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'अगर मुझ पर जानलेवा हमला हुआ तो ईरान पर दाग देना 1 हजार मिसाइलें', इतनी खतरनाक धमकी देने तक क्यों और कैसे पहुंच गए ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप आखिर ईरान को 1 हजार मिसाइलों से नेस्तनाबूद करने की धमकी देने तक क्यों पहुंच गए हैं। ट्रंप और ईरान में दुश्मनी इतनी क्यों बढ़ गई है, इस आर्टिकल में इसकी इनसाइड स्टोरी पढ़िए।

Highlights

  • ट्रंप ने ईरान को हजारों मिसाइलें दागने की चेतावनी दी।
  • बार-बार हत्या की धमकी के बाद ट्रंप ने किया पलटवार।
  • ईरान से अमेरिका की सीधी दुश्मनी के हैं कई बड़े कारण।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान सरकार की तरफ से उनकी हत्या या हत्या का प्रयास हुआ तो ईरान पर हजारों मिसाइलें दाग दी जाएंगी। 1 हजार मिसाइलें तो अभी लॉक एंड लोडेड हैं। समझने वाली बात है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह स्टेटमेंट महज एक रणनीतिक चाल नहीं है, बल्कि यह विश्व के सबसे शक्तिशाली देश और पश्चिम एशिया में सबसे ताकतवर देशों में से एक ईरान के बीच चरम पर पहुंच चुकी टेंशन को दिखाता है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी फौज, ईरान के सभी कोनों को नेस्तनाबूद करने के लिए तैयार है। और मिसाइल दागने वाला यह आदेश अगले 1 साल तक जारी रहेगा। इस आर्टिकल में समझिए ट्रंप ने अपनी हत्या की धमकी सुनकर ईरान को इतनी बड़ी चेतावनी क्यों दे डाली।

ट्रंप की जान के पीछे क्यों पड़ा ईरान?

बता दें कि ट्रंप और ईरान के बीच इस ताजा तनाव की जड़ें इतिहास में हैं। डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच इस सीधी दुश्मनी के कई कारण हैं। इनमें से ये 3 प्रमुख हैं।

  1. सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की हत्या- मध्य-पूर्व में तनाव शुरू होने के बाद अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी, 2026 को ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में हवाई हमले किए थे और इसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई समेत ईरान के कई बड़े अधिकारी मारे गए थे। यह सब ट्रंप के आदेश पर हुआ और तभी से ईरानी सरकार और उनके समर्थकों को गुस्सा ट्रंप पर बहुत बढ़ गया।
  2. कासिम सुलेमानी की हत्या- इससे पहले, जनवरी 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के ही आदेश पर अमेरिकी फौज ने इराक के बगदाद एयरपोर्ट के पास ड्रोन अटैक किया था। और इस हमले में ईरान की 'कुद्स फोर्स' के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी की जान चली गई थी। हाल में जब खामेनेई की अंतिम यात्रा निकली तो उसमें भी कासिम सुलेमानी का नाम लिया गया है और ट्रंप से बदला लेने के नारे लगे।
  3. ईरान के परमाणु समझौते से वापसी- डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के वक्त हुए ईरान न्यूक्लियर डील से अमेरिका को बाहर कर लिया था। इसके साथ ही, ईरान पर Maximum Pressure की पॉलिसी के तहत सख्त आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिए थे। इसने ईरान की इकोनॉमी को काफी नुकसान पहुंचाया था। साथ ही, इसकी वजह से ईरान का न्यूक्लियर वाला सपना भी टूट गया था।

ईरान को ट्रंप की 1 हजार मिसाइल वाली धमकी

इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान पर 1 हजार मिसाइलें लॉक और लोड करके निशाना साधे हुए हैं। अगर ईरान की सरकार ने अपनी उस धमकी पर अमल किया- जिसमें उसने अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति यानी मेरी हत्या करने या हत्या का प्रयास करने की बात कही है, तो तुरंत हजारों और मिसाइलें दाग दी जाएंगी। इसके आदेश दिए जा चुके हैं और अमेरिकी सेना ईरान के सभी इलाकों को पूरी तरह से तबाह और बर्बाद करने के लिए तैयार और सक्षम है। यह तैयारी अगले 1 साल तक के लिए है और इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है: डोनाल्ड ट्रंप

Image Source : Donald Trump/Truth Socialईरान को ट्रंप की खतरनाक धमकी।

जब तुर्की दौरे पर ट्रंप का अपना विमान बदलना बना चर्चा का विषय

बीते 7-8 जुलाई को तुर्की में आयोजित NATO समिट के बाद डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर जो कदम उठाया गया, वह भी पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया। दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप, NATO समिट में भाग लेने के लिए तुर्की गए हुए थे। इसमें दिलचस्प ये रहा कि ट्रंप ने अमेरिका से तुर्की पहुंचने में अपने नए और एडवांस बोइंग 747-8 प्लेन का इस्तेमाल किया। यह प्लेन इसलिए भी खास था क्योंकि इसको कतर ने ट्रंप को तोहफे के रूप में दिया था। अमेरिका ने इसमें ट्रंप की सुरक्षा के लिए कई बदलाव भी किए हैं।

