Explainers: यूक्रेन ने रूस पर अबतक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया है और ये रूस की वायुसेना पर अब तक का सबसे आक्रामक हमला माना जा रहा है। हालांकि यूक्रेन ने रूसी वायु सेना पर इतने बड़े पैमाने पर इस तरह का हमला कैसे किया, यह ठीक ढंग से बता पाना फिलहाल मुश्किल है। लेकिन कहा जा रहा है कि इन हमलों में सात अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है। यूक्रेन ने किस तरह से इसकी प्लानिंग की और कैसे इसे अंजाम दिया ये तो बाद की बात है लेकिन उसने इसका नाम भी ऐसा यूनिक रखा है जो इस पूरे हमले के लिए तर्कसंगत सा प्रतीत होता है। क्योंकि उसने इसे 'ऑपरेशन स्पाइडर्स वेब' का नाम दिया है जो इसके लिए एक शानदार प्रचार अभियान साबित हो सकता है।
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रूस ने कही ये बात
रूसी रक्षा मंत्रालय ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में देश के पांच प्रांतों में सैन्य हवाई अड्डों को निशाना बनाने की पुष्टि की थी, हालांकि इसके साथ ही मंत्रालय ने दावा किया था कि उसने आइवानवा, रायाज़न और आमिर प्रांतों में सैन्य हवाई अड्डों पर 'सभी हमलों को नाकाम कर दिया है। मंत्रालय ने ये भी बताया कि मिरमंस्क और इरकुत्स्क प्रांतों में नज़दीकी इलाक़ों से ड्रोन उड़ने के बाद 'कई विमानों ने आग पकड़ ली थी।' इसमें कहा गया कि सभी आग को बुझा दिया गया और कोई नुक़सान नहीं हुआ है। साथ ही ये भी दावा किया गया कि 'इन आतंकी हमलों में शामिल कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है।'
रूस ने कहा-यूक्रेन ने की है आतंकी हरकत
रूस ने अपने पांच प्रांतों में यूक्रेन के किए इन हमलों की पुष्टि की है और इसे एक 'आतंकी हरकत' बताया है। रूसी सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए अपुष्ट वीडियो और तस्वीरों में साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में बेलाया एयर बेस पर रूसी रणनीतिक बमवर्षक विमानों को आग लगाते हुए दिखाया गया है। क्षेत्रीय गवर्नर इगोर कोबज़ेव ने कहा कि बेलाया बेस के पास स्थित सेरडनी गांव के पास एक सैन्य इकाई पर ड्रोन हमला हुआ था, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि लक्ष्य क्या था। उन्होंने कहा कि ड्रोन को एक ट्रक से लॉन्च किया गया था।
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क्यों रखा ऐसा यूनिक नाम
यूक्रेन की सैन्य ख़ुफ़िया एजेंसी ने जो जानकारी दी है उसके हिसाब से ऑपरेशन स्पाइडर वेब अब तक की उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। क्योंकि उसने बताया है कि इस ऑपरेशन के लिए उसने 18 महीनों तक तैयारी की और इसमें कई छोटे छोटे ड्रोन्स को रूस में स्मगलिंग के ज़रिए पहुंचाया गया और ड्रोन्स को मकड़ी की जाल की तरह फैला दिया गया। सभी ड्रोन्स को मालवाहक ट्रकों के ख़ास कम्पार्टमेंट में रखा गया और इसके बाद हज़ारों मीलों दूर अलग-अलग चार जगहों पर ले जाकर उन्हें नज़दीकी सैन्य हवाई अड्डों पर रिमोटली लॉन्च किया गया।
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ऐसा ख़ुफ़िया ऑपरेशन कभी हुआ ही नहीं: यूक्रेन के रक्षा विश्लेषक
यूक्रेन के रक्षा विश्लेषक सरई कुज़न ने यूक्रेनी टीवी से कहा, "पूरी दुनिया में आज तक ऐसा ख़ुफ़िया ऑपरेशन कभी हुआ ही नहीं है। ये सारे ड्रोन्स लंबी दूरी के हमले करने में सक्षम थे। उन्होंने बताया कि ये सिर्फ़ 120 हैं जिनमें से हमने 40 को निशाना बनाया जो एक अभूतपूर्व आंकड़ा है। इस नुक़सान का आंकलन करना मुश्किल है, लेकिन यूक्रेनी सैन्य ब्लॉगर ओलेक्सांद्र कोवालेंको कहते हैं कि भले ही बॉम्बर्स और कमांड एंड कंट्रोल एयरक्राफ़्ट तबाह न हुए हों लेकिन इनका प्रभाव बहुत बड़ा है। यूक्रेनी सैन्य ब्लॉगर ओलेक्सांद्र कोवालेंको ने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा, "ये नुक़सान इतना बड़ा है कि रूसी मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स अभी हालिया स्थिति में भविष्य में इन्हें फिर से बनाकर रख सके, ये मुश्किल नज़र आता है।