भारतीय रेलवे ने पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी पर चलने वाले देश के पहले हाइड्रोजन ट्रेन को लॉन्च कर दिया है। पीएम मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन का उद्घाटन किया है। यह ट्रेन हरियाणा के दो शहरों जींद और सोनीपत के बीच चलेगी। इस हाइड्रोजन ट्रेन के साथ भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया, जहां पूरी तरह से उत्सर्जन रहित ट्रेन चलती है। इस ट्रेन की खास बात ये है कि इसमें न तो डीजल और न ही 25KV के बिजली की जरूरत होती है। इस ट्रेन को केवल पानी की मदद से चलाया जाएगा।
क्या है टेक्नोलॉजी?
देश की पहली हाइट्रोजन ट्रेन में नई प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी (Propulsion Technology) का इस्तेमाल किया गया है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से इंजन 3200 हार्स पावर जेनरेट करता है, जिसकी मदद से ट्रेन पटरियों पर सरपट भागती है। इस ट्रेन में इस्तेमाल की गई प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी पानी को हाइड्रोजन में कन्वर्ट करके इंजन को चलाने के लिए पावर जेनरेट करती है। इस समय भारत के अलावा जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे चुनिंदा देशों में ही इस हाइड्रोजन ट्रेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है या इसे टेस्ट किया जा रहा है।
Image Source : Indian Railwaysहाइड्रोजन ट्रेन
हाइड्रोजन ट्रेन की 10 खास बातें
- देश की पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन NaMo GreenRail में 10 कोच लगे हैं, जो हाइड्रोजन फ्यूल सेल की मदद से प्रोपेल होते हैं।
- इसमें इस्तेमाल की गई प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में 1200 kW का हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम इस्तेमाल होता है।
- ट्रेन के इंजन में फ्यूल सेल और हाइड्रोजन सिलिंडर्स रखे गए हैं। हाइड्रोजन सिलिंडर्स में स्टोर किया गया फ्यूल यानी हाईड्रोजन ही इंजन को प्रोपेल करने में मदद करता है।
- साथ ही, जेनरेट किए गए इलेक्ट्रिसिटी को स्टोर करने के लिए इसमें बैटरी स्टैक लगे हैं।
Image Source : Railways Ministry (FB)हाइड्रोजन ट्रेन
- ट्रेन के ड्राइवर केबिन में PAPIS डिस्प्ले लगाया गया है, जिसकी मदद से ट्रेन को ऑपरेट किया जाता है।
- इस ट्रेन में फ्यूल भरने के लिए रेलवे ने जींद रेलवे स्टेशन पर हाइड्रोजन प्रोडक्शन, स्टोरेज और डिसपेंसिंग सिस्टम सेटअप किया है।
- इस हाइड्रोजन ट्रेन को 75 किलोमीटर प्रतिघंटे की ऑपरेशनल और 110 किलोमीटर प्रतिघंटे की अधिकतम स्पीड के लिए डिजाइन किया गया है। भविष्य में इसकी स्पीड बढ़ाई भी जा सकती है।
- NaMo GreenRail के 10 कोच में अधिकतम 2,600 यात्री बैठ सकते हैं।
- यह हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक की मदद से डिजाइन, डेवलप और मैन्युफैक्चर किया गया है।
- इसे ग्रीन ट्रेन इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें उत्सर्जन के तौर पर केवल भाप ही बाहर वातावरण में निकलता है, जो बाद में पानी में बदल जाता है।
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भारतीय रेलवे के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को एक बड़े तकनीकी बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इस परियोजना के सफल होने के बाद सरकार देश के कालका-शिमला, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, पातालपानी, नीलगिरी ऊटी जैसे हेरिटेज रूट्स पर डीजल या कोयले द्वारा ऑपरेट किए जाने वाली ट्रेन की जगह प्रदूषण मुक्त हाइड्रोजन ट्रेन को चला सकती है।
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