Explainer: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भीषण जंग, 132 साल पुरानी है लड़ाई, जानें कैसे शुरू हुआ विवाद?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शुक्रवार से ही युद्ध छिड़ा है। दोनों देशों के बीच की अदावत नई नहीं है, सालों पुरानी है। आखिर क्या कारण है कि आए दिन इन दोनों देशों की बीच तनाव की स्थिति आ जाती है और भीषण जंग के हालात बन जाते हैं?
Explainer: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सदियों पहले से चल रहे तनाव के बीच शुक्रवार की दरमियानी रात दोनों देशों के बीच भीषण जंग शुरू हो गई है। पाकिस्तान की सेना ने अफ़ग़ानिस्तान के काबूल, कंधार और पक्तिया सहित कई इलाकों में एयर स्ट्राइक की, जिसके बाद अफगानिस्तान ने भी रात को ही पाकिस्तान की सीमा चौकियों पर ताबड़तोड़ हमले किए। अफगानिस्तान सत्तारूढ़ तालिबानियों के इस हमले पर तीखी टिप्पणी करते हुए रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा, हमारे सब्र का प्याला भर गया है। अब हमारे और तुम्हारे बीच खुली जंग है। अब यह दमा दम मस्त कलंदर होगा। पाकिस्तान की सेना समुद्र पार से नहीं आई है। हम आपके पड़ोसी हैं; हम आपके अंदर और बाहर की बातें जानते हैं।
दोनों देशों के बीच जंग से चिंता में दुनिया
हमले के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा, हम अपने मुल्क के क्षेत्र की एकता और शांति से किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं करेंगे। उनके बयान का तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने ज़ोरदार पलटवार करने की चेतावनी दी। अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 26 फरवरी की रात को पाकिस्तानी सेना ने अफगानी क्षेत्र में बड़े हमले किए जिनमें महिलाओं और बच्चों की जान गई है। हमने बदले की कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे धकेल दिया है। दोनों मुल्कों के बीच शुरू हुए संघर्ष से कतर-मध्यस्थता वाला युद्धविराम खतरे में है और साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
पाक का ऑपरेशन 'गजब लिल हक'
पाकिस्तान और अफगानिस्तान किसी बड़ी जंग के मुहाने पर खड़े हुए हैं। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल सहित कंधार और पक्तिका में बड़े हवाई हमले किए हैं और इसे 'ऑपरेशन गजब-लिल-हक' नाम दिया है, जिसमें अब तक 133 अफगान तालिबान लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है। "ग़ज़ब लिल हक़" एक अरबी शब्द है जिसका मतलब है 'सच के लिए गुस्सा' या 'न्याय के लिए प्रकोप'। ग़ज़ब का अर्थ है गुस्सा या प्रकोप, लिल का अर्थ है के लिए, और हक़ का अर्थ है सच, यानी न्याय या जो सही है।
वहीं अफगानिस्तान ने इस हमले में 50 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने सोशल मीडिया पर अफगानिस्तान से खुले युद्ध की घोषणा की। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालीबान सरकार तहरीक-ए-तालीबान पाकिस्तान को पनाह दे रही है।
डूरंड लाइन बनी और बन गए दुश्मन
1893 में खींची गई थी डूरंड रेखा जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद की सबसे बड़ी वजह है, तब से दोनों देश इसे लेकर लड़ रहे हैं। 2,640 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन 12 नवंबर 1893 को ब्रिटिश इंडिया के विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड और अफगानिस्तान के अमीर अब्दुल रहमान खान के बीच समझौता के तहत खींची गई थी। इस लाइन के खींचने का मुख्य मकसद ब्रिटिश साम्राज्य समय के भारत और अफगानिस्तान के बीच बॉर्डर को तय करना था। यह लाइन ब्रिटिश साम्राज्य के ग्रेट गेम का हिस्सा था, जिसमें वह रूस को भारत में आने से रोकने के लिए अफगानिस्तान को बफर स्टेट बनाना चाहते थे।
