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2029 तक भारत के पास होंगे 4 लॉन्च पैड, गगनयान से चंद्रयान-5 तक क्या है ISRO का प्लान?

इसरो आने वाले समय में देश की अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। इसरो प्रमुख वी. नारायणन के मुताबिक, 2029 तक भारत के पास चार परिचालन लॉन्च साइट होंगी। वहीं, गगनयान मिशन के तहत पहला मानवरहित परीक्षण अगले दो महीनों में किए जाने की योजना है।

ISRO- India TV Hindi
Image Source : X@ISRO इसरो

चेन्नई: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसरो के अध्यक्ष वी, नारायणन के मुताबिक वर्ष 2029 तक देश में चार लॉन्च पैड चालू करने की योजना है। इसके साथ ही गगनयान मिशन के तहत मानव को अंतरिक्ष में भेजने की दिशा में परीक्षण किए जा रहे हैं। वहीं जापान के सहयोग से चंद्रयान-5 मिशन की प्लानिंग भी की जा रही है। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर भारत को चार लॉन्च पैड की जरूरत क्यों है, गगनयान के परीक्षण कैसे होंगे और भविष्य को लेकर इसरो का क्या प्लान है?

भारत को चार लॉन्च पैड की जरूरत क्यों?

इसरो ने कामयाबी का वह लेवल पार कर लिया है जिसके बाद सैटेलाइट्स को लॉन्च करने की मांग तेजी से बढ़ रही है। संचार, मौसम, पृथ्वी की निगरानी और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में उपग्रहों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ज्यादा प्रक्षेपण सुविधाएं होने से भारत की अंतरिक्ष गतिविधियों का विस्तार करने में मदद मिल सकती है।इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया है कि 2029 तक देश में चार प्रक्षेपण स्थल चालू हो जाएंगे। हालांकि, उन्होंने चारों स्थलों के नाम और उनकी पूरी समयसीमा का विवरण नहीं दिया है। तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के कुलसेकरपट्टिनम में लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) के लिए अलग प्रक्षेपण परिसर विकसित करने की योजना है। इसके लिए लगभग 2,000 एकड़ क्षेत्र निर्धारित किया गया है।

इस परिसर में क्या-क्या होगा?

  1. रॉकेट के विभिन्न हिस्सों और प्रणालियों को जोड़ने की सुविधाएं।
  2. रॉकेट को प्रक्षेपण के लिए तैयार करने वाली इमारतें।
  3. प्रक्षेपण स्थल और रेल पटरियों की व्यवस्था।
  4. आंकड़े प्राप्त करने, निगरानी और नियंत्रण से जुड़ी सुविधाएं।
  5. इस तरह का परिसर छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है।

गगनयान मिशन

गगनयान भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है। इस मिशन का उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक की मदद से अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता विकसित करना है। इसरो के प्रमुख ने बताया कि अगले दो महीने में मानवरहित परीक्षण की योजना है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले दो और मानवरहित परीक्षण किए जाएंगे।

इसरो प्रमुख के मुताबिक, पहले मानवरहित परीक्षण की योजना अगले दो महीने में है। अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले दो और मानवरहित परीक्षण किए जाएंगे। नारायणन ने कहा, ''इन परीक्षणों में अलग-अलग दबाव, तापमान और आर्द्रता की परिस्थितियों में वातावरण नियंत्रण प्रणाली, सुरक्षा प्रणालियों, आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था और अंतरिक्ष यान के भीतर की सुविधाओं की जांच की जाएगी।'' इसरो के अनुसार, गगनयान कार्यक्रम के लिए जमीन पर लगभग 8,000 प्रयोग किए जा चुके हैं। मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्री विशेष प्रशिक्षण ले रहे हैं।

चंद्रयान-5 में क्या खास होगा?

इसरो जापान की अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से चंद्रयान-5 मिशन की योजना बना रहा है। इस मिशन के तहत लगभग 350 किलोग्राम वजन का रोवर चंद्रमा की सतह पर भेजने का प्रस्ताव है। योजना के मुताबिक, रोवर का लक्ष्य चंद्रमा पर 100 दिन तक प्रयोग करना होगा। इससे चंद्रमा की सतह और वहां की परिस्थितियों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है। यह मिशन भारत और जापान के बीच अंतरिक्ष अनुसंधान सहयोग का भी उदाहरण होगा। हालांकि, मिशन की विस्तृत समयसीमा और अन्य तकनीकी जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

क्या इसरो का निजीकरण होने जा रहा है?

इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने स्पष्ट किया है कि अंतरिक्ष एजेंसी का निजीकरण नहीं किया जाएगा। हालांकि, अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए निजी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसरो प्राइवेट कंपनियों को तकनीकी विशेषज्ञता और सहयोग उपलब्ध कराएगा। इससे अंतरिक्ष से जुड़े उपकरणों, प्रणालियों और सेवाओं के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ सकती है। इसके अलावा, उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी है।

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