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भीषण गर्मी से तबाह हो रहे AI डेटा सेंटर, ठंडा रखना बड़ी चुनौती, जानें क्यों टेंशन में हैं टेक कंपनियां

गर्मी और जलवायु परिवर्तन ने एआई डेटा सेंटर को भी हांफने पर मजबूर कर दिया है। टेक कंपनियों के लिए एआई चिप को ठंडा रखना बड़ी चुनौती बन गया है, वो वैकल्पिक व्यवस्थाओं की तलाश करने के लिए मजबूर हो गई हैं।

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Image Source : COMPUTER GENERATED IMAGE (CGI) एआई डेटा सेंटर

भीषण गर्मी से केवल इंसान ही परेशान नहीं हैं, बल्कि एआई भी हांफने लगा है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां इस समय टेंशन में है। भीषण गर्मी की वजह से उनके एआई डेटा सेंटर तबाह होने के कगार पर हैं। इन्हें ठंडा रखना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसी कंपनियां ने इससे बचने के लिए अपने डेटा सेंटर के डिजाइन में बदलाव करने का फैसला किया है, ताकि इन्हें हर मौसम में ठंडा रखा जा सके। बेतहाशा गर्मी और तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन ने एआई डेटा सेंटर लगाने वाली कंपनियों की लागत को भी कई गुना बढ़ा दिया है।

ब्लैकआउट का खतरा

एआई डेटा सेंटर्स में बेहद ही शक्तिशाली चिप का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे ठंडा रखना बड़ी चुनौती है। ये डेटा सेंटर कई लाख लीटर पानी पी जाते हैं। अगर, इन्हें ठंडा नहीं रखा जाए तो ये जलकर भस्म हो जाएंगे। ये चिप न सिर्फ तेजी से गर्म होते हैं, बल्कि इन्हें चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। एक डेटा सेंटर में उतनी ही बिजली की खपत होती है, जितनी लाखों में इस्तेमाल की जाती है। ऐसे में बढ़ रही गर्मी से ब्लैकआउट का खतरा मंडरा रहा है।

Image Source : Unsplashएआई डेटा सेंटर

एक रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर में इस्तेमाल की जाने वाली बिजली का लगभग 40% हिस्सा केवल चिप्स को ठंडा रखने में यूज होता है। खास तौर पर गर्म मौसम और तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन ने डेटा सेंटर में बिजली की डिमांड बढ़ा दी है। यही नहीं, गर्मियों में शहरों में भी बिजली की डिमांड बढ़ जाती है। ऐसे में पावरग्रिड के पास पर्याप्त बिजली नहीं बचती है, जो डेटा सेंटर को दिया जा सके।

पिछले दिनों इटली के ट्यूरिन शहर का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जिसकी वजह से जमीन के अंदर बिछी केबल गर्म हो गई और बार-बार ब्लैकआउट होने लगा। बढ़ रही गर्मी की वजह से बिजली की डिमांड भी कई गुना तक बढ़ जाती है। ऐसे में डेटा सेंटर के पास पर्याप्त बिजली की कमी हो सकती है।

मौसम की मार झेल रहे डेटा सेंटर

ज्यूरिख इंश्योरेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय दुनिया के 79% डेटा सेंटर पर मौसमी मार का खतरा मंडरा रहा है। गर्मी ही नहीं तेज हवाओं से भी डेटा सेंटर को होने वाले नुकसान को किस तरह कम किया जाए, ये टेक कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 64% टेक कंपनियों ने अपने डेटा सेंटर को ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में शिफ्ट किया है। इन इलाकों में डेटा सेंटर को अलग तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं तेज हवाएं तो कहीं ओलावृष्टि की वजह से डेटा सेंटर के कूलिंग टावर तबाह हो रहे हैं। ऐसे में डेटा सेंटर को ठंडा रखना बड़ी चुनौती बन गई है।

Image Source : Unsplashएआई डेटा सेंटर

क्यों टेंशन में हैं टेक कंपनियां?

चिलचिलाती गर्मी और तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन ने टेक कंपनियों की टेंशन बढ़ा दी है क्योंकि एआई डेटा सेंटर लगाने की लागत में इजाफा हो गया है, क्योंकि क्लाइमेट चेंज फैक्टर की लागत को इसमें जोड़ा जा रहा है।

साथ ही, उन्हें डेटा सेंटर ऐसी जगह पर लगाना पड़ रहा है, जहां मौसमी नुकसान का खतरा ज्यादा रहता है। गर्मी की वजह से शहरों में बिजली की भारी डिमांड रहती है, जो डेटा सेंटर में पर्याप्त बिजली की आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में तेज हवा और ओलावृष्टि डेटा सेंटर के कूलिंग टावर को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

Image Source : Unsplashएआई डेटा सेंटर

क्या है समाधान?

गर्मी और अन्य मौसमी मार से बचने के लिए माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसी टेक कंपनियों ने डेटा सेंटर के डिजाइन में बदलाव करना शुरू कर दिया है। माइक्रोसॉफ्ट डेटा सेंटर के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग और बैकअप सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है।

वहीं, एआई चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनी एनवीडियो ने डेटा सेंटर्स को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वो अब 45 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में भी काम करेंगे। इसके लिए खास कूलिंग लिक्विड का इस्तेमाल किया जाएगा।

ये वैकल्पिक व्यवस्थाएं बिजली की लागत में 4% तक की कटौती कर रही हैं। हालांकि, ये व्यवस्थाएं कितनी कारगर साबित होंगी ये आने वाले समय में पता चलेगा।

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