अफगानिस्तान डूरंड रेखा को नहीं मानता है, उसका तर्क है कि यह लाइन पश्तून और बलूच कबीलों को दो हिस्सों में बांट देती है। अफगानों के मुताबिक अंग्रेजों ने डूरंड लाइन का यह समझौता जबरन करवाया है। पाकिस्तान ने साल 2017 में इस पूरी लाइन पर कांटेदार तार लगा दिए थे, फिर जब साल 2021 में तालिबान ने सत्ता संभाली तो सत्ता में आते ही इसका विरोध करना शुरू कर दिया। डूरंड लाइन में कई जगह को जीरो पॉइंट कहा जाता है, जिसमें चमन बॉर्डर और तोरखम बॉर्डर जैसे इलाके शामिल हैं। यहां दोनों देशों के सुरक्षा बल आमने-सामने खड़े रहते हैं।
जंग की बड़ी वजह है तहरीक ए तालिबान
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग की दूसरी सबसे बड़ी वजह तहरीक-ए-तालीबान है। तहरीक ए तालिबान एक आतंकी संगठन है। साल 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के बाद जब अमेरिका ने वॉर ऑन टेरर की शुरुआत की और अफगानिस्तान पर हमला किया तो उससे बचने के लिए कई आतंकी अफगानिस्तान को छोड़कर पाकिस्तान के कबायली इलाकों में आकर छुप गए थे। पाकिस्तान ने इस युद्ध में अमेरिका का साथ दिया और आतंकियों पर एक्शन लिया था जिसकी वजह से खैबर पख्तूनख्वा के स्थानीय पश्तून भड़क गए थे।
इसके बाद 2007 में पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन साइलेंस चलाया और लाल मस्जिद में बड़े मिलिट्री ऑपरेशन में मौलाना अब्दुल रशीद गाजी को मार गिराया। उसका बदला लेने के लिए कई आतंकी संगठनों ने बैतुल्लाह महसूद के नेतृत्व में तहरीक-ए- तालिबान पाकिस्तान का गठन किया जिसका मकसद पाकिस्तान की सरकार को उखाड़ फेंकना था।
कितनी पुरानी है पाकिस्तान और अफगानिस्तान की अदावत
- पाकिस्तान और अफगानिस्तान से सटा फाटा छह सीमावर्ती क्षेत्रों का एक समूह था, जहां पाकिस्तान के सामान्य कानून लागू नहीं होते थे। यहां ब्रिटिश काल के 'फ्रंटियर क्राइम्स रेगुलेशन' (FCR) के तहत आदिवासी कबीलों और जिरगा (आदिवासी परिषद) का शासन था।, जो 1947 से 2018 तक अस्तित्व में रहा। यह अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ एक पहाड़ी इलाका है।
- ब्रिटिशों ने FATA को एक अलग इलाका बनाया था जहां उन्होंने 1901 में एक सख्त कानून लागू किया, जिसे फ्रंटियर क्राइम्स रेगुलेशन (FCR) कहा जाता था। यहां न चुनाव होते थे, न स्कूल-अस्पताल बनते थे। लोग बहुत गरीब थे।ये एक बफर जोन था, इसका मतलब FATA ऐसा इलाका था जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच था।
- इसी FATA की वजह से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक दूरी रहती थी। 1947 में जब पाकिस्तान बना, तो पाकिस्तान ने FCR को बरकरार रखा। 1979 में जब सोवियत यूनियन ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, तो पाकिस्तान और अमेरिका ने FATA को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया। इसी FATA की वजह से पाकिस्तान सुरक्षित रहा।
- 1990 के दशक में जब तालिबान बना, तो भी FATA से उसे मदद मिली, लेकिन यह अब एक खतरनाक जगह भी बन गया था। यहां अल-कायदा जैसे आतंकी संगठन पनपे और 2007 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान बना, जिसने पाकिस्तान के खिलाफ ही बगावत शुरू कर दी।साल 2001 में जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया, तो तालिबान और अल-कायदा के लोग FATA में छिप गए। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने भी यही किया. वो FATA से पाकिस्तानी फौज पर हमले करते, और फिर अफगानिस्तान भाग जाते थे।
- 2018 में पाकिस्तान ने FATA को खैबर पख्तूनख्वा में मिला लिया। कुछ पश्तून कबीले चाहते थे कि FATA को अलग सूबा बनाया जाए, लेकिन वो बफर जोन, जो FATA की शक्ल में था, अब खत्म हो गया। अब अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सरहदें सीधे सट गईं हैं। अब अफगानिस्तान का हमला सीधे पाकिस्तान पर होता है, यानी अब दोनों देश आमने-सामने आ गए हैं और लड़ते रहते हैं।
