Strait of Hormuz न्यूक्लियर बम से ज्यादा जरूरी, ईरान के बयान से बौखलाए ट्रंप, छिड़ सकता है भीषण युद्ध?
ईरान ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हमारे लिए न्यूक्लियर बम से ज्यादा जरूरी है। उसके इस बयान पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है, होर्मुज उनका नहीं हो सकता। दोनों देशों के बीच तनातनी के बाद अब आगे क्या होगा?

ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज को लेकर टकराव अब बढ़ता जा रहा है। अमेरिका का कहना है कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, इस पर ईरान अपना कब्जा नहीं कर सकता। तो वहीं ईरान का कहना है कि हमारे लिए दर्जनों परमाणु हथियारों से ज़्यादा अहम है होर्मुज़। ISNA समाचार एजेंसी के अनुसार, सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने कहा, यह रणनीतिक रास्ता दर्जनों परमाणु बमों से भी ज़्यादा अहम है और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान इसकी हर हाल में रक्षा करेगा।
वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के उस दावे को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि ईरानी सेना की पहचान, ट्रैकिंग और निगरानी के बिना कोई भी विदेशी जहाज़ होर्मुज़ से नहीं गुज़र सकता। सेंटकॉम ने एक बयान में कहा, “ईरान का होर्मुज़ पर नियंत्रण नहीं है, यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। अमेरिकी सेना इसे ऐसा ही बनाए रखने के लिए तैनात और तैयार है। दोनों देशों के बीच अब ये टकराव खाड़ी में भीषण युद्ध की वजह बन सकता है।
ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या कहा?
ट्रंप का दावा है कि हमलों से पहले ईरान एक 'बेहतरीन' डील के लिए मान गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट को बताया कि कल ड्रोन से एक जहाज़ को निशाना बनाने से पहले ईरान एक डील के लिए मान गया था। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान हमारे लिए एक बेहतरीन डील के लिए मान गया था और ज़ोर देकर कहा कि उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया। ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को "बीमार" बताते हुए कहा, एक घंटे के भीतर ही उन्होंने एक जहाज़ पर ड्रोन से हमला कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने कल रात उन पर ज़बरदस्त बमबारी की, साथ ही यह भी दावा किया कि होर्मुज़ (Strait of Hormuz) खुला है।
ईरान के लिए क्यों इतना अहम है होर्मुज?
होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा मौजूदा टकराव कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसमें हालात के और बिगड़ने का गंभीर खतरा बना हुआ है। ईरान लंबे समय से इस होर्मुज में समुद्री आवाजाही में जैसे को तैसा (tit-for-tat) वाली बाधाएं डालता रहा है और अपना दबदबा बनाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन फरवरी में अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू की गई जंग ने ईरान के लिए होर्मुज पर कब्ज़ा करने और इसे अपनी ताकत दिखाने के ज़रिया बनाने के लिए एकदम सही हालात पैदा कर दिए हैं। ईरान अब यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि इस पर उनका पूरा नियंत्रण है।
अमेरिकी राजदूत ने कह दी बड़ी बात
NATO में अमेरिका के राजदूत का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच हुई अंतरिम डील हमेशा परफॉर्मेंस पर आधारित थी और इसकी शर्तों में से एक यह थी कि तेहरान होर्मुज (Strait of Hormuz) में जहाजों को डरा-धमका नहीं सकता। मैथ्यू व्हिटेकर ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ डील करना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने हाल ही में अमेरिका द्वारा किए गए हमलों का बचाव किया। व्हिटेकर ने कहा, "अभी, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है... यह देश कुछ सनकी लोगों के नियंत्रण में है, और आखिरकार उन्हें यह समझना होगा कि अमेरिका इस मामले को लेकर बहुत गंभीर है।"
अमेरिका-ईरान अब आमने सामने
ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद है, लेकिन अमेरिका इससे सहमत नहीं है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने लगभग 140 ठिकानों पर हमले किए, जिनमें मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, गोला-बारूद के भंडार, संचार उपकरण और अन्य ठिकाने शामिल थे। उसने कहा कि हाल के दिनों की तुलना में ये हमले ज़्यादा ज़ोरदार थे और इनसे ईरान की जहाज़ों को धमकाने की क्षमता कमज़ोर हो जाएगी।
इसपर, ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी कलीबाफ़ ने लिखा, “एकतरफ़ा समझौतों का दौर अब खत्म हो चुका है। हमने आपसे कहा था: अपनी बात पर कायम रहें या अंजाम भुगतें। हकीकत अब सामने आ रही है।” वहीं, ईरानी मीडिया ने ईरान के बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और केशम द्वीप के समुद्री इलाके में कई धमाकों की खबर दी है। मेहर और फार्स समाचार एजेंसियों ने बताया कि धमाकों की वजह अभी पता नहीं चल पाई है।
खाड़ी में हो सकता है भीषण युद्ध?
अमेरिकी नौसेना ने जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से (जिसे ओमान रूट कहा जाता है) से कई जहाजों को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाला है और जहाजों पर ईरानी हमलों का जवाब ईरान के तटीय इलाकों में बड़े पैमाने पर हमले करके दिया है। ज़ाहिर है, यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती और अब सबसे ज़्यादा जोखिम वाला दौर आने की संभावना जताई जा रही है। इस दौर में ज़्यादा से ज़्यादा दबाव बनाने की स्थिति में टकराव और ज्यादा बढ़ सकता है और भीषण युद्ध हो सकता है। दोनों देशों के बीच सीजफायर को फिर से शुरू करने के लिए दुनिया के बड़े देशों को आगे आना होगा।
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