी खबर ये आई है कि खाड़ी के देशों ने Strait Of Hormuz को पूरी तरह बाईपास करने का प्लान बना लिया है, जिससे अब दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन मानी जाने वाली स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बादशाहत पर खतरा मंडरा सकता है।
वैकल्पिक रास्तों की तलाश में खाड़ी देश
बता दें कि खाड़ी में जारी अमेरिका-ईरान की जंग के बीच होर्मुज बंद है और सऊदी अरब, यूएई और इराक जैसे देश अब क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट करने के लिए वैकल्पिक रास्तों की तेजी से तलाश कर रहे हैं। उनका उद्देश्य यही है कि अगर होर्मुज बंद भी हो जाए तो इसकी वजह से तेल की सप्लाई बंद न हो।
होर्मुज स्ट्रेट इतनी अहम क्यों?
Strait Of Hormuz को दुनिया के सबसे अहम ऑयल चोक पॉइंट में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी से गुजरने वाला ज्यादातर कच्चा तेल इसी होर्मुज स्ट्रेट से एशिया और दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचता है। अमेरिका-ईरान की जंग के पहले शांति काल में इस स्ट्रेट से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता था। यानी दुनिया के एनर्जी मार्केट की स्थिरता होर्मुज के खुले और बंद रहने पर काफी निर्भर करती है।
खाड़ी देशों की नई रणनीति क्या है?
जान लें कि सऊदी अरब पहले से ही अपने पश्चिम में मौजूद लाल सागर से अपने पूर्वी तेल क्षेत्रों को जोड़ने वाली पाइपलाइन का इस्तेमाल करता है, जिसको 1980 के दशक में बनवाया गया था। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन तेल को Abqaiq में मौजूद प्रोसेसिंग प्लांट से Red Sea के तट पर स्थित Yanbu तक ले जाती है। वहां पहुंचने के बाद, कच्चे तेल को टैंकरों में भरा जाता है जो वहां से या तो साउथ में अरब सागर की तरफ या नॉर्थ में स्वेज नहर की तरफ जाते हैं।
फुजैराह पाइपलाइन का भरपूर इस्तेमाल कर रहा UAE
वहीं, UAE भी फुजैराह तक पहले से मौजूद अपने पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार करने पर काम कर रहा है। UAE का यह फुजैराह शहर होर्मुज से 145 किलोमीटर दूर स्थित है। U.S. एनर्जी इन्फॉर्मेशन एजेंसी के मुताबिक, जंग शुरू होने से पहले इन दोनों पाइपलाइनों की कुल अतिरिक्त क्षमता करीब 35 लाख से 55 लाख बैरल रोजाना थी। अभी ये दोनों पाइपलाइन पूरी क्षमता पर चल रही हैं।
3 अरब डॉलर से नई पाइपलाइन बना रहा UAE
फिलहाल, UAE के अमीरात अबू धाबी की सरकारी तेल कंपनी फुजैराह तक 300 किलोमीटर की एक नई पाइपलाइन पर तेजी से काम कर रही है, जिसकी लागत 3 अरब डॉलर यानी 2 लाख 89 हजार करोड़ भारतीय रुपये है। यह पाइपलाइन पहले से बनी हुई पाइपलाइन के समानांतर ही बन रही है। इसका उद्देश्य फुजैराह को तेल की सप्लाई को प्रति दिन 12 लाख बैरल से ज्यादा बढ़ाना है।
2027 के आखिर तक पूरा हो सकता है प्रोजेक्ट
ग्लोबल डेटा एंड एनालिटिक्स प्लेटफार्म Kpler के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट अभी तक करीब आधा पूरा हो चुका है। इस पाइपलाइन को 2027 की शुरुआत तक पूरा करने का टारगेट है, लेकिन फुजैराह में पोर्ट को बड़ा करने की जरूरत के मद्देनजर इस परियोजना के 2027 के मध्य तक पूरा होने की संभावना है।
इराक ने भी बदली अपनी स्ट्रैटेजी
इराक सरकार, जिसे 90 फीसदी राजस्व कच्चे तेल से आता है, अब अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर तुर्की, जॉर्डन और सीरिया से होते हुए नई पाइपलाइन के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इराक में मौजूद बसरा के तेल टर्मिनल से, जहां से जंग से पहले हर दिन 30 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल एक्सपोर्ट किया जाता था, पाइपलाइन वहां से तुर्की में भूमध्य सागर के किनारे मौजूद सेहान पोर्ट तक तेल पहुंचाएगी।
सीरिया से होते हुए भूमध्य सागर तक पहुंचेगा तेल
इस पाइपलाइन की एक ब्रांच सीरिया में भूमध्य सागर के किनारे मौजूद बनियास पोर्ट तक भी जाएगी। इस पाइपलाइन के माध्यम से बनियास तक प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल तेल पहुंच सकेगा। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह "एक अहम एनर्जी कॉरिडोर" होगा।
बसरा से अकाबा तक पाइपलाइन पर भी हुई बात
इसके अलावा, इराकी सरकार के अफसरों ने जॉर्डन की सरकार के साथ बसरा से अकाबा तक क्रूड ऑयल ले जाने वाली पाइपलाइन के लंबे वक्त से चल रहे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने को लेकर भी बात की है। वहां से क्रूड ऑयल को आगे Red Sea या स्वेज नहर के रास्ते एशिया महाद्वीप और दूसरे इलाकों में निर्यात किया जा सकेगा।
क्या पूरी तरह से खत्म हो जाएगी होर्मुज की बादशाहत?
इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स के एनालिस्ट्स के अनुसार, होर्मुज के बजाय वैकल्पिक रास्ते पर अगर काम शुरू रहता है तो नए प्रोजेक्ट्स के जरिए अगले साल के आखिर तक हर दिन 3.8 मिलियन बैरल और 2028 के आखिर तक प्रतिदिन 7.3 मिलियन बैरल तेल ले जाया जा सकेगा। इससे जंग से पहले होने वाले कुल 23 मिलियन बैरल प्रतिदिन के एक्सपोर्ट का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से प्रभावित नहीं होगा।
वहीं, यानबू पोर्ट पर लोड होने वाले जहाज इसकी जगह स्वेज नहर का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन स्वेज नहर में इंडस्ट्री के सबसे बड़े टैंकर नहीं आ सकते हैं। इन टैंकरों में हर शिप पर 20 लाख बैरल तक कच्चा तेल आ सकता है जो लंबी दूरी तक तेल पहुंचाने के लिए सबसे किफायती साधन होते हैं।
क्या पाइपलाइन पर हमला नहीं कर पाएगा ईरान?
ऐसा नहीं है कि सऊदी अरब से लाल सागर तक पाइपलाइन के माध्यम से भेजा जाने वाला तेल हमले की चपेट में नहीं आ सकता है। हूती विद्रोही पहले से ही बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में सऊदी अरब के जहाजों पर हमला कर रहे हैं। गौरतलब है कि ईरान से दूर मौजूद अन्य खाड़ी देशों की पाइपलाइनें भी ईरान के पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड या समर्थित मिलिटेंट ग्रुप्स के अटैक्स से सुरक्षित नहीं हैं। मई, 2019 में हूती विद्रोहियों ने हमला करके सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर दिया था।
(इनपुट- AP)
