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बाढ़ पीड़ितों के शवों की पहचान कैसे करेगा नेपाल, DNA सैंपल और एयरटाइट बैग क्यों हैं अहम, जानें क्या है प्लान?

नेपाल में अब तक 700 से ज्यादा शव मिल चुके हैं। आने वाले दिनों में और भी शव मिलने की आशंका है। मुर्दाघर पहले ही फुल हैं। ऐसे में सरकार ने शवों को एयरटाइट बैग में भरकर दफनाना शुरू कर दिया है, जबकि कई शवों की पहचान अब तक नहीं हुई है।

Nepal flood victim last riots- India TV Hindi
Image Source : PTI नेपाल बाढ़ पीड़ितों का अंतिम संस्कार करते परिजन

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के चलते सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। अब तक 700 से ज्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं। अभी भी हजारों लोग लापता है, जिनकी तलाश में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी हैं। घटना बुधवार को हुई थी। ऐसे में हादसे के चार दिन बाद लापता लोगों के बचे होने की संभावना बेहद कम है। आने वाले दिनों में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान और शव मिलने की आशंका है। नेपाल के मुर्दाघर पहले ही फुल हैं और शवों को सुरक्षित करना बड़ी चुनौती है। ऐसे में नेपाल ने उन शवों का भी अंतिम संस्कार शुरू कर दिया है, जिनकी पहचान अब तक नहीं हुई है। हालांकि, अंतिम संस्कार के बाद भी शवों की पहचान करने के लिए नेपाल सरकार ने खास तैयारी की है।

प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने कहा कि उनकी प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार उन शवों का अंतिम संस्कार कर रही है, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। इन शवों को एयरटाइट बैग में भरकर दफनाया जा रहा है। हालांकि, ऐसा करने से पहले डॉक्टर उनके डीएनए सैंपल ले रहे हैं। ताकि, भविष्य में जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान की जा सके। शवों में अगर कोई खास निशान है, जिससे उसकी पहचान की जा सकती है तो उसे भी रिकॉर्ड किया जा रहा है और यह भी लिखा जा रहा है कि शव किस स्थान पर मिला था। अधिकारियों के अनुसार, इससे लोगों को अपने परिवार के सदस्यों के पार्थिव अवशेषों को बरामद करने में मदद मिलेगी। शनिवार दोपहर तक, अधिकारियों ने 100 से अधिक शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग पूरी कर ली थी, जिन्हें बाद में दफना दिया गया।

Image Source : PTIनेपाल में बाढ़ के बाद का मंजर

बाद में निकाले जा सकेंगे शव

शवों को जमीन में 1.5 मीटर नीचे एयरटाइट बैग में भरकर इसीलिए दफनाया जा रहा है, ताकि बाद में इन्हें निकाला जा सके। अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि दो शवों के बीच 40 सेंटीमीटर का अंतराल बना रहे ताकि डीएनए सैंपल से मेल खाने वाले शव को निकाला जा सके। जिस जगह पर शव दफनाए जा रहे हैं, वहां एक साइनबोर्ड भी बनाया जाएगा और पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जाएगी। अब तक मिले शवों में अधिकतर चितवन जिले से बरामद किए गए हैं। द हिमालयन टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने चितवन में 233 शव बरामद किए हैं, लेकिन उनमें से केवल छह की ही पहचान हो पाई है और उन्हें परिजनों को सौंपा गया है।

तेजी से सड़ रहे शवों को बचाना बड़ी चुनौती

मलबे में दबे शव तेजी से सड़न पकड़ रहे हैं। मुर्दाघर में जगह नहीं है। ऐसे में इन्हें सुरक्षित रखने और डीएनए लेने के लिए भी डॉक्टरों के पास समय कम है। अधिकारियों ने 135 शवों के डीएनए सैंपल ले लिए हैं। इन शवों की पहचान के लिए अधिकारी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, चितवन मेडिकल कॉलेज, भरतपुर अस्पताल, काठमांडू और पाल्पा के मेडिकल कॉलेजों के साथ समन्वय कर रहे हैं। शवों को सड़ने से बचाने के लिए अधिकारियों ने घरों को कोल्ट सेंटर में बदल दिया है।

Image Source : PTIबाढ़ के बाद घरों पर जमा मलबा

700 से ज्यादा मौतें, 2500 लोग लापता

नेपाल में बुधवार को विनाशकारी बाढ़ के बाद अब तक 734 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। इसके बावजूद 2,498 लोग अभी भी लापता हैं। 4,500 से ज्यादा लोगों को अब तक बचाया जा चुका है। प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि भोटेकोशी नदी में जलस्तर एक बार फिर बढ़ गया है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित जिलों में मौजूद लोगों और बचाव कर्मियों से सतर्क रहने का आग्रह किया गया है। चीन में बनी अस्थायी झील का आकार भी बहुत बड़ा है और अगर यह झील फटती है तो नेपाल में पहले से भी ज्यादा भयावह बाढ़ का खतरा है।

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