अंकारा से अमेरिका लौटते वक्त ट्रंप ने बदला था विमान

इसके बावजूद, नाटो समिट खत्म होने के बाद जब डोनाल्ड ट्रंप वापस अमेरिका लौटने लगे तो उन्हें अपना प्लेन बदला पड़ा। ट्रंप अपने नए विमान के बजाय पुराने बोइंग VC-25A एयर फोर्स वन से अमेरिका वापस लौटे। वहीं, उनका नया प्लेन ब्रिटेन स्थित रॉयल एयर फोर्स के मिल्डेनहॉल एयरबेस में भेज दिया गया। हालांकि, ट्रंप ने यह स्वीकार नहीं किया कि ईरान के डर या किसी सुरक्षा खतरे की वजह से उन्होंने अपना प्लेन बदला। लेकिन ट्रंप ने ये जरूर कहा, 'ईरान के निशाने पर सबसे ऊपर मैं ही हूं।'

क्या सुरक्षा के मद्देनजर ऐसा किया गया?

गौरतलब है कि ट्रंप का प्लेन बदलने का फैसला ऐसे वक्त में किया गया, जब अमेरिका ने बीते 7-8 जुलाई को ईरान के ऊपर पलटवार करते हुए उसके 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर बम बरसाए। इसकी वजह से अमेरिका-ईरान में टेंशन और बढ़ गई। माना जा रहा है कि तुर्की का बॉर्डर ईरान से सटा हुआ है, शायद इसीलिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सिक्योरिटी को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती गई। हालांकि, इसके पीछे के कारण की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।

क्या दुश्मन को चकमा देने के लिए बदला प्लेन?

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने भी इसको लेकर बयान दिया और कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति के प्लेन में राष्ट्रपति और उनके स्टाफ की सिक्योरिटी के लिए हाईलेवल के सुरक्षा प्रोटोकॉल हैं। लेकिन जैसा कि ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि अमेरिका के कई शत्रु उन्हें टारगेट करना चाहते हैं। तो ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां हर मुमकिन तरीका अपनाती हैं, जिनमें दुश्मन का ध्यान भटकाने और कंफ्यूजन पैदा करने जैसी रणनीतियां भी शामिल होती हैं।'

ईरान कितनी दूर तक कर सकता है मार?

हथियार का नाम और टाइप मारक क्षमता (रेंज) डेटा सोर्स
खुर्मशहर-4 खैबर (बैलिस्टिक मिसाइल) 2,000 से 3,000 किलोमीटर ईरानी रक्षा मंत्रालय (IRNA रिपोर्ट, मई 2023) और CSIS मिसाइल थ्रेट एनालिसिस
सज्जिल (बैलिस्टिक मिसाइल) लगभग 2,000 किलोमीटर CSIS मिसाइल थ्रेट प्रोजेक्ट और IISS (द मिलिट्री बैलेंस रिपोर्ट)
शाहेद-136 (सुसाइड ड्रोन) लगभग 2,500 किलोमीटर जेन्स डिफेंस वीकली (Jane's) और अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) के डीक्लासिफाइड इनपुट्स
अराश-2 (सुसाइड ड्रोन) 2,000 किलोमीटर तस्नीम और फार्स न्यूज़ एजेंसी (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की आधिकारिक घोषणा)
शाहेद-149 गाजा (कॉम्बैट ड्रोन) 2,000 किलोमीटर से अधिक जेन्स डिफेंस पोर्टल और ईरानी राज्य मीडिया (IRNA) के तकनीकी स्पेसिफिकेशन

अमेरिका तक मार करने वाले हथियार ईरान के पास नहीं

हालांकि, ईरान के पास 7 हजार किलोमीटर दूर यानी अमेरिका तक मार करने वाले मिसाइल या ड्रोन नहीं हैं। ईरान की तरफ से ट्रंप को धमकी तो दी गई है लेकिन वह खोखली है या उसके लिए कोई प्लान है, यह तो ईरान ही जान सकता है। दूसरी तरफ, ट्रंप अपनी पूरी सतर्कता दिखा रहे हैं और इन धमकियों से उत्तेजित होकर ईरान को 1 हजार मिसाइलों वाली बड़ी धमकी भी दे डाली है। आने वाले वक्त में देखना होगा कि मिडिल-ईस्ट के तनाव का रुख क्या होता है, शांति होगी या लोगों को युद्ध की आग का ताप अभी और महसूस करना होगा।

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